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सिख दंगे में एक और मामले की बंद होगी जांच, कनाडा में रह रहे वादी ने पैरवी करने से किया इनकार
Wed, 30 Dec 2020 04:27 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 30 Dec 2020 04:27 PM IST
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फाइल फोटो
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कानपुर के सिख दंगों के एक मुकदमे के वादी के कनाडा में होने की जानकारी के बाद इस मामले को बंद करने का फैसला किया जा रहा है। मुकदमे के वादी ने वर्षों बाद आरोपियों की पहचान में असमर्थता जता दी है, जिसके बाद इस मामले की जांच बंद करने का विचार किया गया है।
हाल ही में कानपुर में 1984 के सिख दंगों की जांच को गठित एसआईटी का कार्यकाल मई 2021 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। एसआईटी ने इस बीच 19 ऐसे मामलों में गवाह तलाश लिए हैं, जिनमें पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी।
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के दंगों में कानपुर में 127 लोग मारे गए थे। दंगों को लेकर पुलिस ने कुल 1251 केस दर्ज किए थे। एसआईटी इनमें से 40 केस में विवेचना कर रही है। इन 40 मुकदमों में से 29 में स्थानीय पुलिस क्लोजार रिपोर्ट लगा चुकी है।
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इन्हीं में से 19 मामलों की पड़ताल हो रही है। गौरतलब है कि 1,251 मुकदमों में स्थानीय पुलिस ने 153 मामलों को छोड़ अन्य में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी। पूर्व में इन दंगों की जांच जस्टिस रंगनाथ मिश्र आयोग भी कर चुका है।
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हाल ही में कानपुर में 1984 के सिख दंगों की जांच को गठित एसआईटी का कार्यकाल मई 2021 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। एसआईटी ने इस बीच 19 ऐसे मामलों में गवाह तलाश लिए हैं, जिनमें पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी।
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तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के दंगों में कानपुर में 127 लोग मारे गए थे। दंगों को लेकर पुलिस ने कुल 1251 केस दर्ज किए थे। एसआईटी इनमें से 40 केस में विवेचना कर रही है। इन 40 मुकदमों में से 29 में स्थानीय पुलिस क्लोजार रिपोर्ट लगा चुकी है।
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इन्हीं में से 19 मामलों की पड़ताल हो रही है। गौरतलब है कि 1,251 मुकदमों में स्थानीय पुलिस ने 153 मामलों को छोड़ अन्य में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी। पूर्व में इन दंगों की जांच जस्टिस रंगनाथ मिश्र आयोग भी कर चुका है।
एसआईटी को गवाह यूपी के अलावा एमपी व चेन्नई तक में मिले। इनमें लगभग आठ गवाहों के बयान भी दर्ज कर लिए गए हैं। इसके अलावा एक मामले में पता चला की गवाह कनाडा में रहते हैं। जांच से जुड़े अफसरों का कहना है कि दंगों के समय इनमें से एक महिला गवाह की आयु दस वर्ष व उसके भाई की आयु छह से सात वर्ष थी।
इनके परिजनों का कत्ल किया गया था। संपर्क करने पर इन दोनों ने इतनी लंबी अवधि के बाद आरोपियों की शिनाख्त व घटनाक्रम की पूरी जानकारी देने में असमर्थता जताई है। इसके बाद एसआईटी ने गवाहों द्वारा मामले की पैरवी में रुचि न दिखाए जाने की रिपोर्ट दे दी गई है।
इनके परिजनों का कत्ल किया गया था। संपर्क करने पर इन दोनों ने इतनी लंबी अवधि के बाद आरोपियों की शिनाख्त व घटनाक्रम की पूरी जानकारी देने में असमर्थता जताई है। इसके बाद एसआईटी ने गवाहों द्वारा मामले की पैरवी में रुचि न दिखाए जाने की रिपोर्ट दे दी गई है।