{"_id":"5ed4cc8f8ebc3e906e129013","slug":"sgpgi-developed-a-kit-to-test-covid-19","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"एसजीपीआई ने विकसित की जांच किट, अब 500 रुपये में हो जाएगी कोरोना जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एसजीपीआई ने विकसित की जांच किट, अब 500 रुपये में हो जाएगी कोरोना जांच
Mon, 01 Jun 2020 03:08 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 01 Jun 2020 03:08 PM IST
विज्ञापन
जांच किट विकसित करने वाली टीम
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एसजीपीजीआई ने कोरोना वायरस की जांच के लिए एक किट विकसित की है। इस किट से 30 मिनट में वायरस की जांच की जा सकेगी। इस पर खर्च करीब 500 रुपया आएगा, जो अभी चार से पांच हजार तक आ रहा है। इसके पेटेंट के लिए आवेदन किया गया है। मंजूरी मिलने के बाद जांच की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा।
विज्ञापन
एसजीपीजीआई के माॅलिक्यूलर मेडिसिन एंड बायोटेक्नोलोजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर स्वाति तिवारी ने बताया कि उनकी टीम ने कोविड-19 की जांच में आ रहेे खर्च को कम करने की रणनीति पर काम किया। इसी के तहत एक किट विकसित की गई है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों ने जांच तकनीक का परीक्षण सिंथेटिक कोरोना आरएनए (राइबो न्यूक्लिक एसिड) पर किया, जिसमें वह सफल रही है। सीधे मरीज के नमूने के पर जांच नहीं की जाती है। यह जांच तकनीक भी आरएनए आधारित ही है। मरीज के नमूने से आरएनए निकाल कर उसमें ही संक्रमण देखा जाएगा।
विज्ञापन
हालांकि उन्होंने पेटेंट के लिए आवेदन किए जाने की वजह से किट के तकनीकी पहलुओं का खुलासा करने से इनकार कर दिया। पेटेंट के बाद किट की वैधता की जांच के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा।
जांच का खर्च होगा कम जल्दी मिल जाएगी रिपोर्ट
अनुमोदन मिलने के बाद कंपनियां किट का निर्माण करेंगी और तमाम परीक्षण केंद्र इस किट का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके लिए कई कंपनियां भी संपर्क में हैं। प्रो. स्वाति तिवारी ने बताया कि किट विकसित करने वाली टीम में डॉ. रजनी शर्मा, डॉ. सुमन मिश्रा और डॉ. विनोद शामिल हैं।
अभी तक विदेश से आयातित किट पर जांच चल रही है, जिसमें चार से पांच हजार का खर्च आता है। इस जांच में पीसीआर तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। पीजीआई की ओर से विकसित की गई इस नई किट में पीसीआर तकनीक का इस्तेमाल नहीं होगा, जिसके कारण जांच रिपोर्ट जल्दी मिलेगी। संक्रमण का पता लगाने के लिए मरीज के गले और नाक से स्वाब लिया जाता है। स्वाब सेल से आरएनए कालम तकनीक से निकालते हैं। यह 15 मिनट में निकल जाता है। इसी आरएनए से संक्रमण की पुष्टि करेंगे। इससे जांच रिपोर्ट गलत आने की आशंका भी कम होगी।
अभी तक विदेश से आयातित किट पर जांच चल रही है, जिसमें चार से पांच हजार का खर्च आता है। इस जांच में पीसीआर तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। पीजीआई की ओर से विकसित की गई इस नई किट में पीसीआर तकनीक का इस्तेमाल नहीं होगा, जिसके कारण जांच रिपोर्ट जल्दी मिलेगी। संक्रमण का पता लगाने के लिए मरीज के गले और नाक से स्वाब लिया जाता है। स्वाब सेल से आरएनए कालम तकनीक से निकालते हैं। यह 15 मिनट में निकल जाता है। इसी आरएनए से संक्रमण की पुष्टि करेंगे। इससे जांच रिपोर्ट गलत आने की आशंका भी कम होगी।