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देखते-देखते बदल गई लखनऊ की तस्वीर, कामयाब रहा पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम
Wed, 15 Jul 2020 12:30 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Wed, 15 Jul 2020 12:30 PM IST
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पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश के दो शहरों लखनऊ और नोएडा में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम (पुलिस कमिश्नर प्रणाली) लागू हुए छह माह पूरे हो गए हैं। अपराध नियंत्रण, कानून व्यवस्था, अनुशासन और ट्रैफिक सुधार की वजह से पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम को कामयाब बताया जा रहा है। इसे देखते हुए अब कुछ और शहरों में यह सिस्टम लागू करने पर भी विचार चल रहा है।
लखनऊ और नोएडा (गौतमबुद्धनगर) में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम 15 जनवरी 2020 को लागू किया गया था। इसके बाद से अपराध की घटनाओं में काफी कमी आई है। लखनऊ में जहां हत्या की घटनाएं पिछले साल के मुकाबले करीब आधी रह गई हैं, वहीं डकैती की घटनाएं भी एक चौथाई हो गईं। इसके अलावा वाहन चोरी और महिला अपराध की घटनाओं में भी भारी कमी दर्ज की गई है।
लखनऊ में 15 जनवरी से 14 जुलाई के आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले तीन साल की तुलना में अपराधों में काफी कमी आई है। लूट, डकैती और चोरी की घटनाओं के कम होने के साथ सामानों की बरामदगी 89 प्रतिशत से अधिक रही। जबकि 2019 में यह 19.37 प्रतिशत और 2018 में 24 प्रतिशत था। पिछले साल के मुकाबले दो गुना से अधिक बदमाशों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। 107, 116 के तहत पिछले साल के मुकाबले 10 गुना अधिक लोग पाबंद किए गए।
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लखनऊ और नोएडा (गौतमबुद्धनगर) में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम 15 जनवरी 2020 को लागू किया गया था। इसके बाद से अपराध की घटनाओं में काफी कमी आई है। लखनऊ में जहां हत्या की घटनाएं पिछले साल के मुकाबले करीब आधी रह गई हैं, वहीं डकैती की घटनाएं भी एक चौथाई हो गईं। इसके अलावा वाहन चोरी और महिला अपराध की घटनाओं में भी भारी कमी दर्ज की गई है।
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लखनऊ में 15 जनवरी से 14 जुलाई के आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले तीन साल की तुलना में अपराधों में काफी कमी आई है। लूट, डकैती और चोरी की घटनाओं के कम होने के साथ सामानों की बरामदगी 89 प्रतिशत से अधिक रही। जबकि 2019 में यह 19.37 प्रतिशत और 2018 में 24 प्रतिशत था। पिछले साल के मुकाबले दो गुना से अधिक बदमाशों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। 107, 116 के तहत पिछले साल के मुकाबले 10 गुना अधिक लोग पाबंद किए गए।
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ट्रैफिक व्यवस्था हुई दुरुस्त
कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद लखनऊ में ट्रैफिक व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है। पहले जहां सिर्फ 38 चौराहों पर ही ट्रैफिक सिग्नल काम कर रहे थे, वहीं पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम बनने के बाद यह संख्या बढ़कर 158 हो गई। इसका सकारात्मक असर यह हुआ कि बेतरतीब चलने वाले ट्रैफिक से जाम की जो स्थिति पैदा हो जाती थी, वह खत्म हो गई।
20 मिनट कम हो गई दूरी
कानपुर की ओर से लखनऊ की सीमा में दाखिल होने के बाद हजरतगंज पहुंचने में पहले जहां जाम की वजह से 58 मिनट से एक घंटे तक का समय लगता था, वहीं अब सिर्फ 38 से 40 मिनट लगता है। इसकी मुख्य वजह राजधानी के प्रवेश के सभी 24 स्थानों पर 24 घंटे पुलिसिंग की व्यवस्था। इसका असर यह पड़ा कि अब कहीं जाम की स्थिति ही नहीं रहती। ट्रैफिक को सुधारने के लिए पहले जहां 222 टैफिक कर्मी ही लखनऊ में थे, उनकी संख्या अब 636 हो गई।
20 मिनट कम हो गई दूरी
