कहीं कांग्रेसी युवराज के लिए खतरा न बन जाएं 'तुलसी'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टीवी सीरियल क्योंकि सास भी कभी बहू थी की ‘तुलसी’ के रूप में मशहूर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी कांग्रेसियों के गढ़ अमेठी में उन्हीं के लिए चुनौती बनती जा रही हैं। लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद स्मृति के अमेठी प्रेम को कांग्रेसी भी पार्टी उपाध्यक्ष व अमेठी सांसद राहुल गांधी के लिए खतरे की घंटी मानने लगे हैं।
कभी स्मृति की सक्रियता को हल्के में लेने वाले कांग्रेसियों की बेचैनी से पार्टी के भीतर चल रही खलबली का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बीते कई चुनावों से अमेठी में चुनाव लड़ने की औपचारिकता निभाने वाली भारतीय जनता पार्टी ने बीते लोकसभा चुनाव में बड़ा दांव खेला था। पार्टी ने ऐन मौके पर अभिनय से राजनीति में आईं स्मृति जुबिन ईरानी को अमेठी से अपना उम्मीदवार घोषित किया था।
प्रत्याशी घोषित होने के बाद स्मृति पहली बार सात अप्रैल 2014 को अमेठी पहुंचीं थीं। स्मृति ने राहुल के गढ़ में उन्हें शिकस्त देने के लिए कड़ी मेहनत भी की। बावजूद इसके वे राहुल के मुकाबले जीत दर्ज नहीं कर सकीं।
हारने पर नहीं थी अमेठी लौटने की उम्मीद
चुनाव के दौरान स्मृति की लगन व मेहनत से परेशान कांग्रेसी उनके चुनाव हारने के बाद इस खुशफहमी में थे कि अब शायद ही वे अमेठी का रुख करें। कांग्रेसियों की इस सोच के विपरीत स्मृति ईरानी केंद्रीय मंत्री बनने के बाद भी अमेठी आईं।
स्मृति ईरानी का अमेठी प्रेम लोगों को भले ही रास आ रहा हो लेकिन इसने कांग्रेसी खेमे की बेचैनी बढ़ा दी है। आलम यह है कि क्षेत्र में कांग्रेस का चेहरा माने जाने वाले राहुल के कई करीबी नेता भी स्मृति के अमेठी प्रेम को पार्टी उपाध्यक्ष के लिए खतरे की घंटी मानने लगे हैं।
कांग्रेसियों का मानना है कि बड़ी जिम्मेदारी नहीं होने के बावजूद राहुल का क्षेत्र से नदारद रहना और केंद्रीय मंत्री होने के बाद भी स्मृति का अमेठी में बने रहना सांसद के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
12 मई को स्मृति का एक दौरा सार्वजनिक होने और 25 मई को दूसरे दौरे की भनक ने कांग्रेसियों की बेचैनी को और बढ़ा दिया है।