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Lucknow News: मेहनत के सुई-धागे से बुना हुनर और देशप्रेम
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ग्राम दयाराम पुरवा में तिरंगा तैयार करती स्वयं सहायता समूह की महिलाएं। फोटो: अमर उजाला
लखनऊ। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में देशभक्ति और रोजगार का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े 20 स्वयं सहायता समूहों की 385 महिलाएं 17 स्थानों पर तिरंगे की सिलाई में जुटी हैं।
पांच अगस्त से शुरू हुए इस काम में बुधवार शाम तक 3.50 लाख झंडे तैयार कर ग्राम पंचायतों को भेजे जा चुके थे। प्रति झंडा निर्माण पर महिलाओं को करीब तीन रुपये की आमदनी हो रही है, जिससे वे रोजाना 400-500 रुपये तक कमा रही हैं।
दयारामपुरवा गांव में सात समूहों की 35 महिलाएं सिलाई मशीन पर लगातार तिरंगा तैयार कर रही हैं। जिला मिशन प्रबंधक रागिनी सिंह के मुताबिक, दो साल पहले तक ये महिलाएं घर तक सीमित थीं, लेकिन समूह से जुड़ने के बाद अब अचार-पापड़, मोमबत्ती और तिरंगा बनाकर आत्मनिर्भर हो रही हैं।
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इन झंडों में सिर्फ कपड़ा और धागा नहीं, बल्कि मेहनत, हुनर और देशभक्ति की सच्ची भावना भी बुनी गई है।
लल्ली तिवारी ने बताया कि दो साल पहले सखी समूह बनाया है। इसके माध्यम से गांव में अचार, पापड़, मोमबत्ती आदि बना कर अतिरिक्त आय करते हैं। समय-समय पर राज्य ग्रामीण मिशन की तरफ से भी काम दिया जाता है।
दयारामपुरवा की उमा शर्मा का निधि स्वयं सहायता समूह है। उन्होंने बताया कि तिरंगा तैयार करते हुए दोहरी खुशी मिल रही है। एक तरफ इससे देशभक्ति की भावना का संचार हो रहा है वहीं इसे तैयार कर प्रतिदिन करीब 400-500 रुपये प्रत्येक महिला कमा ले रही है।
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पांच अगस्त से शुरू हुए इस काम में बुधवार शाम तक 3.50 लाख झंडे तैयार कर ग्राम पंचायतों को भेजे जा चुके थे। प्रति झंडा निर्माण पर महिलाओं को करीब तीन रुपये की आमदनी हो रही है, जिससे वे रोजाना 400-500 रुपये तक कमा रही हैं।
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दयारामपुरवा गांव में सात समूहों की 35 महिलाएं सिलाई मशीन पर लगातार तिरंगा तैयार कर रही हैं। जिला मिशन प्रबंधक रागिनी सिंह के मुताबिक, दो साल पहले तक ये महिलाएं घर तक सीमित थीं, लेकिन समूह से जुड़ने के बाद अब अचार-पापड़, मोमबत्ती और तिरंगा बनाकर आत्मनिर्भर हो रही हैं।
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इन झंडों में सिर्फ कपड़ा और धागा नहीं, बल्कि मेहनत, हुनर और देशभक्ति की सच्ची भावना भी बुनी गई है।
लल्ली तिवारी ने बताया कि दो साल पहले सखी समूह बनाया है। इसके माध्यम से गांव में अचार, पापड़, मोमबत्ती आदि बना कर अतिरिक्त आय करते हैं। समय-समय पर राज्य ग्रामीण मिशन की तरफ से भी काम दिया जाता है।
दयारामपुरवा की उमा शर्मा का निधि स्वयं सहायता समूह है। उन्होंने बताया कि तिरंगा तैयार करते हुए दोहरी खुशी मिल रही है। एक तरफ इससे देशभक्ति की भावना का संचार हो रहा है वहीं इसे तैयार कर प्रतिदिन करीब 400-500 रुपये प्रत्येक महिला कमा ले रही है।