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उन्नाव केस : जिंदगी और मौत से लड़ रही पीड़िता के शरीर में 6 फ्रैक्चर, जानिए अब क्या बोले डॉक्टर
Sat, 03 Aug 2019 06:48 AM IST
Avdhesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Sat, 03 Aug 2019 06:48 AM IST
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उन्नाव दुष्कर्म मामला
- फोटो : अमर उजाला
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उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता लखनऊ के केजीएमयू अस्पताल के आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है। डॉक्टरों के मुताबिक पीड़िता की हालत पांचवें दिन भी नाजुक बनी हुई है। पीड़िता के शरीर में छह जगहों पर फ्रैक्चर है और उसका करीब तीन यूनिट खून बह चुका है। वहीं पीड़िता के वकील की हालत भी अभी नाजुक बनी हुई है।
केजीएमयू के डॉक्टरों के मुताबिक पीड़िता के शरीर का दाहिना हिस्सा ज्यादा खराब हुआ है। जबड़ा, दाहिनी कोहनी, कॉलर बोन, कूल्हे की हड्डी और दाहिने पैर की हड्डी में फ्रैक्चर है। उसे डॉक्टरों ने वेंटीलेटर से हटाने की कोशिश की थी लेकिन हटाते ही तबीयत खराब हो गई। उसे बाद में फिर से वेंटीलेटर पर रखा गया है। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी पूरी कोशिश है कि उसे बचा लिया जाए। साथ ही अगले 24 घंटे में तबीयत में सुधार होने की भी उम्मीद जताई है।
एक्सीडेंट के बाद से पीड़िता को होश नहीं आया है। जांघ की हड्डी टूटने से करीब डेढ़ लीटर खून बह गया है। डॉक्टरों ने बताया कि इंटरनल ब्लीडिंग भी बहुत ज्यादा हुई है, जिसकी वजह से हालत नाजुक बनी हुई है। पीड़िता के घर वाले आईसीयू के बाहर ही बैठे रहते हैं। उनकी मां भी बार-बार डॉक्टरों से यही पूछती हैं कि बेटी कैसी है। हालांकि अब पूरा परिवार सुरक्षा के घेरे में है।
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बता दें कि 28 जुलाई को हुए एक एक्सीडेंट में पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो गई थी। जबकि पीड़िता और उनके वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले से जुड़े सभी केसों को दिल्ली ट्रांसफर करने के निर्देश दिए थे। हादसे का केस जांच पूरी होने के बाद ट्रांसफर किया जाएगा।
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केजीएमयू के डॉक्टरों के मुताबिक पीड़िता के शरीर का दाहिना हिस्सा ज्यादा खराब हुआ है। जबड़ा, दाहिनी कोहनी, कॉलर बोन, कूल्हे की हड्डी और दाहिने पैर की हड्डी में फ्रैक्चर है। उसे डॉक्टरों ने वेंटीलेटर से हटाने की कोशिश की थी लेकिन हटाते ही तबीयत खराब हो गई। उसे बाद में फिर से वेंटीलेटर पर रखा गया है। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी पूरी कोशिश है कि उसे बचा लिया जाए। साथ ही अगले 24 घंटे में तबीयत में सुधार होने की भी उम्मीद जताई है।
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एक्सीडेंट के बाद से पीड़िता को होश नहीं आया है। जांघ की हड्डी टूटने से करीब डेढ़ लीटर खून बह गया है। डॉक्टरों ने बताया कि इंटरनल ब्लीडिंग भी बहुत ज्यादा हुई है, जिसकी वजह से हालत नाजुक बनी हुई है। पीड़िता के घर वाले आईसीयू के बाहर ही बैठे रहते हैं। उनकी मां भी बार-बार डॉक्टरों से यही पूछती हैं कि बेटी कैसी है। हालांकि अब पूरा परिवार सुरक्षा के घेरे में है।
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बता दें कि 28 जुलाई को हुए एक एक्सीडेंट में पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो गई थी। जबकि पीड़िता और उनके वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले से जुड़े सभी केसों को दिल्ली ट्रांसफर करने के निर्देश दिए थे। हादसे का केस जांच पूरी होने के बाद ट्रांसफर किया जाएगा।
अब तक क्या-क्या हुआ
11 जून 2017: पीड़िता गांव के युवक शुभम के साथ गायब हुई, परिवारवालों ने आरोपी शुभम, अवधेश पर केस दर्ज किया।
21 जून 2017: पीड़िता पुलिस से मिली।
