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संयोग: इस बार शरद पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण साथ-साथ, नौ घंटे पहले ही शुरू हो जाएगा सूतक; इसका रखना होगा ध्यान
Sat, 21 Oct 2023 11:03 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 21 Oct 2023 11:03 AM IST
सार
आचार्य पंडित धीरेंद्र पांडेय के मुताबिक, ग्रहण का मध्य काल रात 1 बजकर 44 मिनट पर होगा। वहीं 2 बजकर 23 मिनट पर ग्रहण समाप्त होगा। वैदिक ज्योतिष शोध परिषद के अध्यक्ष महामहोपाध्याय डॉ. आदित्य पांडेय बताते हैं कि शास्त्रीय ग्रंथ धर्म सिंधु के अनुसार, चंद्रग्रहण का प्रभाव पूरे जनमानस पर पड़ता है।
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चंद्रग्रहण(फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
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विस्तार
इस बार शरद पूर्णिमा और चंद्रग्रहण 28 अक्तूबर को साथ-साथ होंगे। यह इस साल का अंतिम चंद्रग्रहण होगा। रात 1 बजकर 5 मिनट से ग्रहण की शुरुआत होगी। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक चंद्रग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले ही शुरू हो जाएगा।
आचार्य पंडित धीरेंद्र पांडेय के मुताबिक, ग्रहण का मध्य काल रात 1 बजकर 44 मिनट पर होगा। वहीं 2 बजकर 23 मिनट पर ग्रहण समाप्त होगा। वैदिक ज्योतिष शोध परिषद के अध्यक्ष महामहोपाध्याय डॉ. आदित्य पांडेय बताते हैं कि शास्त्रीय ग्रंथ धर्म सिंधु के अनुसार, चंद्रग्रहण का प्रभाव पूरे जनमानस पर पड़ता है।
वहीं निर्णय सिंधु कहता है कि बुजुर्ग, बच्चे और बीमार लोगों को छोड़कर ग्रहण सभी के लिए प्रभावी माना जाता है। ग्रहण का सूतक भी प्रभावी माना जाता है। ऐसे में शरद पूर्णिमा इस बार ग्रहण से प्रभावित रहेगा।
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शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से युक्त होता है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात आसमान से अमृत की वर्षा होती है। इसलिए खुले आसमान तले खीर रखने की परंपरा है। शरद पूर्णिमा पर पूजन कब करें और छत पर कब खीर रखें, इन सवालों पर पंडित धीरेंद्र पांडेय व डॉ. आदित्य पांडेय कहते हैं कि पूजन और खीर रखने का काम ग्रहण समाप्त होने के बाद करें तो अच्छा होगा।
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आचार्य पंडित धीरेंद्र पांडेय के मुताबिक, ग्रहण का मध्य काल रात 1 बजकर 44 मिनट पर होगा। वहीं 2 बजकर 23 मिनट पर ग्रहण समाप्त होगा। वैदिक ज्योतिष शोध परिषद के अध्यक्ष महामहोपाध्याय डॉ. आदित्य पांडेय बताते हैं कि शास्त्रीय ग्रंथ धर्म सिंधु के अनुसार, चंद्रग्रहण का प्रभाव पूरे जनमानस पर पड़ता है।
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वहीं निर्णय सिंधु कहता है कि बुजुर्ग, बच्चे और बीमार लोगों को छोड़कर ग्रहण सभी के लिए प्रभावी माना जाता है। ग्रहण का सूतक भी प्रभावी माना जाता है। ऐसे में शरद पूर्णिमा इस बार ग्रहण से प्रभावित रहेगा।
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शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से युक्त होता है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात आसमान से अमृत की वर्षा होती है। इसलिए खुले आसमान तले खीर रखने की परंपरा है। शरद पूर्णिमा पर पूजन कब करें और छत पर कब खीर रखें, इन सवालों पर पंडित धीरेंद्र पांडेय व डॉ. आदित्य पांडेय कहते हैं कि पूजन और खीर रखने का काम ग्रहण समाप्त होने के बाद करें तो अच्छा होगा।
हालांकि, निर्णय सिंधु में यह भी वर्णित है कि यदि तुलसी दल किसी भी भोजन पात्र में डाल दिया जाए, तो उसपर ग्रहण का दोष प्रभावी नहीं होता। ऐसे में खीर में तुलसी दल डालकर रखने से ग्रहण का दोष प्रभावी नहीं होगा। वैसे ग्रहण का दुष्प्रभाव ग्रहण काल में ही माना जाता है।
ग्रहण से पूर्व पात्र में तुलसी पत्र या कुश डालकर खीर रखी जा सकती है। रात में 8 बजे के आसपास उसको खुले आसमान के नीचे रख दें और फिर ग्रहण लगने से पहले ही हटा लें। ग्रहण काल के बाद रखना है, तो पहले से तुलसी दल डालकर घर के अंदर रखें।
इसका रखें ध्यान
खीर में तुलसी की पत्तियां डालकर रखें, रात एक बजे से पहले छत से हटा लें या फिर ग्रहण काल बीतने के बाद रखें
खीर में तुलसी की पत्तियां डालकर रखें, रात एक बजे से पहले छत से हटा लें या फिर ग्रहण काल बीतने के बाद रखें