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42 साल से संघर्ष... पिता के रिटायरमेंट लाभ के लिए आज भी लड़ाई लड़ रहे बेटे

Tue, 08 Aug 2017 10:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 08 Aug 2017 10:37 AM IST
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shiv Bahadur case pending from forty two years
हाईकोर्ट

आजादी से तीन साल पहले सिंचाई विभाग में सींचपाल नियुक्त हुए एक कर्मचारी को उसके रिटायरमेंट बेनिफिट आज तक नहीं मिल सका है।

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42 साल से हक की लड़ाई की यह कहानी है शिव बहादुर और उसके परिवार की। हक मांगते-मांगते शिव बहादुर की मौत हो गई। पत्नी भी चल बसी।

ये हालात तब हैं जब वर्ष 2009 में हाईकोर्ट ने एक कड़े आदेश में विभाग को उसके समस्त बकाये के भुगतान का आदेश दिया था।

विभाग ने नहीं सुनी तो कर्मचारी के बेटों ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका लगाई। हाईकोर्ट ने अब सिंचाई विभाग के जिम्मेदार अफसर 25 अगस्त को कोर्ट में व्यक्ति रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है।
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शिव बहादुर 1945 में सींचपाल बने। 30 साल की नौकरी के बाद शारीरिक रूप से कमजोर होने पर 1975 में विभाग से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति मांगी। जब रिटायरमेंट के लाभ नहीं मिले तो उन्होंने कई बार विभाग को पत्र लिखा। पर कोई जवाब नहीं मिला।
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अगस्त 1992 में उन्हें प्रदेश के महालेखाकार द्वितीय ने 2,304 रुपये जारी किया। 26 सितंबर, 1993 को शिव बहादुर की मौत हो गई तो उनके बकायों के भुगतान के लिए पत्नी प्रभुदेई और दो बेटों ने 1995 में हाईकोर्ट में याचिका दायर किया। सुनवाई के दौरान 2001 में प्रभुदेई चल बसी तो उनके बेटों ने केस लड़ा।


8 साल बाद भी हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं
नवंबर 2009 में जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने सरकार को निर्देश दिया था कि वे याची को उनके समस्त रिटायरमेंट बेनिफिट 10 प्रतिशत ब्याज के साथ तीन महीने में चुकाएं।

50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। 8 साल बाद भी इस पर अमल नहीं हुआ तो याची के बेटे राजनारायण ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की। इसकी भी सुनवाई जस्टिस सुधीर अग्रवाल ही कर रहे हैं।

उन्होंने रिटायरमेंट बेनिफिट न देने वाले सिंचाई विभाग के अफसरों को तलब करते हुए उनसे पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए?

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