सहकारिता भर्ती घोटाला: अफसरों के रिश्तेदारों की तो नहीं थी परीक्षा लेने वाली एजेंसियां
एसआईटी के अनुसार, सहकारिता भर्ती घोटाले की जांच में परीक्षा लेने वाली एजेंसी और अफसरों के बीच मिलीभगत नजर आ रही है।
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सहकारिता विभाग की भर्ती परीक्षा लेने वाली एजेंसियों के संचालक और अधिकारियों में रिश्तेदारी होने की बात सामने आ रही है। विभाग में पूरी भर्ती प्लानिंग से की गई। इसमें सेवा मंडल के अध्यक्ष ने पूर्व की एजेंसी को हटाकर अपनी मनमाफिक एजेंसी को काम दिया। यही नहीं जो भी सरकार आई उसने इसका फायदा उठाया। अब एजेंसी से अधिकारियों के लिंक जोड़े जा रहे हैं। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में इस मिलीभगत का खुलासा किया है।
एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार तत्कालीन अध्यक्ष उप्र सहकारी संस्थागत सेवा मंडल, राम जतन यादव ने भर्तियों के लिए राम प्रवेश यादव की कंप्यूटर एजेंसी एक्सिसडिजीनेट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को बिना किसी विज्ञापन, टेंडर व कोटेशन की प्रक्रिया के परीक्षा के लिए नियुक्त किया था।
इसी कंपनी के साथ मिलकर ही ओएमआर शीट्स में हेराफेरी की गई। साथ ही कंप्यूटर एजेंसी के संचालक ने स्कैनिंग में इस्तेमाल किए गए कंप्यूटर की हार्ड डिस्क को राम जतन के साथ मिलकर साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से नष्ट किया। राम जतन ने एक्सिसडिजीनेट को नियुक्त करने के लिए एक अन्य एजेंसी को हटाया था।
एसआईटी का मानना है कि अध्यक्ष व एजेंसी संचालक के बीच पहले से कोई नजदीकी संबंध थे। इसी कारण पूर्व की कंपनी को हटाकर नियम विरुद्ध दूसरी कंपनी को काम दिया गया।
दूसरी परीक्षा की कम्प्यूटर एजेंसी किसकी
एक्सिसडिजीनेट की तरह ही एक अन्य परीक्षा कंप्यूटर एजेंसी डाटा ट्रैक्स कम्प्यूटर सिस्टम भी मामले में आरोपी बनाई गई है। इस कंपनी को संस्थागत सेवा मंडल के एक अन्य अध्यक्ष ओमकार यादव ने नियम विरुद्ध काम दिया था। एसआईटी के अनुसार मंडल के अध्यक्ष ओमकार यादव व सचिव भूपेंद्र कुमार ने कंप्यूटर एजेंसी संचालिका नीलम पांडेय के साथ मिलकर मनमाफिक अभ्यर्थियों के चयन को आसान बनाया। इस एजेंसी के तार भी अध्यक्ष व सचिव से जोड़े जा रहे हैं।
राम जतन की संपत्तियों की होगी जांच
भर्ती घोटाले के मुख्य आरोपी राम जतन यादव की संपत्ति की जांच के लिए एसआईटी ने सरकार से अनुरोध किया है। जांच के दौरान उनके पास कई बेनामी व आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने खुलासा हुआ है।
आरोपियों के निलंबन व गिरफ्तार की मांग
उप्र. सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ ने सहकारिता विभाग में भर्ती घोटाले के आरोपियों के खिलाफ माफिया की तरह कार्रवाई की मांग की है। महासंघ के महासचिव मो. आसिफ जमाल ने शनिवार को कहा कि एसआईटी जांच से स्पष्ट हो गया है कि विभाग मे भ्रष्ट नौकरशाहों का संगठित गैंग है।
इन्होंने लूट में बाधक बन रहे सहकारी कानूनों को रातों-रात बदलवाया। इसलिए उप्र कोऑपरेटिव बैंक के एमडी भूपेंद्र कुमार को तत्काल निलंबित करके सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने कहा कि भर्ती किए गए कर्मचारियों की बर्खास्तगी न्यायोचित नहीं है। इसका विरोध किया जाएगा।