{"_id":"692373f73342b6ecd50c5743","slug":"software-will-tell-you-how-much-risk-you-have-of-alzheimers-lucknow-news-c-13-1-vns1028-1485838-2025-11-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: सॉफ्टवेयर बताएगा आपको अल्जाइमर का कितना खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: सॉफ्टवेयर बताएगा आपको अल्जाइमर का कितना खतरा
विज्ञापन
केजीएमयू लखनऊ।
लखनऊ। उम्र, बॉडी मास इंडेक्स, हृदय गति और गठिया जैसी 19 सामान्य सूचनाओं के आधार पर व्यक्ति में अल्जाइमर जैसा गंभीर रोग होने की संभावना का पता लगाया जा सकता है। केजीएमयू के साझा अध्ययन में 52,537 व्यक्तियों के डाटा से विशेष प्रकार का मशीन लर्निंग टूल विकसित किया गया है। यह जल्द ही सभी के लिए ऑनलाइन उपलब्ध होगा।
केजीएमयू में न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ प्रो. हरदीप सिंह मल्होत्रा ने बताया कि अल्जाइमर मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र की प्रगतिशील बीमारी है। इस बीमारी में याददाश्त और सोचने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो जाती है। अभी तक इसका इलाज नहीं तलाशा जा सका है। समय रहते बीमारी का पता चलने पर दवाओं से इसकी प्रगति धीमी की जा सकती है। समय रहते इसकी पहचान करना बेहद अहम है। इसके लिए मशीन लर्निंग पर आधारित सॉफ्टवेयर विकसित करने का प्रयास किया गया है।
इसके लिए हुए 52,537 व्यक्तियों के डेटा का विश्लेषण किया गया। इनमें से 22,371 अल्जाइमर पीड़ित थे। इनमें सामान्य सूचनाएं फीड करके परिणाम जांचे गए। ये परिणाम 82 फीसदी तक सटीक थे। यह सॉफ्टवेयर जल्द ही ऑनलाइन उपलब्ध हो जाएगा। इसे अल्जाइमर एंड डिमेंशिया जर्नल में प्रकाशन के साथ मान्यता मिली है।
विज्ञापन
इसलिए अहम है यह अध्ययन
केजीएमयू के पूर्व और वर्तमान में एरा मेडिकल कॉलेज में न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. रवींद्र कुमार गर्ग के अनुसार, भारत जैसे निम्न और मध्यम आय वाले देशों में अल्जाइमर जैसी बीमारी का बोझ काफी गंभीर है। इलाज न होने और देर से पता चलने से रोगी और उनके परिवारों पर भारी दबाव पड़ता है। यह मशीन लर्निंग मॉडल जोखिम की पहचान कर लेगा और समय रहते दवाओं के माध्यम से व्यक्ति की बीमारी पर काबू पाया जा सकेगा।
अध्ययन में ये रहे शामिल
डॉ. विनय सुरेश, डॉ. तूलिका नाहर, डॉ. अरकांश शर्मा, डॉ. सुहृद पंचवाघ, डॉ. उमर मोहम्मद, डॉ. मुनीब अहमद मुनीर, डॉ. देवांश मिश्रा, डॉ. अमोघ वर्मा, डॉ. विवेक शंकर, डॉ. आयुष मिश्रा, डॉ. हरदीप सिंह मल्होत्रा और डॉ. रवींद्र कुमार गर्ग।
गठिया और डिप्रेशन से बढ़ता है खतरा
अध्ययन के दौरान 19 क्लीनिकल सूचनाओं में गठिया, लंबाई, दिल की धड़कन, बॉडी मॉस इंडेक्स, उम्र, पार्किंसन संबंधी बीमारियां, स्ट्रोक, खर्राटे, धूम्रपान, पिछले दो साल में डिप्रेशन, बीपी, दिल संबंधी बीमारियां, दौरा, मनोरोग, डायबिटीज, विटामिन बी-12 आदि को शामिल किया गया। इसमें देखा गया कि मुख्य रूप से गठिया की बीमारी, व्यक्ति की उम्र और हाल के दिनों में डिप्रेशन जैसी स्थितियां अल्जाइमर के लिए जोखिम का कारण बन सकती हैं।