22 जून 2017: पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया, पीड़िता ने तीन लोगों पर गैंगरेप का आरोप लगाया। विधायक समर्थक बताए जा रहे तीनों युवकों की गिरफ्तारी हुई।
1 जुलाई 2017: मामले में चार्जशीट दायर हुई।
22 जुलाई 2017: पीड़िता ने विधायक कुलदीप सेंगर और उनके भाइयों पर गैंगरेप का आरोप लगाया।
30 अक्टूबर 2017: मामला बढ़ने पर विधायक समर्थकों ने पीड़िता के परिवार पर मानहानि का केस दर्ज कराया।
11 नवंबर 2017: पीड़िता के चाचा पर भी मानहानि का केस दर्ज कराया गया।
22 फरवरी 2018: पीड़िता की ओर से उन्नाव जिला अदालत में अर्जी दी गई।
4 अप्रैल 2018: पीड़िता के पिता गिरफ्तार। पीड़िता का आरोप है कि मुकदमा वापस ना लेने की वजह से 3 अप्रैल 2018 को विधायक के भाई अतुल सिंह ने उसके पिता को पीटा था। परिवार पर भी हमला हुआ था। घायल पिता माखी थाने में मुकदमे की तहरीर देने गए तो पुलिस ने पांच अप्रैल को उन्हीं के खिलाफ शस्त्र अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करके जेल भेज दिया।
8 अप्रैल 2018: पीड़िता ने किया आत्मदाह का प्रयास। पिता के खिलाफ कार्रवाई से दुखी पीड़ित युवती ने 8 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आवास के पास आत्मदाह का प्रयास किया जहां पुलिसकर्मियों ने उसे रोक लिया।
9 अप्रैल 2018: पीड़िता के पिता की मौत। 8 अप्रैल 2018 को पीड़िता के पिता को जेल में पेट दर्द के साथ खून की उल्टियां शुरू हुई थीं। कुछ ही घंटों में उनकी मौत हो गई थी। राज्य सरकार ने इस मामले में थाना प्रभारी समेत 6 पुलिसवालों को निलंबित किया था।
10 अप्रैल 2018: विधायक का भाई अतुल सेंगर गिरफ्तार। युवती के पिता की न्यायिक हिरासत में मौत की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया।
11 अप्रैल 2018: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का यूपी सरकार को नोटिस, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर। इसी दिन उन्नाव गैंगरेप और पीड़िता के पिता की मौत मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट तलब की। साथ ही एडवोकेट जनरल या एडिशनल एडवोकेट जनरल को व्यक्तिगत तौर पर पेश होने के लिए कहा।
12 अप्रैल 2018: जांच सीबीआई को सौंपी गई। राज्य सरकार ने 12 अप्रैल को उन्नाव बलात्कार मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया।
21 जून 2017: पीड़िता पुलिस से मिली।
22 जून 2017: पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया, पीड़िता ने तीन लोगों पर गैंगरेप का आरोप लगाया। विधायक समर्थक बताए जा रहे तीनों युवकों की गिरफ्तारी हुई।
1 जुलाई 2017: मामले में चार्जशीट दायर हुई।
22 जुलाई 2017: पीड़िता ने विधायक कुलदीप सेंगर और उनके भाइयों पर गैंगरेप का आरोप लगाया।
30 अक्टूबर 2017: मामला बढ़ने पर विधायक समर्थकों ने पीड़िता के परिवार पर मानहानि का केस दर्ज कराया।
11 नवंबर 2017: पीड़िता के चाचा पर भी मानहानि का केस दर्ज कराया गया।
22 फरवरी 2018: पीड़िता की ओर से उन्नाव जिला अदालत में अर्जी दी गई।
4 अप्रैल 2018: पीड़िता के पिता गिरफ्तार। पीड़िता का आरोप है कि मुकदमा वापस ना लेने की वजह से 3 अप्रैल 2018 को विधायक के भाई अतुल सिंह ने उसके पिता को पीटा था। परिवार पर भी हमला हुआ था। घायल पिता माखी थाने में मुकदमे की तहरीर देने गए तो पुलिस ने पांच अप्रैल को उन्हीं के खिलाफ शस्त्र अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करके जेल भेज दिया।
8 अप्रैल 2018: पीड़िता ने किया आत्मदाह का प्रयास। पिता के खिलाफ कार्रवाई से दुखी पीड़ित युवती ने 8 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आवास के पास आत्मदाह का प्रयास किया जहां पुलिसकर्मियों ने उसे रोक लिया।
9 अप्रैल 2018: पीड़िता के पिता की मौत। 8 अप्रैल 2018 को पीड़िता के पिता को जेल में पेट दर्द के साथ खून की उल्टियां शुरू हुई थीं। कुछ ही घंटों में उनकी मौत हो गई थी। राज्य सरकार ने इस मामले में थाना प्रभारी समेत 6 पुलिसवालों को निलंबित किया था।
