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छोटा सा कट देगा स्लिप डिस्क के दर्द से राहत, लोहिया संस्थान में हुए शोध को इंडियन जर्नल ऑफ पेन ने दी मान्यता
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स्लिप डिस्क और साइटिका के गंभीर मामलों में सर्जरी ही एकमात्र इलाज होता है। इसकी सर्जरी काफी जटिल मानी जाती है। मगर अब डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में नई तकनीक विकसित की गई है, जिसमें करीब चार से छह सेंटीमीटर का चीरा लगाकर सर्जरी की जा सकेगी। वर्ष 2017 से 2019 के बीच संस्थान में आए मरीजों पर इसका परीक्षण किया गया। अब इसको इंडियन जर्नल ऑफ पेन ने मान्यता देते हुए प्रकाशित किया है।
शोध करने वाले डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि एनेस्थीसिया विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. दीपक मालवीय के निर्देश पर इस शोध की शुुरुआत की गई थी। इसके लिए कुल 64 मरीजों का चयन किया गया। इन मरीजों के पैरों में दर्द, जलन और झुनझुनी होती थी। इलाज से लाभ न होने पर इन पर मिनिमली इनवेसिव पेन एंड स्पाइन इंटरवेंशन (एमआईपीएसआई) तकनीक का इस्तेमाल करने का फैसला किया गया। इसके तहत एंडोस्कोपी के माध्यम से करीब एक बटन के आकार का चीरा लगाकर डिस्क के हिस्से को काटा गया। यह वही हिस्सा था जो नस को दबा रहा था। नस दबने की वजह से लगातार दर्द की शिकायत बनी हुई थी। ऐसा करने के बाद उम्मीद से बेहतर परिणाम मिले। 58 मरीजों ने इस बीमारी से स्थायी रूप से ठीक होने की बात कही।
तीन दिन में अस्पताल से छुट्टी
इस तकनीक में चीरे का आकार बेहद छोटा होने की वजह से कई फायदे हैं। कम खून बहने और संक्रमण की आशंका बेहद कम होने से रोगी को काफी कम समय अस्पताल में रहना पड़ा। औसतन तीन दिन में मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इसके बाद करीब 15 दिन में मरीज पूरी तरह से पहले की तरह सामान्य हो गया।
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स्लिप डिस्क को समझें :
रीढ़ में हर डिस्क दो भागों में होती है। इसमें अंदर का हिस्सा नरम और ऊपरी हिस्सा कठोर होता है। किसी चोट या फिर कमजोरी की वजह से डिस्क का भीतरी हिस्सा बाहरी से अलग हट जाता है। इसे ही स्लिप डिस्क कहते हैं। डिस्क का हिस्सा बाहर निकलने की वजह से भयंकर दर्द और बेचैनी होती है। दवाओं से इसका इलाज मुश्किल हो जाता है, इसलिए कई बार सर्जरी जरूरी हो जाती है।
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शोध करने वाले डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि एनेस्थीसिया विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. दीपक मालवीय के निर्देश पर इस शोध की शुुरुआत की गई थी। इसके लिए कुल 64 मरीजों का चयन किया गया। इन मरीजों के पैरों में दर्द, जलन और झुनझुनी होती थी। इलाज से लाभ न होने पर इन पर मिनिमली इनवेसिव पेन एंड स्पाइन इंटरवेंशन (एमआईपीएसआई) तकनीक का इस्तेमाल करने का फैसला किया गया। इसके तहत एंडोस्कोपी के माध्यम से करीब एक बटन के आकार का चीरा लगाकर डिस्क के हिस्से को काटा गया। यह वही हिस्सा था जो नस को दबा रहा था। नस दबने की वजह से लगातार दर्द की शिकायत बनी हुई थी। ऐसा करने के बाद उम्मीद से बेहतर परिणाम मिले। 58 मरीजों ने इस बीमारी से स्थायी रूप से ठीक होने की बात कही।
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तीन दिन में अस्पताल से छुट्टी
इस तकनीक में चीरे का आकार बेहद छोटा होने की वजह से कई फायदे हैं। कम खून बहने और संक्रमण की आशंका बेहद कम होने से रोगी को काफी कम समय अस्पताल में रहना पड़ा। औसतन तीन दिन में मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इसके बाद करीब 15 दिन में मरीज पूरी तरह से पहले की तरह सामान्य हो गया।
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स्लिप डिस्क को समझें :
रीढ़ में हर डिस्क दो भागों में होती है। इसमें अंदर का हिस्सा नरम और ऊपरी हिस्सा कठोर होता है। किसी चोट या फिर कमजोरी की वजह से डिस्क का भीतरी हिस्सा बाहरी से अलग हट जाता है। इसे ही स्लिप डिस्क कहते हैं। डिस्क का हिस्सा बाहर निकलने की वजह से भयंकर दर्द और बेचैनी होती है। दवाओं से इसका इलाज मुश्किल हो जाता है, इसलिए कई बार सर्जरी जरूरी हो जाती है।