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दर्द:...साहब! क्या पापा मर जाएंगे, तब होगी रजिस्ट्री, अधिकारी और बाबुओं की कारस्तानी सुनाते हुए भावुक हुआ बेटा
Fri, 22 Jul 2022 12:33 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 22 Jul 2022 12:33 PM IST
सार
जसवंत सिंह सुयाल (78) को साथ लेकर उनके बेटे भगवान सिंह सुयाल व मामा जनता अदालत में पहुंचे। भगवान सिंह संपत्ति एवं रजिस्ट्री सेक्शन के अधिकारी और बाबुओं की कारस्तानी सुनाते-सुनाते भावुक हो गए। एलडीए वीसी से कहा कि साहब! क्या जब पापा मर जाएंगे, तब होगी रजिस्ट्री।
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भगवान सिंह अधिकारी को अपनी समस्या बताते हुए भावुक हुए
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
लखनऊ में एलडीए ने जन सामान्य और आवंटियों की समस्याओं के निस्तारण के लिए बृहस्पतिवार को कमेटी हॉल में प्राधिकरण दिवस/जनता अदालत का आयोजन किया। इस मौके पर 58 शिकायतें आईं, जिसमें से 12 का मौके पर ही निस्तारण किया गया। एलडीए वीसी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने निर्देश दिए कि संवेदनशील प्रकरणों के निस्तारण के लिए संबंधित विशेष कार्याधिकारी खुद मौके पर जाकर जांच करेंगे।
वहीं, जसवंत सिंह सुयाल (78) को साथ लेकर उनके बेटे भगवान सिंह सुयाल व मामा जनता अदालत में पहुंचे। भगवान सिंह संपत्ति एवं रजिस्ट्री सेक्शन के अधिकारी और बाबुओं की कारस्तानी सुनाते-सुनाते भावुक हो गए। एलडीए वीसी से कहा कि साहब! क्या जब पापा मर जाएंगे, तब होगी रजिस्ट्री।
फरियादी की बात सुनकर उपाध्यक्ष भौचक्के रह गए। उपाध्यक्ष ने संबंधित ओएसडी, अपर सचिव व अधिशासी अभियंता की संयुक्त टीम गठित करते हुए तत्काल रजिस्ट्री कराने के निर्देश दिए। दरअसल, जसवंत हजरतगंज की मलिन बस्ती में रहते हैं, उनका कभी 3500 वर्गफीट भूखंड के बीच में छोटा सा मकान था।
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एलडीए ने गोमतीनगर विस्तार योजना में इनके भूखंड व घर का अधिग्रहण कर लिया। उसके एवज में उन्हें 1250 वर्गफीट का भूखंड दिया। इसकी रजिस्ट्री के लिए जसवंत सिंह ने साल 2017 में 1.62 लाख रुपये एलडीए के खजाने में जमा कराए। पांच साल से भूखंड की रजिस्ट्री के लिए एलडीए की दौड़ लगाते रहे। खुद बीमार पड़े तो बेटा भगवान दो साल से रजिस्ट्री कराने के लिए दौड़भाग कर रहा था।
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वहीं, जसवंत सिंह सुयाल (78) को साथ लेकर उनके बेटे भगवान सिंह सुयाल व मामा जनता अदालत में पहुंचे। भगवान सिंह संपत्ति एवं रजिस्ट्री सेक्शन के अधिकारी और बाबुओं की कारस्तानी सुनाते-सुनाते भावुक हो गए। एलडीए वीसी से कहा कि साहब! क्या जब पापा मर जाएंगे, तब होगी रजिस्ट्री।
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फरियादी की बात सुनकर उपाध्यक्ष भौचक्के रह गए। उपाध्यक्ष ने संबंधित ओएसडी, अपर सचिव व अधिशासी अभियंता की संयुक्त टीम गठित करते हुए तत्काल रजिस्ट्री कराने के निर्देश दिए। दरअसल, जसवंत हजरतगंज की मलिन बस्ती में रहते हैं, उनका कभी 3500 वर्गफीट भूखंड के बीच में छोटा सा मकान था।
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एलडीए ने गोमतीनगर विस्तार योजना में इनके भूखंड व घर का अधिग्रहण कर लिया। उसके एवज में उन्हें 1250 वर्गफीट का भूखंड दिया। इसकी रजिस्ट्री के लिए जसवंत सिंह ने साल 2017 में 1.62 लाख रुपये एलडीए के खजाने में जमा कराए। पांच साल से भूखंड की रजिस्ट्री के लिए एलडीए की दौड़ लगाते रहे। खुद बीमार पड़े तो बेटा भगवान दो साल से रजिस्ट्री कराने के लिए दौड़भाग कर रहा था।
फर्जी रजिस्ट्री से भूखंडों पर कब्जा, नहीं हो रही जांच
जनता अदालत में ट्रांसपोर्ट नगर के हरप्रीत सिंह भाटिया पेश हुए और उपाध्यक्ष को पत्र देकर कहा कि कर्मियों की सांठगांठ से फर्जी रजिस्ट्री कराकर भूखंडों पर कब्जा करा दिया गया है। ऐसे 95 भूखंड हैं, जिनकी जांच नहीं हो रही है। इससे पहले भी दो बार शिकायत कर चुके हैं। जांच की नौबत आने से पहले ही उपाध्यक्ष हट जाते हैं। हरप्रीत ने उच्च स्तरीय जांच कराकर घोटालेबाजों को बेनकाब करने की मांग की।
एलडीए के सेवानिवृत्त कर्मी ने सुनाई व्यथा
एलडीए के ही सेवानिवृत्त कर्मी मोहम्मद रफीक ने उपाध्यक्ष को अपनी व्यथा सुनाई। उन्होंने बताया कि 36 साल तक एलडीए की नौकरी करने के बाद भी विभाग में उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पेपरमिल कॉलोनी स्थित बेटी के मकान पर एलडीए अफसर की कारस्तानी के चलते कब्जा करने की साजिश रची जा रही है। पड़ोसी उसके घर पर कब्जा करने के लिए प्रताड़ित कर रहे हैं, बार-बार अनुरोध के बावजूद विभाग में उनकी भी सुनवाई नहीं हो रही है।
एलडीए के सेवानिवृत्त कर्मी ने सुनाई व्यथा
एलडीए के ही सेवानिवृत्त कर्मी मोहम्मद रफीक ने उपाध्यक्ष को अपनी व्यथा सुनाई। उन्होंने बताया कि 36 साल तक एलडीए की नौकरी करने के बाद भी विभाग में उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पेपरमिल कॉलोनी स्थित बेटी के मकान पर एलडीए अफसर की कारस्तानी के चलते कब्जा करने की साजिश रची जा रही है। पड़ोसी उसके घर पर कब्जा करने के लिए प्रताड़ित कर रहे हैं, बार-बार अनुरोध के बावजूद विभाग में उनकी भी सुनवाई नहीं हो रही है।