10 अप्रैल 2018: विधायक का भाई अतुल सेंगर गिरफ्तार। युवती के पिता की न्यायिक हिरासत में मौत की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया।
11 अप्रैल 2018: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का यूपी सरकार को नोटिस, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर। इसी दिन उन्नाव गैंगरेप और पीड़िता के पिता की मौत मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट तलब की। साथ ही एडवोकेट जनरल या एडिशनल एडवोकेट जनरल को व्यक्तिगत तौर पर पेश होने के लिए कहा।
12 अप्रैल 2018: जांच सीबीआई को सौंपी गई। राज्य सरकार ने 12 अप्रैल को उन्नाव बलात्कार मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया।
विधायक को सीबीआई ने किया गिरफ्तार
13 अप्रैल 2018: विधायक गिरफ्तार। उन्नाव गैंगरेप मामले में सीबीआई की टीम ने आरोपी विधायक को गिरफ्तार किया।
14 अप्रैल 2018: दूसरी गिरफ्तारी। सीबीआई ने शशि सिंह नाम की एक महिला को गिरफ्तार किया जिस पर घटना के दिन पीड़िता को भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के पास ले जाने का आरोप था।
2 मई 2018: जेल में करीबियों के साथ जनता दरबार लगाने और गवाहों को प्रभावित करने की शिकायत के बाद विधायक समेत केस से जुड़े सभी आरोपियों को उन्नाव से लखनऊ जेल में शिफ्ट किया गया।
24 अगस्त 2018: विधायक कुलदीप सेंगर की कथित संलिप्तता वाले उन्नाव बलात्कार और हत्या मामले के गवाह में से एक की मौत हो गई। यूनुस नाम का गवाह पिछले कुछ समय से कथित तौर पर बीमार चल रहा था। 26 अगस्त को यूनुस का शव कब्र से निकाल कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
28 जुलाई 2019: लगभग एक साल बाद उन्नाव मामला फिर सुर्खियों में आ गया जब रविवार 28 जुलाई को खबर आई कि उन्नाव गैंगरेप की पीड़िता जिस कार में जा रही थी उसे एक ट्रक ने टक्कर मार दी। इस हादसे में पीड़िता की मौसी और चाची की मौत हो गई जबकि खुद पीड़िता और उसके वकील की हालत बेहद गंभीर है। पीड़िता और उसके रिश्तेदार अपने वकील के साथ रायबरेली जेल में बंद पीड़िता के चाचा से मिलने जा रहे थे।
1 अगस्त 2019: भाजपा ने आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को पार्टी से निकाला। सुप्रीम कोर्ट ने सभी केस दिल्ली किया ट्रांसफर। पीड़ितों को मिली सीआरपीएफ की सुरक्षा। पीड़िता को 24 घंटे के भीतर 25 लाख का मुआवजा देने का निर्देश। 45 दिन में ट्रायल पूरा करने का निर्देश।
14 अप्रैल 2018: दूसरी गिरफ्तारी। सीबीआई ने शशि सिंह नाम की एक महिला को गिरफ्तार किया जिस पर घटना के दिन पीड़िता को भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के पास ले जाने का आरोप था।
2 मई 2018: जेल में करीबियों के साथ जनता दरबार लगाने और गवाहों को प्रभावित करने की शिकायत के बाद विधायक समेत केस से जुड़े सभी आरोपियों को उन्नाव से लखनऊ जेल में शिफ्ट किया गया।
24 अगस्त 2018: विधायक कुलदीप सेंगर की कथित संलिप्तता वाले उन्नाव बलात्कार और हत्या मामले के गवाह में से एक की मौत हो गई। यूनुस नाम का गवाह पिछले कुछ समय से कथित तौर पर बीमार चल रहा था। 26 अगस्त को यूनुस का शव कब्र से निकाल कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
28 जुलाई 2019: लगभग एक साल बाद उन्नाव मामला फिर सुर्खियों में आ गया जब रविवार 28 जुलाई को खबर आई कि उन्नाव गैंगरेप की पीड़िता जिस कार में जा रही थी उसे एक ट्रक ने टक्कर मार दी। इस हादसे में पीड़िता की मौसी और चाची की मौत हो गई जबकि खुद पीड़िता और उसके वकील की हालत बेहद गंभीर है। पीड़िता और उसके रिश्तेदार अपने वकील के साथ रायबरेली जेल में बंद पीड़िता के चाचा से मिलने जा रहे थे।
1 अगस्त 2019: भाजपा ने आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को पार्टी से निकाला। सुप्रीम कोर्ट ने सभी केस दिल्ली किया ट्रांसफर। पीड़ितों को मिली सीआरपीएफ की सुरक्षा। पीड़िता को 24 घंटे के भीतर 25 लाख का मुआवजा देने का निर्देश। 45 दिन में ट्रायल पूरा करने का निर्देश।