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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Shravasti Jeevan Camp model applied in UP.

पूरे यूपी में लागू हुआ 'श्रावस्ती जीवन कैंप' मॉडल

Sat, 10 Jan 2015 01:01 AM IST
विभाकर शुक्ला/अमर उजाला, श्रावस्ती।
विभाकर शुक्ला/अमर उजाला, श्रावस्ती। Updated Sat, 10 Jan 2015 01:01 AM IST
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Shravasti Jeevan Camp model applied in UP.

बीते सालों में महिलाओं व बच्चों के लिए मौत का दूसरा नाम बन चुके निमोनिया व कुपोषण की काल गति पर एक छोटी सी पहल ने पूर्ण विराम लगा दिया है। कुपोषण व निमोनिया के खिलाफ जिले में छेड़ी गई जंग का ही नतीजा है कि इस साल इन जानलेवा बीमारियों से न किसी जननी की गोद सूनी हुई और न ही कोई नौनिहाल मां के आंचल से महरूम हुआ।

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श्रावस्ती जीवन कैंप नाम से जिले में लागू किए गए इस मॉडल की कामयाबी से सूबे की सरकार इतनी प्रभावित हुई कि उसने शुक्रवार से इसे पूरे प्रदेश में अमली जामा पहना दिया। इसके साथ ही प्रदेश में लगातार अभिनव प्रयोग करने वाले डीएम श्रावस्ती निखिल चंद्र शुक्ला को प्रशस्ति पत्र भी दिया है।
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क्या थी समस्या

पूरे मुल्क में निमोनिया व कुपोषण से जितनी मौतें होती हैं उनमें सबसे ज्यादा मौतें उत्तर प्रदेश में होती हैं। सूबे में भी श्रावस्ती जिले में ये बीमारियां सबसे ज्यादा जानें लेती थीं।
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क्या किया गया

जानलेवा निमोनिया व कुपोषण से पैदा विषम हालात के मद्देनजर श्रावस्ती डीएम निखिल चंद्र शुक्ला ने एक मॉडल तैयार किया जिसके तहत 26 नवंबर से 8 दिसंबर के बीच जिले के 130 एएनएम सेंटर पर जीवन कैंप के नाम से स्वास्थ्य व कुपोषण दूर करने के लिए कैंप लगाए गए।

नहीं हुई एक भी महिला या बच्चे की मौत

Shravasti Jeevan Camp model applied in UP.

इनमें से 123 कैंप ग्रामीण व सात कैंप शहरी क्षेत्र में थे। इन शिविरों में एक लाख बीस हजार महिलाओं व बच्चों की जांच की गई। जांच के दौरान 5500 गर्भवती महिलाएं खून की बेहद कमी (एनीमिया) की शिकार पाई गईं।

जबकि 1300 बच्चे अति कुपोषित के रूप में पहचाने गए। इस दौरान एनीमिक गर्भवती व कुपोषित बच्चों के साथ कैंप में आई सभी गर्भवतियों के बीच पोषाहार का वितरण किया गया।

इसके बाद 8 दिसंबर से अब तक अतिकुपोषित बच्चों व एनीमिक गर्भवतियों के स्वास्थ्य की ट्रैकिंग नोडल अधिकारियों के माध्यम से किया जा रही है। इसका नतीजा यह रहा कि इस दौरान एनीमिक व कुपोषण के चलते जिले में एक भी महिला या बच्चे की मौत नहीं हुई।

और पूरे प्रदेश में हुआ लागू

Shravasti Jeevan Camp model applied in UP.

शासन ने श्रावस्ती में लागू कार्य योजना की रिपोर्ट मांगी थी। शुक्रवार को राज्य सरकार ने इस जीवन कैंप माडल को एक शासनादेश जारी करके पूरे प्रदेश में लागू कर दिया है। इसके साथ ही डीएम श्रावस्ती को आमजन के हित के लिए अभिनव प्रयोग के लिए प्रशस्ति पत्र भी दिया है।

डीएम निखिल चंद्र शुक्ला कहते हैं कि हमारा उद्देश्य श्रावस्ती जिले में निमोनिया व कुपोषण से हो रही मौतों को रोकना है। शासन ने प्रशस्ति पत्र व शासनादेश के माध्यम से जो जिले को सम्मान दिया है उसके लिए आभारी हूं।

कुल लाभार्थी--एक लाख बीस हजार
लाभार्थियों में महिलाओं की संख्या--73 हजार
लाभार्थियों में बच्चों की संख्या--47 हजार

चिह्नित एनीमिक गर्भवती महिलाएं--5500
चिह्नित अति कुपोषित बच्चे--1300

गर्भवतियों में वितरित पोषाहार--2.5 लाख किलो

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