कानपुर की ओर से लखनऊ की सीमा में दाखिल होने के बाद हजरतगंज पहुंचने में पहले जहां जाम की वजह से 58 मिनट से एक घंटे तक का समय लगता था, वहीं अब सिर्फ 38 से 40 मिनट लगता है। इसकी मुख्य वजह राजधानी के प्रवेश के सभी 24 स्थानों पर 24 घंटे पुलिसिंग की व्यवस्था। इसका असर यह पड़ा कि अब कहीं जाम की स्थिति ही नहीं रहती। ट्रैफिक को सुधारने के लिए पहले जहां 222 टैफिक कर्मी ही लखनऊ में थे, उनकी संख्या अब 636 हो गई।
हर गंभीर घटना पर मौके पर पहुंचे वरिष्ठ अधिकारी
पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय बताते हैं कि पहले जहां हत्या की घटनाओं में भी अपर पुलिस अधीक्षक और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नहीं पहुंच पाते थे, वहीं अब हत्या के प्रयास के मामलों में भी कम से कम डीसीपी स्तर का अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचता है। कमिश्नरेट बनने के बाद से जो भी गंभीर अपराध की घटनाएं हुई हैं, उसमें 98 प्रतिशत स्थानों पर कम से कम डीसीपी स्तर का अधिकारी मौके पर पहुंचा है। छह महीने के कार्यकाल की रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि नमस्ते लखनऊ, जनसुनवाई आमने-सामने, पालीगॉन समेत जनता से जुड़ी कई नई योजनाएं शुरू की गई जिसके सकारात्मक नतीजे सामने आए।
महिला अपराध रोकने पर खास ध्यान महिला
अपराध रोकने पर पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम में खास ध्यान रखा गया। इसके लिए पहली बार व्यवस्था की गई कि एक पीड़िता के साथ एक पुलिस कर्मी को लगाया गया। यह पुलिस कर्मी हमेशा पीड़िता की सहायता के लिए उपलब्ध रहेगी। इसके तहत अब तक 287 पीड़ित महिलाओं को कवर दिया गया है।
महिला अपराध रोकने पर खास ध्यान महिला
अपराध रोकने पर पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम में खास ध्यान रखा गया। इसके लिए पहली बार व्यवस्था की गई कि एक पीड़िता के साथ एक पुलिस कर्मी को लगाया गया। यह पुलिस कर्मी हमेशा पीड़िता की सहायता के लिए उपलब्ध रहेगी। इसके तहत अब तक 287 पीड़ित महिलाओं को कवर दिया गया है।
पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद 15 जनवरी से 14 जुलाई के बीच लखनऊ के आंकड़
2018 2019 2020
हत्या 67 64 38
लूट 182 163 43
बलवा 105 61 32
चोरी 399 480 187
वाहन चोरी 1454 1069 476
छेड़खानी 1646 1541 878
बलात्कार 95 48 32
नोएडा
2019 2020
हत्या 52 37
लूट 94 45
बलवा 55 52
चोरी 699 395
वाहन चोरी 1381 507
बलात्कार 54 21
कुछ और शहरों में भी कमिश्नरेट सिस्टम लागू करने पर होगा विचार
सूत्रों का कहना है कि दो शहरों में लागू की गई कमिश्नरेट प्रणाली की कामयाबी के बाद इसे कुछ अन्य शहरों में भी लागू करने पर विचार किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि अगले चरण में प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले कानपुर और प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू करने पर मंथन शुरू हो चुका है।
कमिश्नरेट सिस्टम की मजबूत नींव की जिम्मेदारी हम सबके कंधों पर थी। राजधानी होने के चलते सबकी निगाहें भी थीं और अपेक्षाएं भी थीं। आंकड़े खुद ही इस बात की गवाही दे रहे हैं कि इसका फल कैसा रहा है। सिपाही से लेकर हम सबने काफी मेहनत की है, जिसकी परिणाम लखनऊवासियों को दिख रहा है। - सुजीत पांडेय, पुलिस कमिश्नर, लखनऊ
पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम की नींव रख दी गई है। गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट की टीम इसमें नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए काम करती रहेगी। - आलोक सिंह, पुलिस कमिश्रर, गौतमबुद्धनगर
कमिश्नरेट सिस्टम की मजबूत नींव की जिम्मेदारी हम सबके कंधों पर थी। राजधानी होने के चलते सबकी निगाहें भी थीं और अपेक्षाएं भी थीं। आंकड़े खुद ही इस बात की गवाही दे रहे हैं कि इसका फल कैसा रहा है। सिपाही से लेकर हम सबने काफी मेहनत की है, जिसकी परिणाम लखनऊवासियों को दिख रहा है। - सुजीत पांडेय, पुलिस कमिश्नर, लखनऊ
पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम की नींव रख दी गई है। गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट की टीम इसमें नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए काम करती रहेगी। - आलोक सिंह, पुलिस कमिश्रर, गौतमबुद्धनगर