अमेठी की 65 एकड़ जमीन पर स्मृति ने राहुल गांधी को घेरा
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जमीन मुद्दे पर केंद्र सरकार पर आरोप लगाने वाले राहुल गांधी ने खुद किसानों की जमीन हड़प ली है। 1980 में साइकिल फैक्ट्री के नाम पर अधिग्रहीत 65 एकड़ जमीन में न कारखाना लगा और न ही किसी को रोजगार मिला। अब उस जमीन को राजीव गांधी ट्रस्ट ने खरीद लिया है।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के दौरे के तीन दिन बाद ही रविवार को अमेठी पहुंची केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने इन तीखे शब्दों की शक्ल में कांग्रेस पर हमला बोला।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी रविवार को प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत लोकसभा क्षेत्र की 25 हजार महिलाओं के बीमा का एक वर्ष का प्रीमियम भरने अमेठी आईं। कार्यक्रम में स्मृति ईरानी ने अपने संबोधन में कहा कि राहुल गांधी केंद्र सरकार के भूमि अधिग्रहण बिल को किसान विरोधी बता सदन का बहिष्कार करते हैं पर खुद अमेठी में किसानों की 65 एकड़ भूमि हड़पने से गुरेज नहीं करते।
स्मृति ने कहा कि 1980 में अमेठी के कौहार में किसानों की 65 एकड़ भूमि सम्राट साइकिल फैक्ट्री के लिए अधिग्रहीत कर एक उद्योगपति को दे दी गई थी। अब तक न तो फैक्ट्री चली और न ही किसानों को रोजगार मिला बल्कि स्वयं को किसानों का हितैषी बताने वाले राहुल गांधी ने 24 फरवरी 2015 को 65 एकड़ भूमि राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम करके किसानों की भूमि हड़पने का काम किया है।
कांग्रेस व राहुल गांधी के सफाए तक होता रहेगा संघर्ष
स्मृति ने ऐलान किया कि अमेठी में उनका संघर्ष तब तक चलता रहेगा जब तक अमेठी से कांग्रेस/राहुल गांधी का सफाया नहीं हो जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन राजेश अग्रहरि ने किया था।
..तो राहुल खुद लेंगे जमीन
कार्यक्रम के बाद मीडिया से मुखातिब हुईं स्मृति ईरानी ने कहा कि जमीन का मुद्दा हमने आज उजागर किया है। अगर राहुल जी कहते हैं कि वो एक इंच भूमि किसी को नहीं देंगे तो शायद उनका संकेत है कि वो खुद लेंगे। कागज को देखें। सच सामने आएगा।
बिना कागज डेढ़ मिनट भी नहीं बोल सकते
हमने पहले भी कहा था कि डेढ़ मिनट बोलना या बाइट देना आसान है और पार्लियामेंट में डेढ़ मिनट बिना कागज के बोलना बहुत मुश्किल है। मेरा वह कथन सत्य साबित हुआ। बीते दिनों राहुल गांधी पार्लियामेंट में जो दो मिनट बोलना चाहते थे, वह भी लिखकर लाए थे।
सार्वजनिक डिबेट कर लें
हमें लगता है कि राहुल को पार्लियामेंट में सरकार और गवर्नेंस के इश्यू पर चर्चा करनी चाहिए। शिक्षा के विषय में चर्चा करना चाहें तो मैं अमेठी आकर चर्चा कर सकती हूं। सार्वजनिक डिबेट कर सकती हूं।
हमने घोषणा भी की थी कि वे इस बीमा के कार्यक्रम में आ सकते थे। उनकी जनता के लिए यह कल्याणकारी योजना है लेकिन वे नहीं आए। इससे साफ है कि जहां जनता का कल्याण होगा, वे अनुपस्थित रहेंगे।