अपने सांसदों व परिवार के साथ रामलला के दर्शन करेंगे शिवसेना प्रमुख उद्घव ठाकरे
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शिवसेना प्रमुख उद्घव ठाकरे रविवार सुबह अपने परिवार और पार्टी के सभी सांसदों के साथ अयोध्या में रामलला के दर्शन करेंगे और मीडिया को संबोधित करेंगे।
शिवसेना के सांसद शनिवार देर रात ही अयोध्या पहुंच गए थे। वे पंचशील होटल में रुके, जहां से रविवार सुबह शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे के साथ राम लला का दर्शन करने जाएंगे। सांसदों का कहना है कि वे रामलला के धरती पर आकर खुद को धन्य मानते हैं, सुबह उठते ही राम जन्म भूमि का दर्शन करने की व्याकुलता है।
शिवसेना के प्रदेश उप प्रमुख अभय द्विवेदी ने बताया कि अभी तक शिवसेना के केंद्रीय मंत्री अरविंद सावंत, सांसद संजय यादव, सांसद सदाशिव लोखंडे व सांसद ओम राजे सहित कुछ अन्य सांसद पहुंच गए हैं।
सांसद संजय यादव ने अमर उजाला से बात में कहा कि वह पहले भी रामनगरी आ चुके हैं। रामलला का दर्शन करने की सभी सांसदों में तीव्र इच्छा है । वे श्री राम जन्म भूमि का दर्शन करना चाहते हैं। बताया कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर बने यह शिवसेना ही नहीं, संपूर्ण भारत का हिंदू समाज चाहता है । बताया कि सभी सांसद सुबह 10 बजे शिवसेना मुखिया उद्धव ठाकरे के साथ रामलला के दर्शन करने जाएंगे।
राम मंदिर पर बोली शिवसेना, हमारे लिए मोदी व शाह ही सुप्रीम कोर्ट
राम मंदिर के मुद्दे पर शिवसेना ने कहा है कि सभी मसले सुप्रीम कोर्ट से हल नहीं होते, जनता की अदालत सबसे बड़ा न्यायालय होती है। सरकार मजबूत है और सभी समस्याओं का समाधान निकाल सकती है। हमारे लिए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ही सुप्रीम कोर्ट हैं। यह बात शनिवार को यहां आए शिवसेना प्रवक्ता व सांसद संजय राउत ने पत्रकारों से बातचीत में कही।
राउत यहां शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की रविवार को प्रस्तावित अयोध्या यात्रा की तैयारियों के लिए आए हुए हैं। राउत ने बताया कि उद्धव रविवार सुबह 10 बजे अपनी पार्टी के सभी सांसदों के साथ रामलला के दर्शन के साथ जल्द राममंदिर निर्माण शुरू होने की कामना करेेंगे।
राउत ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्य नाथ के नेतृत्व में ही राममंदिर बनेगा। राम मंदिर मामले पर भाजपा ही रूपरेखा तय करेगी, हम केवल घटक दल हैं। राममंदिर के लिए सरकार को याद दिलाने की जरूरत नहीं है, 2019 का जो बहुमत मिला है वह राममंदिर निर्माण के लिए ही मिला है। अगला चुनाव राममंदिर मुद्दे पर नहीं लड़ा जाएगा। रामलला हमारे लिए राजनीति का नहीं, बल्कि आस्था का विषय हैं। मंदिर का नारा न तो शिवसेना भूली है और न ही आरएसएस, विहिप व भाजपा सबको याद है।