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दिमागी बुखार से छह मासूमों की मौत, नौ हुए लाचार

Thu, 26 Nov 2015 10:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 26 Nov 2015 10:54 PM IST
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Six children died because of fever.

दिमागी बुखार मासूमों की जान लेता रहा लेकिन स्वास्थ्य महकमा इसे कुबूल करने से किनारा कसता रहा। अब इंटीग्रेटेड सर्विलांस प्रोग्राम (आईडीएसपी) से क्रॉस चेकिंग में दिमागी बुखार से छह मौतों का खुलासा हुआ है, जबकि इसके कहर से नौ बच्चे निशक्त हो गए। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।

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तराई में प्रतिवर्ष जून से अक्तूबर तक जापानी इंसेफ्लाइटिस व एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (जेई, एईएस) का कहर मासूमों पर बरपता है। इस वर्ष भी दिमागी बुखार की चपेट में आकर मासूमों की जान जाती रही लेकिन महकमे के जिम्मेदार दिमागी बुखार से मौत का मामला  छिपाते रहे।
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जब मामला शासन स्तर पर गूंजा तो  विभाग ने जांच की कार्रवाई शुरू की। तीन चक्रों में 83 पीड़ित  बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया गया। इस दौरान 55 बच्चे दिमागी बुखार से  पीड़ित मिले। लेकिन मौत के तथ्यों को नकार दिया गया।
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आईएसडीपी के तहत लिया गया फालोअप

Six children died because of fever.

संक्रमण काल बीतने के 30 दिन पूर्व शासन के निर्देश पर आईडीएसपी (इंटीग्रेटेड सर्विलांस प्रोग्राम) के तहत विशेष टीम ने पीड़ित बच्चों की हालत जानने के लिए फालोअप शुरू किया। करीब एक महीने चले इस कार्यक्रम के जरिये दिमागी बुखार से छह मौतों की पुष्टि हुई है।

एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम से पांच व एक मौत जापानी इंसेफ्लाइटिस से हुई है। वहीं विभाग के मुताबिक नौ ऐसे बच्चे मिले हैं, जो तेज बुखार के प्रकोप से उबर तो गए लेकिन मानसिक व शारीरिक रूप से अक्षम हो गए हैं। इनकी अक्षमता भी 60 से 90 फीसदी तक है।

शीघ्र मिलेगा मुआवजा

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ केबी जैन ने बताया कि जेई व एईएस की रिपोर्ट शासन को  भेज दी गई है। छह बच्चों की मौत हुई है और 9 बच्चे निशक्त हुए हैं। शीघ्र ही पीड़ितों के परिवार वालों को मुआवजा दिया जाएगा। शासन को रिपोर्टिंग कर दी गई है।

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