फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   side effect of currency ban on chickan business

नोटबंदी से कितना प्रभावित हुआ चिकन कारोबार, पढ़ें खबर..

Sat, 26 Nov 2016 01:32 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Sat, 26 Nov 2016 01:32 PM IST
विज्ञापन
side effect of currency ban on chickan business
कामकाजी ‌मह‌िलाओं का नहीं म‌िल रहा भुगतान - फोटो : amar ujala

नोटबंदी से लखनऊ की खास पहचान चिकन के कारोबार पर गहरी चोट लगी है। कारोबारियों का कहना है कि प्रोडक्शन और सेल दोनों 80 फीसदी तक प्रभावित हुआ है। शोरूम पर सन्नाटा है तो कामगार महिलाओं को पैसा नहीं मिल पा रहा है। इससे महिलाएं काम छोड़ रही हैं।

विज्ञापन


चौक दरियाई टोला निवासी चिकन कारखाना संचालक रशीद अहमद बताते हैं कि नोट बंद होने एवं नए नोट नहीं मिलने के कारण कामकाजी महिलाओं को हफ्ते भर का पारिश्रमिक नहीं दे सके। इससे 75 फीसदी महिलाएं काम छोड़ कर घर बैठ गईं। वहीं पुरुष कामगार गांव चले गए।
विज्ञापन


कारखानों में दिन में जो चहल-पहल होती थी वह बंद हो चुकी है। चिकन कारोबारी व व्यापारी रामाबाबू रस्तोगी व पाटानाला चौक के कारखाना संचालक शहीद बताते हैं कि चिकन के कपड़े तैयार करने के लिए जो कच्चा माल देते थे वह नकद के बजाय चेक से पेमेंट मांगने आ रहे हैं। कारोबारी के पास उधारी मांगने जाते हैं तो कहता कि चिकन कपड़ा ही नही बिकता तो पेमेंट कहां से करें। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रोजगार देता है ‌च‌िकन का कारोबार

side effect of currency ban on chickan business
डेमो
सहालग के नवंबर से जनवरी तक के सीजन में चिकन के कपड़े खूब बिकते हैं। जो लोग लखनऊ रिश्तेदारों की शादी समारोह में शामिल होने आते वह चौक, अमीनाबाद में चिकन के कपड़े खरीदकर ले जाते हैं।

सेवा चिकन के कृष्ण रस्तोगी बताते हैं कि बृहस्पतिवार को 15 विदेशी टूरिस्ट नीमसार से कपड़े खरीदने आए पर उनके पास 1000 के नोट होने के कारण वापस लौटाना पड़ा।

जबकि वे एक लाख रुपये का कपड़ा खरीदना चाहते थे। अमीनाबाद नजीराबाद के कारोबारी सुरेश छबलानी कहते हैं कि कारोबारियों को भी 500-1000 के नोट लेने की परमिशन होती तो इतना असर कारोबार पर नहीं होता।

चिकन में कटिंग, सिलाई, छपाई, कढ़ाई, धुलाई, प्रेस और पैकिंग यानी बहुत से काम हैं। चिकन कपड़े बनाने एवं काढ़ने का 80 फीसदी कार्य राजधानी के नजदीकी गांवों में होता है।

लखनऊ, हरदोई, उन्नाव, सीतापुर, रायबरेली एवं बरेली तक ग्रामीण अंचल की महिलाएं लखनऊ से कपड़े काढ़ने एवं संवारने के लिए लेकर जाती हैं। मुजीब जमा खां बताते कि 15 दिन से महिलाओं ने जो कार्य किया उसके एवज में पारिश्रमिक का पेमेंट नहीं हो सका।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed