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रेलवे: फर्जी नियुक्ति देने वाले सात गिरफ्तार, सैकड़ों को बनाया शिकार, कई राज्यों में फैला था नेटवर्क

Thu, 25 Apr 2019 03:20 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 25 Apr 2019 03:20 PM IST
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Seven arrested for fake appointment in railway
पुलिस की गिरफ्त में रेलवे में फर्जी नियुक्ति देने वाला गिरोह - फोटो : amar ujala

सैकड़ों युवाओं को रेलवे में नौकरी दिलाने का झांसा दे करोड़ों रुपये ठगने वाले गिरोह के सरगना समेत सात को विकासनगर पुलिस ने मंगलवार रात दबोच लिया। गिरोह का नेटवर्क छह से ज्यादा राज्यों में फैला हुआ है। जिलों में इसके एजेंट हैं।

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गिरोह का सरगना गोरखपुर के बसंतपुर निवासी सुशील कुमार शर्मा उर्फ बीके सिंह रेलवे का बर्खास्त कर्मचारी है। पुलिस का दावा है कि सुशील ने कुबूला कि टीसी की नौकरी के नाम पर वह 8 से 10 लाख रुपये वसूलता था। छोटे पदों के लिए 5 से 7 लाख रुपये ऐंठते थे।
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गिरोह के तार कहीं रेलवे के आला अधिकारियों के कार्यालय में तैनात कर्मचारियों से तो नहीं जुड़ें हैं, पुलिस इसकी पड़ताल कर रही है। अपर पुलिस अधीक्षक ट्रांसगोमती के मुताबिक अमित कुमार के मुताबिक विकासनगर पुलिस की टीम ने मंगलवार रात करीब 10.30 बजे मिनी स्टेडियम के पास से इस गिरोह को पकड़ा।
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इसमें सुशील के साथ ही मध्यप्रदेश ग्वालियर निवासी कोच अटेंडेंट लखन सिंह उर्फ लखन गोयल, कानपुर के नौबस्ता निवासी जॉब कंसल्टेंसी चलाने वाला अंकित कटियार, डाटा फीड करने वाला भोपाल का मिथुन गौतम, मुरैना का अरुण बरइया, गोरखपुर के खोराबार का श्रवण यादव उर्फ गुल्लू और इसी जिले के देईडीहा का राजेंद्र पासवान शामिल है।

स्टेशन परिसर में पेड़ के नीचे चिकित्सकीय परीक्षण

प्रभारी निरीक्षक विकासनगर रामकुमार यादव के मुताबिक यह गिरोह जिलों में अपने एजेंटों के जरिये बेरोजगारों से संपर्क कर उन्हें नौकरी का झांसा देता था। आवेदन पत्र दाखिल करने से लेकर नियुक्ति व चिकित्सकीय परीक्षण का ठेका लिया जाता था।

शातिरों को जब ये लगता कि अब शिकार से और ज्यादा वसूली नहीं की जा सकती चिकित्सकीय परीक्षण का नया चारा फेंकते। सबको  बादशाहनगर रेलवे स्टेशन पर बुलाते थे। स्टेशन परिसर में पेड़ के नीचे चिकित्सकीय परीक्षण होता। किसी को शक न हो इसलिए कुछ रेलवे के चिकित्सा विभाग के कर्मचारियों जैसा ड्रेस पहनते। अंगुली में पिन चुभोकर खून का नमूना लेने का नाटक करते। कुछ देर बाद उन्हें बुलाकर फर्जी चिकित्सकीय प्रमाण पत्र दे देते।

बार कोड लगा नियुक्ति पत्र देते ताकि किसी को शक न हो
अपर पुलिस अधीक्षक ट्रांसगोमती अमित कुमार के मुताबिक गिरोह जो नियुक्ति पत्र जारी करता, उस पर बार कोड लगा होता। उसे स्कैन करने पर जिस युवक या युवती के नाम से नियुक्ति पत्र जारी है उसका ब्योरा कंप्यूटर में आ जाता। ऐसे में फर्जी नियुक्ति पत्र होने का संदेह नहीं होता।

पुलिस ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर
जालसाजों पर शिकंजा कसने के लखनऊ पुलिस ने हेल्पलाइन नंबर 7839861314 जारी किया है। सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी के शिकार हुए युवक इस नंबर पर कॉल कर शिकायत दर्ज करा सकते है।

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