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उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की मानद बेटी को लखनऊ महोत्सव में नहीं मिला मंच, फूटा गुस्सा
न्यूज डेस्क/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Mon, 29 Jan 2018 01:55 PM IST
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गायिका सीमा घोष
- फोटो : amar ujala
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घंटों प्रतीक्षा के बाद कार्यक्रम के लिए मंच न मिलने पर रविवार को लखनऊ महोत्सव में प्रतिष्ठित गायिका सोमा घोष का गुस्सा फूट पड़ा।
प्रख्यात शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की मानद बेटी के रूप में पहचानी और पद्मश्री अलंकरण से सम्मानित सोमा घोष यह कहते हुए महोत्सव से लौट गईं कि यह मेरा नहीं, सरस्वती का अपमान है।
घोष का कार्यक्रम महोत्सव में कवि सम्मेलन के पहले होना था। उन्होंने अमर उजाला से कहा कि मुझे पहले पांच बजे और फिर साढ़े छह बजे का समय बताया गया।
पहले तो मुझे आयोजन स्थल तक पहुंचने में ही काफी दिक्कतें उठानी पड़ीं। महोत्सव में घंटों प्रतीक्षा के बाद मुझे बताया गया कि अब कवि सम्मेलन शुरू होने वाला है। आपका कार्यक्रम नहीं हो सकेगा।
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प्रख्यात शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की मानद बेटी के रूप में पहचानी और पद्मश्री अलंकरण से सम्मानित सोमा घोष यह कहते हुए महोत्सव से लौट गईं कि यह मेरा नहीं, सरस्वती का अपमान है।
घोष का कार्यक्रम महोत्सव में कवि सम्मेलन के पहले होना था। उन्होंने अमर उजाला से कहा कि मुझे पहले पांच बजे और फिर साढ़े छह बजे का समय बताया गया।
पहले तो मुझे आयोजन स्थल तक पहुंचने में ही काफी दिक्कतें उठानी पड़ीं। महोत्सव में घंटों प्रतीक्षा के बाद मुझे बताया गया कि अब कवि सम्मेलन शुरू होने वाला है। आपका कार्यक्रम नहीं हो सकेगा।
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घोष ने कहा, मुझे होना पड़ा अपमानित
गायिका सीमा घोष
- फोटो : amar ujala
घोष ने कहा कि मैंने बड़े-बड़े कार्यक्रम किए हैं। उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के साथ कार्यक्रम किया है, लेकिन महोत्सव में मुझे अपमानित होना पड़ा है।
घोष ने इस बात पर भी आपत्ति जताई थी कि उन्हें स्थानीय कलाकारों की सूची में स्थान दिया गया है और किसी प्रचार सामग्री में उनके नाम का उल्लेख नहीं है।
उनका पारिश्रमिक भी स्थानीय कलाकारों के रूप में तय किया गया है। घोष ने कहा कि इसके बावजूद महोत्सव के अधिकारियों के आग्रह पर मैं यहां आई, लेकिन यहां मुझे घंटों इंतजार कराया गया और मंच भी नहीं मिला।
वहीं पीलीभीत से आए संजीव पाराशरी भी कार्यक्रम से वंचित कर दिए गए। पाराशरी घंटों मंच के निकट अपने संगतकारों के साथ अपने क्रम की प्रतीक्षा करते रहे। बाद में बताया गया कि समय की कमी के कारण उनका कार्यक्रम नहीं हो सकेगा।
घोष ने इस बात पर भी आपत्ति जताई थी कि उन्हें स्थानीय कलाकारों की सूची में स्थान दिया गया है और किसी प्रचार सामग्री में उनके नाम का उल्लेख नहीं है।
उनका पारिश्रमिक भी स्थानीय कलाकारों के रूप में तय किया गया है। घोष ने कहा कि इसके बावजूद महोत्सव के अधिकारियों के आग्रह पर मैं यहां आई, लेकिन यहां मुझे घंटों इंतजार कराया गया और मंच भी नहीं मिला।
वहीं पीलीभीत से आए संजीव पाराशरी भी कार्यक्रम से वंचित कर दिए गए। पाराशरी घंटों मंच के निकट अपने संगतकारों के साथ अपने क्रम की प्रतीक्षा करते रहे। बाद में बताया गया कि समय की कमी के कारण उनका कार्यक्रम नहीं हो सकेगा।