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Lucknow News: होर्मुज में बढ़े तनाव के बीच बाजार में फिर लौटी सुस्ती, कारोबारियों की बढ़ी चिंता
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लालबाग की एक प्लास्टिक दुकान पर पसरा सन्नाटा
लखनऊ। प्लास्टिक बाजार को मिली राहत महज 10 दिन ही टिक सकी। हालात सामान्य होने के बाद 148 रुपये किलो तक पहुंचा प्लास्टिक दाना एक बार फिर महंगा होकर 188 रुपये किलो तक पहुंच गया है। कारोबारियों के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट में दोबारा बढ़े तनाव का असर बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे माल की कीमत बढ़ने से बाजार में फिर सुस्ती लौट आई है और बिक्री आधी रह गई है।
कारोबारियों का कहना है कि प्लास्टिक उद्योग पूरी तरह पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर निर्भर है। मार्च की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव बढ़ने पर आपूर्ति प्रभावित हुई थी। इसका असर यह हुआ कि फरवरी तक अधिकतम 120 रुपये किलो बिकने वाला प्लास्टिक दाना मार्च में 180 रुपये किलो तक पहुंच गया। इससे प्लास्टिक पन्नी, सिंगल यूज प्लास्टिक और पैकेजिंग उत्पादों की लागत भी बढ़ी।
हालात सामान्य होने और होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद प्लास्टिक दाना सस्ता होकर 148 रुपये किलो तक आ गया था। इससे कारोबारियों और ग्राहकों को राहत की उम्मीद जगी थी, लेकिन दोबारा तनाव की स्थिति बनने के बाद कीमतें फिर बढ़कर 188 रुपये किलो तक पहुंच गई हैं। बढ़ती लागत के कारण बाजार में एक बार फिर सन्नाटा लौट आया है और कारोबारियों के अनुसार बिक्री घटकर लगभग आधी रह गई है।
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कंपनियों के निर्यात से भी बढ़ी दिक्कत
उद्यमी एवं कारोबारी दिनेश गोस्वामी का कहना है कि मौजूदा स्थिति में केवल युद्ध जैसे हालात ही जिम्मेदार नहीं हैं। उनका आरोप है कि पेट्रोकेमिकल कंपनियां कृत्रिम संकट पैदा कर मुनाफा कमाने की कोशिश कर रही हैं। कच्चे माल की कमी के साथ कंपनियों की ओर से निर्यात बढ़ाने के कारण घरेलू बाजार में महंगाई और बढ़ी है। फिलहाल कारोबारी बढ़ी लागत के बीच किसी तरह कारोबार संभाल रहे हैं।
क्रूड सस्ता, लेकिन प्लास्टिक दाना महंगा
कारोबारी संजीव जैन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें कम हो रही हैं, लेकिन प्लास्टिक उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक दाना के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ग्राहकों को कीमतों में राहत की उम्मीद थी, लेकिन बढ़ते रेट से बाजार में मांग कमजोर पड़ गई है और बिक्री पहले की तुलना में लगभग आधी रह गई है।
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कारोबारियों का कहना है कि प्लास्टिक उद्योग पूरी तरह पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर निर्भर है। मार्च की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव बढ़ने पर आपूर्ति प्रभावित हुई थी। इसका असर यह हुआ कि फरवरी तक अधिकतम 120 रुपये किलो बिकने वाला प्लास्टिक दाना मार्च में 180 रुपये किलो तक पहुंच गया। इससे प्लास्टिक पन्नी, सिंगल यूज प्लास्टिक और पैकेजिंग उत्पादों की लागत भी बढ़ी।
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हालात सामान्य होने और होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद प्लास्टिक दाना सस्ता होकर 148 रुपये किलो तक आ गया था। इससे कारोबारियों और ग्राहकों को राहत की उम्मीद जगी थी, लेकिन दोबारा तनाव की स्थिति बनने के बाद कीमतें फिर बढ़कर 188 रुपये किलो तक पहुंच गई हैं। बढ़ती लागत के कारण बाजार में एक बार फिर सन्नाटा लौट आया है और कारोबारियों के अनुसार बिक्री घटकर लगभग आधी रह गई है।
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कंपनियों के निर्यात से भी बढ़ी दिक्कत
उद्यमी एवं कारोबारी दिनेश गोस्वामी का कहना है कि मौजूदा स्थिति में केवल युद्ध जैसे हालात ही जिम्मेदार नहीं हैं। उनका आरोप है कि पेट्रोकेमिकल कंपनियां कृत्रिम संकट पैदा कर मुनाफा कमाने की कोशिश कर रही हैं। कच्चे माल की कमी के साथ कंपनियों की ओर से निर्यात बढ़ाने के कारण घरेलू बाजार में महंगाई और बढ़ी है। फिलहाल कारोबारी बढ़ी लागत के बीच किसी तरह कारोबार संभाल रहे हैं।
क्रूड सस्ता, लेकिन प्लास्टिक दाना महंगा
कारोबारी संजीव जैन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें कम हो रही हैं, लेकिन प्लास्टिक उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक दाना के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ग्राहकों को कीमतों में राहत की उम्मीद थी, लेकिन बढ़ते रेट से बाजार में मांग कमजोर पड़ गई है और बिक्री पहले की तुलना में लगभग आधी रह गई है।