रेप के दोषी पूर्व विधायक को 10 साल की सजा
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बांदा के साढ़े चार साल पुराने बहुचर्चित शीलू दुष्कर्म मामले में पूर्व बसपा विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी को 10 साल की सजा सुनाई गई है। बांदा के नरैनी से विधायक रहे पुरुषोत्तम के अलावा रामनरेश द्विवेदी उर्फ रावण और वीरेंद्र कुमार शुक्ला उर्फ गर्ग को भी सजा सुनाई गई है। इस मामले में पांच लोगों को आरोपी बनाया गया था।
सीबीआई के विशेष न्यायाधीश वीके श्रीवास्तव ने शुक्रवार को दो आरोपियों राजेंद्र शुक्ला और रघुवंश मणि द्विवेदी उर्फ सुरेश नेता को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
सीबीआई के वरिष्ठ लोक अभियोजक एस. इस्लाम ने बताया कि सीबीआई ने पीड़िता के साथ बिजनौर के तत्कालीन न्यायिक मजिस्ट्रेट परवेज अख्तर तथा लखनऊ की न्यायिक मजिस्ट्रेट मिर्जा जीनत समेत कुल 13 गवाहों की गवाही हुई। साक्ष्य के रूप में 34 दस्तावेज पेश किए गये। वहीं बचाव पक्ष की ओर से 5 गवाहों की गवाही दर्ज कराई गई।
वरिष्ठ लोक अभियोजक ने बताया कि पीड़िता की शिकायत के बाद बांदा के तत्कालीन न्यायिक मजिस्ट्रेट परवेज अख्तर ने 7 जनवरी 2011 को बांदा के पुलिस अधीक्षक को आवश्यक कार्यवाही करने का आदेश दिया।
इसके बाद 12 जनवरी को अतर्रा थाने में पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी, सुरेश नेता, राजेन्द्र शुक्ला, रावण तथा वीरेन्द्र के खिलाफ दुराचार, छेड़खानी, मारपीट समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई।
चोरी मामले में शीलू को मिली थी क्लीन चिट
सीबीसीआईडी ने अपनी विवेचना में निष्कर्ष निकाला कि शीलू ने कोई चोरी नहीं की है। वह अपने पहनने के कपड़े लेकर गई थी। इसके बाद शीलू को जेल से रिहा कर दिया गया।
14 जनवरी को सीआईडी को दुराचार मामले की विवेचना मिली जिसके बाद विवेचक विजय कुमार भट्ट व नन्दलाल यादव ने गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद 20 जनवरी 2011 को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी।
सीबीसीआईडी की चार्जशीट दाखिल होने के बाद इरुदिया नाथन ने मामले में एक रिट सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल किया। 12 सितंबर 2011 को सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की विवेचना सीबीआई को सौंप दी।
सीबीआई ने तत्कालीन विधायक पुरुषोत्तम के खिलाफ दुराचार तथा वीरेन्द्र, रामनरेश के खिलाफ छेड़खानी व मारपीट के आरोपों में चार्जशीट दायर किया। सीबीआई ने राजेंद्र शुक्ला व सुरेश नेता उर्फ रघुवंश मणि के खिलाफ कोई चार्जशीट नहीं दायर की थी।
बाद में मामले की सुनवाई के लिए इस प्रकरण को लखनऊ की सीबीआई की अदालत में भेज दिया गया जहां कोर्ट ने सभी आरोपियों के खिलाफ सुनवाई की। इस मामले में बचाव पक्ष ने कहा कि सारा प्रकरण राजनीतिक वैमनस्यता, प्रतिद्वंद्विता, द्वेष व रंजिश का कुपरिणाम है। हालांकि अदालत ने इसे नहीं माना।
विधायक ने पीड़िता को चोरी में भिजवा दिया था जेल
सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि 14 दिसंबर, 2010 को तत्कालीन विधायक पुरुषोत्तम नरेश के पुत्र मयंक द्विवेदी ने बांदा के अतर्रा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके घर पर काम करने वाली शीलू नाम की लड़की विधायक का मोबाइल, 5000 रुपये तथा कपड़े चोरी करके भाग गई है। पुलिस ने उसे उसी दिन गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया।
विधायक ने दो बार किया दुष्कर्म
2 जून को मामला सीबीसीआईडी के पास गया। इसी दौरान जेल में बंद शीलू 4 जनवरी, 2011 को बांदा के तत्कालीन न्यायिक मजिस्ट्रेट परवेज अख्तर सामने पेश हुई।
उसने आरोप लगाया कि पुरुषोत्तम उसे उसकी चाची के यहां से काम कराने के लिए लाया था। इस दौरान विधायक ने पीड़िता के साथ दो बार दुष्कर्म किया।
तीसरी बार कोशिश की तो वह किसी तरह भाग निकली। पीड़िता ने अर्जी में यह भी आरोप लगाया कि सुरेश नेता, राजेन्द्र शुक्ला, रामनरेश उर्फ रावण तथा वीरेन्द्र कुमार शुक्ला उर्फ गर्ग ने उसके साथ मारपीट की। छेड़खानी की और चोरी के झूठे आरोप में जेल भेज दिया।
जानें, किसको कितनी सजा मिली
पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी : 10 साल की सजा। एक लाख का जुर्माना। जुर्माना नहीं भरने पर छह माह की अतिरिक्त सजा। जुर्माने में से 50 हजार पीड़िता को दिया जाएगा।
रामनरेश द्विवेदी उर्फ रावण : मारपीट के आरोप में एक साल।छेड़खानी में दो साल तथा एक हजार का जुर्माना।
वीरेंद्र कुमार शुक्ला उर्फ गर्ग : मारपीट के आरोप में एक साल।छेड़खानी में दो साल तथा एक हजार का जुर्माना।
बचाने के लिए पत्नी ने विधायक को नपुंसक तक बताया
विधायक को बचाने के लिए पहले तो पुलिस ने शीलू को वयस्क और शारीरिक संबंधों का अभ्यस्त बताने की कोशिश की। इस कोशिश में परिवारवाले भी पीछे नहीं रहे। विधायक की पत्नी ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्हें बचाने के लिए उन्हें नपुंसक तक बता दिया।
एसपी बार-बार देते थे धमकी
पुरुषोत्तम का रसूख ऐसा था कि बांदा एसपी अनिल कुमार दास पीड़िता को धमकी देने अक्सर जेल पहुंच जाते थे। वह भी बिना लिखापढ़ी के।