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जो अधिकारी जानबूझकर फाइल रोकते हैं वे हो जाएं सावधान : शिवपाल

Tue, 05 Apr 2016 02:10 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Tue, 05 Apr 2016 02:10 PM IST
सार

  • पैकफेड कर रहा है 29 विभागों के निर्माण कार्य 
  • बोले शिवपाल, सपा सरकार ने 30 साल का काम किया 3 साल में

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shivpal yadav in annual meeting of indira gandhi pratisthan
‌शिवपाल यादव वार्षिक बैठक में मौजूद - फोटो : amar ujala

विस्तार

सहकारिता, लोकनिर्माण एवं सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने सहकारिता आंदोलन को कमजोर करने के लिए ब्यूरोक्रेट्स को निशाने पर लिया। कहा कि कुछ अधिकारी जानबूझकर फाइलें रोकते हैं, काम मे रुकावट डालते हैं। ऐसे अधिकारियों को सावधान हो जाना चाहिए। 

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शिवपाल सोमवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में उप्र विधायन एवं निर्माण सहकारी संघ लि. (पैकफेड) की सामान्य निकाय की वार्षिक बैठक में बोल रहे थे। इससे पहले उन्होंने पैकफेड की 550 परियोजनाओं का शिलान्यास और 181 का लोकार्पण किया।
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उन्होंने कहा कि सहकारिता का उद्देश्य कमजोर, पिछड़ों व समाज में उपेक्षित लोगों का सहयोग करना है। सहकारी संस्था र्कोई भी हो उसकी साख खराब नहीं होनी चाहिए। साख पर बट्टा लगने पर तमाम बाधाएं आती हैं।
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जब मैं पहली बार भूमि विकास बैंक (एलडीबी) का अध्यक्ष बना तो प्रदेश या केंद्र सरकार में एलडीबी की कोई फाइल नहीं रुकती थी। पैकफेड और लैकफेड के साथ ऐसी स्थिति आई कि कोई विभाग उन्हें काम देने को तैयार नहीं था। 

शिवपाल ने 731 परियोजनाओं का किया शिलान्यास

shivpal yadav in annual meeting of indira gandhi pratisthan
शिवपाल यादव वार्षिक बैठक में मौजूद - फोटो : amar ujala

खुशी है कि पैकफेड 29 विभागों के निर्माण कार्य कर रहा है। उन्होंने जिन 731 परियोजनाओं का शिलान्यास या लोकार्पण किया है वे 630 करोड़ से ऊपर की हैं। सहकारिता मंत्री ने प्रमुख सचिव सहकारिता किशन सिंह अटोरिया की तारीफ की। कहा कि वह सुलझे हुए हैं। हमारे साथ कई विभागों में काम कर चुके हैं। 

लेकिन बहुत से अधिकारी जानबूझकर काम रोकते हैं। ब्यूरोक्रेट्स के साथ कुछ कमियां जनप्रतिनिधियों की भी हैं। उन्हें विचार करना होगा कि किन उद्देश्यों को लेकर सहकारिता आंदोलन चलाया गया था। जनप्रतिनिधियों और चुने हुए लोगों को सम्मान मिलना चाहिए। 

उन्हें वेतन तो मिलता नहीं, सम्मान में भी कोताही हो गई तो कैसे काम चलेगा। उन्होंने कहा, सपा सरकार ने बहुत काम किया है। 30 साल का काम तीन साल में ही कर दिया। किसी के साथ भेदभाव नहीं किया। अधिकारियों, कर्मचारियों को बड़े पैमाने पर पदोन्नति दी गई। इसके बावजूद कुछ अधिकारी काम नहीं करते। 

यह ठीक नहीं है। सहकारिता आंदोलन को भी अधिकारियों ने झटका दिया। इतनी सुविधाएं देने के बाद भी यदि किसानों, कमजोर लोगों को दिक्कतें आ रही हैं तो सोचना होगा कि कमी किसकी है ? कुछ कमियां जनप्रतिनिधियों में भी हैं। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सभी को चुनाव लड़ने का अधिकार है।   

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