जानिए, क्या है मशीन लर्निंग टूल
मशीन लर्निंग टूल ऐसे सॉफ्टवेयर और एप्लिकेशन होते हैं जो मशीनों को डेटा से सीखने और बिना स्पष्ट प्रोग्रामिंग के खुद से सुधार करने में मदद करते हैं। ये टूल कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं जो पैटर्न को पहचानने, भविष्यवाणी और वर्गीकरण के लिए उपयोगी होते हैं।
विज्ञापन
केजीएमयू में न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ प्रो. हरदीप सिंह मल्होत्रा ने बताया कि अल्जाइमर मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र की प्रगतिशील बीमारी है। इस बीमारी में याददाश्त और सोचने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो जाती है। अभी तक इसका इलाज नहीं तलाशा जा सका है। समय रहते बीमारी का पता चलने पर दवाओं से इसकी प्रगति धीमी की जा सकती है। समय रहते इसकी पहचान करना बेहद अहम है। इसके लिए मशीन लर्निंग पर आधारित सॉफ्टवेयर विकसित करने का प्रयास किया गया है।
विज्ञापन
इसके लिए हुए 52,537 व्यक्तियों के डेटा का विश्लेषण किया गया। इनमें से 22,371 अल्जाइमर पीड़ित थे। इनमें सामान्य सूचनाएं फीड करके परिणाम जांचे गए। ये परिणाम 82 फीसदी तक सटीक थे। यह सॉफ्टवेयर जल्द ही ऑनलाइन उपलब्ध हो जाएगा। इसे अल्जाइमर एंड डिमेंशिया जर्नल में प्रकाशन के साथ मान्यता मिली है।
विज्ञापन
इसलिए अहम है यह अध्ययन
केजीएमयू के पूर्व और वर्तमान में एरा मेडिकल कॉलेज में न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. रवींद्र कुमार गर्ग के अनुसार, भारत जैसे निम्न और मध्यम आय वाले देशों में अल्जाइमर जैसी बीमारी का बोझ काफी गंभीर है। इलाज न होने और देर से पता चलने से रोगी और उनके परिवारों पर भारी दबाव पड़ता है। यह मशीन लर्निंग मॉडल जोखिम की पहचान कर लेगा और समय रहते दवाओं के माध्यम से व्यक्ति की बीमारी पर काबू पाया जा सकेगा।
अध्ययन में ये रहे शामिल
डॉ. विनय सुरेश, डॉ. तूलिका नाहर, डॉ. अरकांश शर्मा, डॉ. सुहृद पंचवाघ, डॉ. उमर मोहम्मद, डॉ. मुनीब अहमद मुनीर, डॉ. देवांश मिश्रा, डॉ. अमोघ वर्मा, डॉ. विवेक शंकर, डॉ. आयुष मिश्रा, डॉ. हरदीप सिंह मल्होत्रा और डॉ. रवींद्र कुमार गर्ग।
गठिया और डिप्रेशन से बढ़ता है खतरा
अध्ययन के दौरान 19 क्लीनिकल सूचनाओं में गठिया, लंबाई, दिल की धड़कन, बॉडी मॉस इंडेक्स, उम्र, पार्किंसन संबंधी बीमारियां, स्ट्रोक, खर्राटे, धूम्रपान, पिछले दो साल में डिप्रेशन, बीपी, दिल संबंधी बीमारियां, दौरा, मनोरोग, डायबिटीज, विटामिन बी-12 आदि को शामिल किया गया। इसमें देखा गया कि मुख्य रूप से गठिया की बीमारी, व्यक्ति की उम्र और हाल के दिनों में डिप्रेशन जैसी स्थितियां अल्जाइमर के लिए जोखिम का कारण बन सकती हैं।
जानिए, क्या है मशीन लर्निंग टूल
मशीन लर्निंग टूल ऐसे सॉफ्टवेयर और एप्लिकेशन होते हैं जो मशीनों को डेटा से सीखने और बिना स्पष्ट प्रोग्रामिंग के खुद से सुधार करने में मदद करते हैं। ये टूल कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं जो पैटर्न को पहचानने, भविष्यवाणी और वर्गीकरण के लिए उपयोगी होते हैं।