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पिता के शव को ठेलिया पर ढोते रहे निशक्त भाई-बहन, नहीं पसीजा किसी का दिल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 27 Mar 2018 09:44 AM IST
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पिता के शव को ले जाते भाई-बहन।
गरीबी और निशक्तता का मारा राजकुमार अपनी छोटी बहन मंजू के साथ ठेलिया पर लादकर बीमार पिता मंशाराम (50) को सीएचसी तक लाने में सफल तो हो गया पर जान न बचा सका।
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यही नहीं अस्पताल से शव को वापस ले जाने के लिए भाई-बहन घंटों भटके लेकिन कोई मदद के लिए नहीं आया। हां, तरस खाकर कुछ ग्रामीणों ने ठेलिया में धक्का जरूर लगा दिया। डॉक्टर बताते रहे प्रधान को सूचना भेजी गई है, वह आकर मदद करेंगे।
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जब दो घंटे तक कोई नहीं आया तो आंख में आंसू लिए राजकुमार आठ किलोमीटर तक पिता का शव ठेलिया पर ढोकर लोनी कटरा लाया। संवदेनहीनता का आलम ये है कि आर्थिक मदद नहीं मिलने से शव का अंतिम संस्कार भी नहीं हो सका है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि मंगलवार सुबह कुछ न कुछ इंतजाम हो जाएगा।
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डॉक्टर बोले, पहले ही हो चुकी थी मौत
प्रधान प्रतिनिधि सत्यदेव साहू ने बताया कि वह बाहर होने के कारण सहायता के लिए सीएचसी पर नहीं पहुंच सके। वहीं सीएचसी पर मौजूद डॉ. प्रदीप का कहना है कि मरीज जब यहां पहुंचा तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। सीएचसी से शव को वापस गांव भिजवाने की कोई व्यवस्था नहीं है। सीएचसी अधीक्षक मुकुंद पटेल ने कहा कि मैं जिला मुख्यालय पर डीएम की मीटिंग में आया हूं। यदि मौजूद होते तो जरूर शव वापस भिजवाता भले ही निजी खर्च पर।