गले की फांस बनी 4010 दरोगाओं की भर्ती, जल्द पूरी करने की कोशिश
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साल 2011 में शुरू हुई 4010 दरोगाओं की भर्ती प्रक्रिया पुलिस भर्ती बोर्ड के लिए गले की फांस बन गई है। लाख कोशिशों के बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। पहले तो बोर्ड के चेयरमैन ने कहा था कि 15 दिन में भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी लेकिन कोर्ट के आदेश का अध्ययन करने के बाद इसमें नए सिरे से ग्रुप डिस्कशन कराने पर सहमति बनी है।
हालांकि इसे भी लेकर भर्ती बोर्ड के अधिकारियों में मतभेद है। यही वजह है कि बोर्ड निर्णय नहीं कर पा रहा है कि भर्ती प्रक्रिया को किस तरह अंजाम तक पहुंचाया जाए। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को अगस्त तक भर्ती प्रक्रिया पूरी करने को कहा है। इस बारे में भर्ती बोर्ड का भी कोई अधिकारी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।
सूत्रों का कहना है कि भर्ती बोर्ड चाहता है कि दोबारा ग्रुप डिस्कशन कर नए सिरे से मार्किंग की जाए और भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाए। लेकिन जो अभ्यर्थी पहले ही चयनित हो चुके हैं और ट्रेनिंग भी पूरी कर चुके हैं, वे इस पर राजी नहीं हैं।
ऐसे में अगर बोर्ड अपनी जिद पर दोबारा ग्रुप डिस्कशन कराता भी है तो चयनित अभ्यर्थी फिर कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। इससे भर्ती प्रक्रिया में और समय लगेगा। बोर्ड बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है।
3200 अभ्यर्थियों की पूरी हो चुकी है ट्रेनिंग
2011 में शुरू हुई दरोगा भर्ती अदालत में बार-बार दायर होने वाली याचिकाओं और बोर्ड की खामियों की वजह से पूरी नहीं हो पा रही है।
4010 पदों के लिए चयनित अभ्यर्थियों में से 3200 की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। शेष 810 की ट्रेनिंग का कुछ हिस्सा ही बचा है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि कोर्ट का ऐसा कोई आदेश नहीं है जिसमें ग्रुप डिस्कशन दोबारा कराने की बात कही गई हो। बोर्ड ऐसे समय यह काम कर रहा है जब हाईकोर्ट में भी एक माह के लिए अवकाश है।
ग्रुप डिस्कशन के बाद फिर से मेरिट बनेगी जिसमें कई लोग ऊपर- नीचे हो जाएंगे। ऐसे में जिसका नंबर कम होगा वह दोबारा कोर्ट की शरण में पहुंचेगा और मामला फिर से लंबित हो जाएगा।