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लॉकडाउन ने ठंडे किए शाही रसोई के चूल्हे, अवध की 181 साल पुरानी रिवायत पर लगा ब्रेक

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Fri, 01 May 2020 02:14 AM IST
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Shahi rasoi not work in lockdown
लखनऊ। अवध की शाही रसोई पर भी लॉकडाउन का साया पड़ गया है। गरीबों को खाना बांटने की मंशा से बनी शाही रसोई के चूल्हे इन दिनों ठंडे पड़े हैं। कोरोना वायरस ने रमजान में गरीबों को मिलने वाले भोजन और इफ्तारी की 181 साल पुरानी अवध की रिवायत पर ब्रेक लगा दिया है। अवध के तीसरे बादशाह मोहम्मद अली शाह ने अवध की गंगा-जमुनी तहजीब को जिंदा रखने के साथ समय-समय पर धार्मिक आयोजन करने के लिए 1839 में हुसैनाबाद ट्रस्ट की स्थापना की थी। ट्रस्ट का मकसद नवाबों के वंशजों को वसीका देने के साथ गरीब लड़कियों की शादी कराना, बच्चों को छात्रवृत्ति देना, बेघर लोगों को रहने के लिए किराए पर मकान मुहैया कराने के अलावा इस्लामिक तिथियों में मजलिस व महफिल का आयोजन कराकर तबर्रुक बांटने की व्यवस्था करना था। हुसैनाबाद ट्रस्ट 181 साल से अपनी इन्हीं रवायतों पर चलते हुए, मुहर्रम के दस दिनों तक मजलिसों में तबर्रुक बांटने और रमजान के 30 दिन तक मस्जिदों और गरीब परिवारों को इफ्तारी बांटने का काम कर रहा है। मुहर्रम का तबर्रुक और रमजान में इफ्तारी छोटा इमामबाड़ा की शाही रसोई में तैयार किया जाता है। इस बार लॉकडाउन में शाही रसोई के चूल्हे ठंडे पड़े हैं। शाही रसोई में रमजान के पहले रोजे से ईद का चांद दिखने तक छोटा इमामबाड़ा, बड़ा इमामबाड़ा, शाहनजफ इमामबाड़ा, रौजा ए काजमैन सहित ट्रस्ट की तकरीबन 12 से 15 मस्जिदों में एक हजार रोजेदारों की इफ्तारी की व्यवस्था की जाती है। शाही रसोई में इफ्तारी के साथ ही हुसैनाबाद ट्रस्ट की ओर से चयनित करीब 80 गरीब परिवारों को हर साल रमजान के महीने में वितरित करने के लिए सालन-रोटी भी तैयार की जाती है। रमजान के दिनों में ट्रस्ट की मस्जिदों में जाने वाली इफ्तारी और परिवारों को मिलने वाला भोजन इस बार लॉकडाउन की वजह से नहीं वितरित किया जाएगा। हुसैनाबाद ट्रस्ट सचिव एवं सिटी मजिस्ट्रेट एसपी सिंह ने कहा रमजान के दिनों में ट्रस्ट की मस्जिदों में जाने वाली इफ्तारी और परिवारों को मिलने वाला भोजन इस बार लॉकडाउन की वजह से नहीं वितरित किया जाएगा। मस्जिदें बंद हैं, सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से सामूहिक इफ्तार नहीं हो रहा है। छोटे इमामबाड़े में चयनित परिवार भोजन लेने के लिए आते हैं। ऐसे में लॉकडाउन का पालन नहीं हो पाएगा। इन सभी समस्याओं को देखते हुए इस बार शाही रसोई में कोई तैयारी नहीं की गई है।
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