पर्यावरण दिवसः लॉकडाउन खत्म होते ही बिगड़ी हवा की सेहत, विशेषज्ञों ने दिए सुझाव
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सबसे बुरे हालात तालकटोरा और लालबाग में मिल रहे हैं। यहां एक्यूआई 190 तक रिकॉर्ड हो रहा है। सीधे तौर पर यह हवा में जहर घुलने का इशारा है। विशेषज्ञों का कहना है कि लॉकडाउन की तरह हवा को साफ बनाए रखने के लिए बड़े उपाय करने की जरूरत नहीं है।
छोटे-छोटे प्रयासों से ही हवा को शुद्ध और सांस लेने लायक बनाए रखा जा सकता है। अप्रैल, मई व जून के आंकड़ों को देखा जाए तो अप्रैल में जब सख्ती कम थी, उस समय अधिक एक्यूआई था। मई में सख्ती ने एक्यूआई को 100 के नीचे पहुंचा दिया। जून में लॉकडाउन खत्म होते ही एक्यूआई फिर बढ़ गया।
लॉकडाउन में हवा सुधरी
1 अप्रैल 136
2 अप्रैल 111
3 अप्रैल 73
1 मई 88
2 मई 66
3 मई 66
1 जून 84
2 जून 96
3 जून 119
इलाकों में इस तरह रहा हाल
तारीख तालकटोरा गोमतीनगर लालबाग अलीगंज
एक अप्रैल 186 -- 154 100
दो अप्रैल 146 62 121 58
तीन अप्रैल 76 67 108 43
एक मई 68 96 78 92
दो मई 65 57 60 74
तीन मई 72 68 65 64
एक जून 133 62 106 77
दो जून 138 50 118 67
तीन जून 190 80 144 90
पानी का छिड़काव ही बदल सकता है हालात
लखनऊ में यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी रहे डॉ. कुलदीप मिश्र का कहना है कि वायु प्रदूषण को कम रखना बड़ी चुनौती नहीं है। अगर सरकारी विभाग खास तौर पर नगर निगम उचित कदम उठाएं तो एक्यूआई खुद कम हो जाएगा। लॉकडाउन से स्पष्ट है कि वाहनों से उड़ने वाली धूल से एक्यूआई बढ़ता है।
हमारी प्राथमिकता इसे कम करने पर होनी चाहिए। इसके लिए रोजाना दोपहर व शाम करीब 15 फीट से स्प्रिंकलर कर पानी का छिड़काव हो। यह पूरे साल होना चाहिए। निर्माण वाली साइट लखनऊ में बहुत अधिक नहीं हैं। बिल्डर्स के भरोसे छोड़ने की जगह उनसे शुल्क लेकर नगर निगम ही पानी का छिड़काव करे।
इसके लिए पानी भी एसटीपी से मिल सकता है, जो रोजाना करीब 500 एमएलडी शोधित पानी निकालता है। इसके अलावा जगह चिह्नित कर जाम लगने से रोका जाए। उद्योगों की चिमनियों से निकलने वाला धुआं 30 मीटर पर छूटता है।
इससे तालकटोरा या दूसरे औद्योगिक इलाकों में तो प्रदूषण नहीं बढ़ सकता, लेकिन इसका असर कुछ दूरी पर दूसरे इलाकों में होगा। असली ध्यान हमें औद्योगिक क्षेत्रों की सड़कों के रखरखाव पर देना होगा, जो बदहाल हैं। इन पर गाड़ियां निकलते ही यहां बुरी तरह धूल उड़ती है। यूपीपीसीबी जैसी संस्थाओं को भी अपने विभागों पर दबाव बनाकर काम कराने ही होंगे।