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खून का काला कारोबार: केमिकल और पानी मिलाकर दो को बनाते थे तीन यूनिट, सात गिरफ्तार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 26 Oct 2018 11:59 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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लखनऊ में केमिकल और पानी मिलाकर खून का काला कारोबार करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए एसटीएफ ने बृहस्पतिवार देर रात सात लोगों को दबोच लिया। एसटीएफ ने देर रात मड़ियांव स्थित मेडिसिन एंड ब्लड बैंक हॉस्पिटल और बीएनके हॉस्पिटल में छापा मारा।
उनके पास से आठ यूनिट खून बरामद हुआ है, जिसकी जांच की जा रही है। देर रात तक एसटीएफ ब्लड बैंक के दस्तावेज और कर्मचारियों का ब्यौरा खंगाल रही थी। एसटीएफ की छापेमारी काफी गोपनीय रही।
उसने स्थानीय पुलिस को भी इसकी सूचना नहीं दी थी। गिरोह का सरगना नसीम है, उसकी निशानदेही पर देर रात तक फैजुल्लागंज और कैंट में दबिश जारी रही। गिरोह के शातिरों के घर से खून बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी बरामद हुए हैं।
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एसटीएफ के मुताबिक, मड़ियांव में यह काला कारोबार लंबे समय से चल रहा था।एसटीएफ ने करीब 15 दिनों तक ब्लड बैंक की रेकी करने और सुबूत जुटाने के बाद कार्रवाई की। छापेमारी एसटीएफ डिप्टी एसपी अमित नागर के नेतृत्व में देर रात तक चली।
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उनके पास से आठ यूनिट खून बरामद हुआ है, जिसकी जांच की जा रही है। देर रात तक एसटीएफ ब्लड बैंक के दस्तावेज और कर्मचारियों का ब्यौरा खंगाल रही थी। एसटीएफ की छापेमारी काफी गोपनीय रही।
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उसने स्थानीय पुलिस को भी इसकी सूचना नहीं दी थी। गिरोह का सरगना नसीम है, उसकी निशानदेही पर देर रात तक फैजुल्लागंज और कैंट में दबिश जारी रही। गिरोह के शातिरों के घर से खून बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी बरामद हुए हैं।
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एसटीएफ के मुताबिक, मड़ियांव में यह काला कारोबार लंबे समय से चल रहा था।एसटीएफ ने करीब 15 दिनों तक ब्लड बैंक की रेकी करने और सुबूत जुटाने के बाद कार्रवाई की। छापेमारी एसटीएफ डिप्टी एसपी अमित नागर के नेतृत्व में देर रात तक चली।
बिना मेडिकल डिग्री के काम कर रहे थे कर्मचारी
blood donation
एसटीएफ अधिकारियों के मुताबिक, केमिकल और पानी मिलाकर दो यूनिट से तीन यूनिट खून बनाया जा रहा था। यहां बिना मेडिकल डिग्री के कर्मचारी काम करते थे। ब्लड बैंक में किसी डॉक्टर की तैनाती भी नहीं है। दबोचे गए सभी युवक इंटर तक पढ़े हैं।
एक यूनिट मिलावटी खून के लिए 3500 रुपये वसूलते थे। यह गिरोह मजदूरी और रिक्शा चालकों से 1000-1200 रुपये में खून खरीदता था और उसमें केमिकल व पानी मिलाता था। अपनी पहचान गुप्त रखने के लिए गिरोह के लोग फर्जी पते पर मोबाइल सिम खरीदते थे।
एक यूनिट मिलावटी खून के लिए 3500 रुपये वसूलते थे। यह गिरोह मजदूरी और रिक्शा चालकों से 1000-1200 रुपये में खून खरीदता था और उसमें केमिकल व पानी मिलाता था। अपनी पहचान गुप्त रखने के लिए गिरोह के लोग फर्जी पते पर मोबाइल सिम खरीदते थे।