उम्मीद लगाए बैठे रही अयोध्या, ठग गए मोदी?
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फैजाबाद के राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में दूर-दराज के गांवों से आए लोगों को उम्मीद थी कि मोदी इस बार मंदिर पर यहां जरूर कुछ न कुछ बोलेंगे।
ऊपर से सूरज की तपिश थी तो भीड़ के बीच मंदिर मुद्दे की तपिश भी महसूस हो रही थी। लोग जय श्रीराम के घोष के साथ दोनों हाथ ऊपर उठाकर नारे लगा रहे थे।
अटकलें चल रही थीं कि हाईकोर्ट का फैसला आ चुका है, जिसमें वहां पहले मंदिर होने के सुबूत मिल गए हैं। इसलिए मोदी को इस मुद्दे पर कुछ न कुछ जरूर बोलना चाहिए।
कटियार बोले तो पुख्ता होने लगी थी उम्मीद
कुछ यह उम्मीद कर रहे थे कि भले ही मंदिर पर न बोलें लेकिन अयोध्या तो जा ही सकते हैं।
राम जन्मभूमि पर न सही तो हनुमानगढ़ी तक ही। इन उम्मीदों को बल मिल रहा था मंच पर मौजूद श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के मॉडल वाले चित्र से और मोदी से ठीक पहले हुए विनय कटियार के भाषण से।
कटियार ने कहा कि भाजपा ने राम मंदिर को अपने घोषणा पत्र में शामिल किया है। कटियार ने 1990 की यादें भी ताजा कराने की कोशिश की।
कहा कि मुलायम सिंह सरकार ने गोलियां चलवाईं। गोलियां कम पड़ गईं लेकिन रामभक्तों के सीने कम नहीं पड़े।
राम नाम तो लिए, पर मंदिर निर्माण पर रहे चुप
मोदी आए तो लेकिन न अयोध्या की प्रतीक्षा पूरी हुई और न यहां जमी भीड़ की उम्मीदें।
कटियार के भाषण से उलट उन्होंने खुद को सिर्फ सियासी सरोकारों तक ही सीमित रखा। राम नाम के बहाने उन्होंने सिर्फ प्रदेश व देश की सरकार पर हमला बोला। अपने लगभग 22-23 मिनट के भाषण में राम के आदर्शों का जिक्र किया।
उन पर चलने की प्रतिबद्धता जताई। लोगों को यह संदेश देने की कोशिश की कि उनके नेतृत्व वाली सरकार कुछ वैसी ही होगी जिसे रामराज्य कहा जाता था।
बापू की कल्पना वाला रामराज्य अर्थात लोगों का कल्याण करने वाली, सबको न्याय देने वाली और सबकी चिंता करने वाली सरकार।
मुस्लिम लामबंदी से सावधानी
पिछले वर्ष अक्टूबर में कानपुर से उत्तर प्रदेश में चुनावी अभियान शुरू करने वाले मोदी अभी तक मंदिर पर चुप्पी साधते ही चले आए हैं।
आज राम की धरती पर बने मंच और उस पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का मॉडल होने के बावजूद उन्होंने जब खुद को राम नाम तक ही सीमित रखा, तो यह साफ हो गया है कि यह उनकी सोची समझी रणनीति का हिस्सा है।
भगवा टोली के रणनीतिकार और खुद मोदी नहीं चाहते कि सीधे तौर पर उनकी तरफ से ऐसा कोई संदेश जाए जो उन्हें विवाद में फंसाए और भाजपा विरोधी दलों को लोगों को भड़काने या खासतौर से मुसलमानों को लामबंद करने का मौका दे।
पर, लोग हैं कि मानते नहीं
भले ही मोदी ने मंदिर पर मौन रखा हो लेकिन साकेतवासी यह मानने को तैयार नहीं है कि मोदी का मंदिर से कोई मतलब नहीं है।
मंदिर-मस्जिद मुद्दे के एक वादी हाजी महबूब अली कहते हैं, ‘मोदी भले ही कुछ न बोले हों लेकिन उनके मौन के बावजूद उनका मंच तो मंदिर की बात ही बोल रहा था।
मंच पर मंदिर के मॉडल वाले चित्र का क्या मतलब है, यही न कि लोग मुझे चुनेंगे तो मंदिर के लिए काम होगा। मोदी साहब, 1992 वाली खुराफात फैला रहे हैं।’
लोगों का विश्वास, मोदी मंदिर जरूर बनाएंगे
सिर्फ विरोधी ही नहीं, मोदी को सुनने आए उनके समर्थक भी मोदी के मौन के बावजूद यह मानने को तैयार नहीं दिखे कि मोदी, मंदिर से दूर हैं।
मोदी के हेलीकॉप्टर की तरफ देख रही एक महिला अपने साथ खड़ी दूसरी औरत से बातचीत में उम्मीद जता रही थी कि भले ही आज मोदी ने मंदिर पर कुछ न कहा हो लेकिन उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद मंदिर जरूर बनेगा।
अन्य कई लोगों को यह लग रहा था कि भले ही पांच साल पहले वाला इतिहास दोहराया गया हो।
मोदी इस बार भी चुनाव प्रचार के लिए ही यहां आए हों और वाया अंबेडकरनगर फैजाबाद आकर यहीं से लौट गए हों लेकिन लोगों को उम्मीद है कि एक न एक दिन वह अयोध्या भी आएंगे और मंदिर निर्माण भी होगा।