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यूपीपीसीएल के पीएफ घोटाले में बड़ी कार्रवाई, सात और लोगों को किया गया गिरफ्तार

Sat, 07 Dec 2019 10:56 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 07 Dec 2019 10:56 AM IST
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Seven arrested in pf scam in UPPCL.
प्रतीकात्मक तस्वीर

यूपी पावर कॉर्पोरेशन कर्मियों की भविष्य निधि (पीएफ) के अनियमित निवेश के मामले में ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा) ने शुक्रवार को सात और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें एक चार्टर्ड अकाउंटेंट, डीएचएफएल के तत्कालीन क्षेत्रीय सेल्स मैनेजर व फर्जी ब्रोकर फर्मों के संचालक शामिल हैं।

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इस मामले में जांच एजेंसी पूर्व में यूपीपीसीएल के पूर्व प्रबंध निदेशक एपी मिश्र, वित्त निदेशक सुधांशु त्रिवेदी, सचिव पीके गुप्ता, गुप्ता के बेटे अभिनव व उसके मित्र फर्जी ब्रोकर कंपनी के संचालक आशीष चौधरी को गिरफ्तार कर चुकी है। ईओडब्ल्यू के महानिदेशक आरपी सिंह ने बताया कि इस मामले में पावर कॉर्पोरेशन के कई अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों से पूछताछ की थी।
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इसके अलावा डीएचएफएल कंपनी, जिसमें पीएफ का निवेश किया गया, से जुड़े लोगों, जिन फर्मों के जरिए निवेश हुआ और जिन्हें कमीशन मिला, उनके संचालकों व कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंटों से पूछताछ कर चुकी है।

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इन्हें गिया गिरफ्तार

- अमित प्रकाश, डीएचएफएल का तत्कालीन रीजनल सेल्स मैनेजर
- मनोज कुमार अग्रवाल, दो फर्जी ब्रोकर फर्मों के संचालक
- विकास चावला, फर्जी ब्रोकर फर्म के संचालक
- संजय कुमार, फर्जी ब्रोकर फर्म के संचालक
- श्याम अग्रवाल, चार्टर्ड अकाउंटेंट
- अरुण जैन, छह ब्रोकर कंपनी का संचालक
- पंकज गिरि उर्फ नीशु, फर्जी फर्म संचालक

ईओडब्ल्यू ने कहा पूछताछ में खुल सकते हैं कई राज

यूपी पावर कारपोरेशन में कर्मचारियों के पीएफ घोटाले में गिरफ्तार सात अन्य आरोपियों को ईओडब्ल्यू रिमांड पर लेगा। ईओडब्ल्यू के महानिदेशक आरपी सिंह ने बताया कि जिन्हें गिरफ्तार किया गया है, उनकी अलग भूमिका तय की गई है। इन्हें अदालत के समक्ष पेश करने के बाद उनकी रिमांड मांगी जाएगी।

ईओडब्ल्यू को उम्मीद है कि इन आरोपियों से पूछताछ में पीएफ राशि के अनियमित निवेश के खेल और इसमें हुई ऊपरी रकम की बंदरबांट से जुड़ी अहम जानकारी सामने आ सकती है। चार्टर्ड अकाउंटेंट से मनी ट्रेल के बारे में जानने के लिए सवाल किए जाएंगे।

गिरफ्तार आरोपियों की यह थी भूमिका
अमित प्रकाश : डीएचएफएल का तत्कालीन रीजनल सेल्स मैनेजर है। अमित ने फर्जी ब्रोकर फर्मों को रजिस्टर कराने में अहम भूमिका निभाई। आरोपी ने पीके गुप्ता व उसके बेटे अभिनव गुप्ता से आपराधिक सांठगांठ कर इन फर्मों को कमीशन की रकम दिलाने में मदद की।

श्याम अग्रवाल : चार्टर्ड अकाउंटेंट है और इस पर कई फर्जी कंपनियों में डीएचएफएल व अल्पाइन ब्रोकरेज के माध्यम से ब्रोकरेज की राशि स्थानांतरित कराई। श्याम ने अपनी पत्नी को एक फर्म में पार्टनर बना कर लाभ कमाया। उसकेद्वारा कुल सात फर्मों को ब्रोकरेज की राशि हासिल हुई।

मनोज अग्रवाल : ने दो फर्मों के जरिए ब्रोकरेज की राशि हासिल की। इसकी एक फर्म को डीएचएफएल से सीधा ब्रोकरेज मिला जबकि दूसरी फर्म में पीके गुप्ता, अभिनव गुप्ता व आशीष चौधरी के जरिए अल्पाइन ब्रोकरेज के जरिए कमीशन हासिल किया।

विकास चावला : ने चार्टर्ड अकाउंटेंट श्याम अग्रवाल के साथ मिल कर अपनी फर्म के माध्यम से 4.12 करोड़ रुपये का ब्रोकरेज हासिल किया। यह राशि डीएचएफएल से सीधा हासिल हुई।

संजय कुमार : ने अपनी एक फर्म के ब्रोकरेज के नाम पर कई करोड़ की राशि का कमीशन हासिल किया।

अरुण जैन : ने छह अलग फर्मों में इसी चार्टर्ड अकाउंटेंट के जरिए कमीशन में हासिल राशि को डाइवर्ट कराया। इनमें कई फर्म फर्जी निकलीं।

पंकज गिरि : ने अरुण जैन व श्याम अग्रवाल के साथ मिलकर फर्जी फर्म खोली जिसमें डीएचएफएल से करोड़ों का कमीशन हासिल किया गया।

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