गले की फांस बन गए शिया वक्फ बोर्ड के चुनाव
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शिया वक्फ बोर्ड का चुनाव राज्य सरकार के लिए गले की फांस बन चुका है। एक नवंबर से पहले चुनाव कराना संवैधानिक बाध्यता है, लेकिन चुनाव को लेकर अभी तक तस्वीर साफ नहीं हो सकी है।
दरअसल, सरकार चुनाव कराकर शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद को नाराज नहीं करना चाहती है। जव्वाद चाहते हैं कि वोटर लिस्ट फिर से तैयार कर चुनाव कराया जाए।
वहीं विभागीय मंत्री मो. आजम खां इस बात से नाराज हैं कि मौलाना के कहने पर सरकार ने चुनाव स्थगित कर दिया।
आजम वर्तमान वोटर लिस्ट में ही चुनाव चाहते हैं। ऐसे में असमंजस में फंसी सरकार चुनाव कराने को लेकर कोई निर्णय नहीं ले सकी है।
देखें, कब-कब स्थगित हुए चुनाव
शिया वक्फ बोर्ड का चुनाव अब तक तीन बार स्थगित हो चुका है। सबसे पहले पिछले साल 12 दिसंबर को सरकार ने अधिसूचना जारी कर 20 दिसंबर को चुनाव कराने का निर्णय किया था।
उस समय भी मौलाना कल्बे जव्वाद व हुसैनी टाइगर्स के अध्यक्ष शमीम शम्सी ने चुनाव का विरोध किया था। इसी के बाद सरकार ने चुनाव स्थगित कर दिए थे। दूसरी बार गत जुलाई में चुनाव कराने की अधिसूचना जारी हुई, लेकिन चुनाव नहीं हो सके थे। तीसरी अधिसूचना 31 जुलाई को जारी हुई थी, लेकिन चुनाव फिर स्थगित हो गए।
मो. आजम खां ने चुनाव कराने वाली फाइल पर काफी तल्ख टिप्पणी कर उसे मुख्यमंत्री कार्यालय भेज दिया था, लेकिन यह फाइल आज तक नहीं लौटी है। वहीं, सरकार के सामने भी चुनाव कराने की संवैधानिक बाध्यता है।
सेंट्रल शिया वक्फ बोर्ड के कानून के अनुसार शिया वक्फ बोर्ड एक वर्ष से अधिक समय तक खाली नहीं रह सकता है। यह मियाद एक नवंबर 2014 को पूरी हो रही है। ऐसे में एक नवंबर से पहले बोर्ड का गठन जरूरी है।