अटलजी ने प्रधानमंत्री बनते ही दी थी शहीद पथ की सौगात, यहीं से हुई थी मॉडर्न लखनऊ की शुरुआत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
23 किमी लंबी और फैजाबाद रोड से रायबरेली रोड होते हुए कानपुर रोड को जोड़ने वाली शहीद पथ की योजना को हरी झंडी केवल तीन दिन में मिली थी। लखनऊ से सांसद अटलजी ने प्रधानमंत्री बनते ही पहली सौगात शहीद पथ की दी।
1999 के अंत में तत्कालीन केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री राजनाथ सिंह को वह विशेष रूप से लखनऊ लेकर आए। इसके बाद एक स्वागत कार्यक्रम में उन्होंने इसकी घोषणा कराई। इस शहीद पथ के दोनों तरफ अब आधुनिक लखनऊ बस चुका है।
बहुमंजिला इमारतों से लेकर विश्वस्तरीय जरूरतों को पूरा करने वाली निजी और सरकारी क्षेत्र की आवासीय कॉलोनियां यहां बसीं हैं। सीजी सिटी के रूप में थीम सिटी भी यहां बसाई गई जिसमें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम से लेकर आईटी सिटी, मेडीसिटी, कैंसर इंस्टीट्यूट, आईआईआईटी बन रहे हैं। विभूतिखंड जो आज है, वह शहीद पथ की वजह से ही होना संभव हुआ।
1987 से लेकर 2002 तक लखनऊ में नगर आयुक्त, एलडीए सचिव व वीसी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहकर विकास की योजनाओं का क्रियान्वयन कराते रहे पूर्व आईएएस अधिकारी दिवाकर त्रिपाठी का कहना है कि शहीद पथ बनने के समय एलडीए जमीन अधिग्रहण के लिए डिफॉल्टर बना हुआ था।
200 पार्कों का कराया सौैंदर्यीकरण
ऐसे में जमीन अधिग्रहण की अनुमति प्राधिकरण को नहीं मिल रही थी। स्वर्णिम चतुर्भुज योजना में जहां हमने शहीद पथ के लिए 120 करोड़ रुपये लिए। वहीं शहीद पथ केलिए 1100 एकड़ जमीन अधिग्रहित भी विशेष अनुमति लेकर की।
गोमतीनगर विस्तार शहीद पथ से बची करीब 900 एकड़ जमीन पर लांच किया गया जोकि अब नए लखनऊ के रूप में जाना जाता है। उनका कहना है कि शहीद पथ अकेली योजना उनके विकास के विजन को प्रदर्शित करने वाली नहीं है। इसके अलावा झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले 1800 परिवारों को शिफ्ट कर जानकीपुरम विस्तार में लांच की गई।
आश्रयहीन कॉलोनी में पांच, 10, 15 रुपये रोजाना की किश्तों में आवास देने का मॉडल उनके दिशा-निर्देश पर बना। उनके ही हाथों इन परिवारों को आवंटन पत्र देकर आवासों पर कब्जा दिलाया गया। यह स्लम विकास के लिए एक मॉडल की तरह था।
कॉलोनियों के अंदर 200 पार्कों का उन्होंने सौैंदर्यीकरण कराया। इनमें दीनदयाल पार्क, कैसरबाग बारादरी, बुद्धा पार्क, नींबू पार्क, स्वर्णजयंती पार्क, झंडेवाला पार्क शामिल रहे। ट्रैफिक सुधार वह हमेशा चाहते थे।
यही वजह रही कि सात नए फ्लाईओवर्स उन्होंने विवेकखंड गोमतीनगर, इंजीनियरिंग चौराहा, सदर क्रॉसिंग, आरडीएसओ, मवैया जैसी जगहों पर बनवाए। करीब 42 चौराहों का नए सिरे से उन्होंने विकास कराया।
गोमती नगर से रहा उनका खास लगाव
इसमें सरकटा, पाटा, घसियारी मंडी जैसे नालों को डायवर्ट कर नदी में गिरने से रोका। इस सीवर को ट्रीट करने के लिए भरवारा, दौलतगंज में एसटीपी बनवाए। कई पंपिंग स्टेशन बनाए गए। कुडियाघाट का विकास कराया गया। हालांकि, यह योजना अधिक आगे नहीं बढ़ सकी।
विनयखंड निवासी और विकास प्राधिकरण में योजना सहायक राम नायक सिंह का जुड़ाव अटल जी के लखनऊ से पहली बार सांसद चुने जाने के समय से रहा। उनका कहना है कि उस समय ही गोमतीनगर का विकास होना शुरू हुआ था।
वह यहां के विकास से काफी प्रभावित थे। इसी लिए जब भी उन्हें वक्त मिलता। वह खुद विनयखंड स्थित मिनी स्टेडियम में आकर लोगों से मिलते। उस समय यहां केवल पार्क हुआ करता था। लोग अपनी शिकायतें उन्हें बताते। परेशानी देखने के लिए वह लोगों के साथ उनकी गलियों तक में चले जाते। यह सिलसिला काफी लंबे समय तक चला।
बिना पुराने को संवारे नया भी नहीं संवरेगा
‘लखनऊ के विकास की नींव पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई ने रखी। उनकी इस विरासत को पूर्व सांसद लालजी टंडन ने आगे बढ़ाया। अब मैं लखनऊ का सांसद होने के नाते अटल जी की दिखाई राह पर आगे बढ़कर राजधानी के विकास के लिए काम कर रहा हूं। मेरी कोशिश रही है कि अटल जी केलखनऊ के विकास केलिए शुरू किए रथ को मैं आगे ले जा सकूं। इसी क्रम में नए फ्लाईओवर्स, आउटर रिंगरोड का निर्माण, गोमतीनगर रेलवे स्टेशन का आधुनिकीकरण, कुकरैल-पिपराघाट पुलों की बाधा हटवाने का काम मैंने कराया।’
- राजनाथ सिंह, सांसद व केंद्रीय गृहमंत्री (5 अगस्त 2018 साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में)