यूपी: सरकारी कर्मचारियों को वेतन देने के लिए बैंकों में खुलेंगे अलग काउंटर
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नोटबंदी के बाद गुरुवार को सरकारी कर्मचारियों को पहली बार वेतन मिला। सरकार ने कर्मियों को नकद भुगतान के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं की है।
कर्मियों को बैंक एकाउंट से वेतन निकालने में करेंसी की कमी आड़े न आए, इसके लिए मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने बुधवार को अहम बैठक की।
इसमें शासन, रिजर्व बैंक व कोषागार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। मुख्य सचिव ने सभी बैंक शाखाओं को कर्मचारियों के लिए अलग से काउंटर खोलने और रिजर्व बैंक को पर्याप्त करेंसी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
जारी किए गए जरूरी निर्देश
मुख्य सचिव ने एनेक्सी स्थित अपने कार्यालय में हुई बैठक में नई करेंसी की स्थिति और सरकारी कर्मियों द्वारा गुरुवार को वेतन निकालने से बैंक शाखाओं में अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक भीड़ होने के मद्देनजर जरूरी निर्देश दिए।
उन्होंने निदेशक कोषागार व बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों को कहा कि कर्मचारियों को अपने खाते से रकम निकालने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
संबंधित बैंकों की जिम्मेदारी होगी कि कर्मचारियों को अपने वेतन की आवश्यक राशि निकालने में नई करेंसी की कमी न हो।
नहीं होगी 500 व 2000 की नई करेंसी की कमी
मुख्य सचिव ने आवश्यकतानुसार काउंटर खोले जाने की व्यवस्था का भी निर्देश दिया। इससे आम जनता व कर्मचारियों को अपने खाते से रकम निकालने के लिए बैंकों में ज्यादा देर लाइन नहीं लगानी पड़ेगी।
रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि ने मुख्य सचिव को आश्वस्त किया कि 2000 व 500 की नई करेंसी की व्यवस्था कर ली गई है। बैंकों के प्रतिनिधियों ने अतिरिक्त काउंटर खोलने का आश्वासन दिया।
बैठक में प्रमुख सचिव वित्त डॉ. अनूपचंद्र पांडेय, क्षेत्रीय निदेशक भारतीय रिजर्व बैंक लखनऊ अजय कुमार, क्षेत्रीय निदेशक भारतीय रिजर्व बैंक कानपुर विवेक दीप व निदेशक कोषागार वीकेएल श्रीवास्तव उपस्थित थे।
कैश की राशनिंग, निकाल नहीं पाएंगे पूरी तनख्वाह
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कैश की राशनिंग यानी कैश पर कंट्रोल शुरू कर दिया है। लखनऊ सहित पूरे प्रदेश में बैंकों में कैश सप्लाई इससे प्रभावित होगी। इसका पहला असर कर्मचारियों पर पड़ेगा जिनकी 1 तारीख को तनख्वाह आ रही है। ऐसे में कर्मचारियों को कैश के बजाय अन्य मोड से पेमेंट कर खर्च चलाना होगा।
आरबीआई के निर्देशों के अनुसार एक हफ्ते में 24 हजार रुपये निकाले जा सकते हैं। लेकिन बैंकों के पास इतना कैश भी नहीं है। ऐसे में कर्मचारियों को तनख्वाह कैश में निकालने में दिक्कतें आएंगी।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया लखनऊ के क्षेत्रीय कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सारा संकट नकदी की कम सप्लाई से है। अगर कैश की पूरी सप्लाई हो तो चार हफ्ते में खाता धारक 96,000 रुपये निकाल सकते हैं। लेकिन केंद्र सरकार चाहती है कि फिलहाल कम कैश लोगों के हाथ में जाए, जिससे ऑनलाइन पेमेंट और ट्रांजेक्शन को बढ़ावा मिले।
नहीं की जा रही है कैश की सप्लाई
मुंबई में हुई आरबीआई की राष्ट्रीय बैठक में भाग लेकर लौटे बैंक ऑफ बड़ौदा के लखनऊ प्रभारी व जीएम बीएस ढाका का कहना है कि आरबीआई कैश की ‘राशनिंग’ करना चाहता है। इसलिए ज्यादा कैश सप्लाई नहीं की जा रही है।
पंजाब नेशनल बैंक के आंचलिक महाप्रबंधक लीलाधर रेवतकर के अनुसार कैश की उपलब्धता घटने से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में कैश सप्लाई रोकी गई और अब शहरों में भी लगाम लगानी पड़ रही है। आरबीआई से केवल आश्वासन मिल रहा है लेकिन शाखाओं पर काम कर रहे स्टाफ के लिए हालात मुश्किल होते जा रहे हैं।
समझिए सिस्टम : कैसे आती है सैलरी
लखनऊ सहित प्रदेश का बड़ा तबका निजी क्षेत्र और सरकारी सेवा में है। वेतन देने के लिए कंपनियों और संस्थानों के अपने बैंक अकाउंट से व्यवस्था बनी होती है। कंपनियां बैंकों को अपने कर्मचारियों की सूची और वेतन की सूचना भेजती हैं।
तय तारीख पर पैसा कंपनी के खाते से कट कर कर्मचारियों के सैलरी अकाउंट में पहुंच जाता है। कुछ में महीने का आखिरी वर्किंग डे तो कुछ में सात तारीख तक पैसा पहुंचता है। बैंक अधिकारियों के अनुसार इस प्रक्रिया पर असर नहीं होगा क्योंकि पैसा ऑनलाइन आना है।
उम्मीद थी कि 28 नवंबर तक हालात सुधरेंगे
जब खाताधारक इस पैसे को निकालने के लिए शाखाओं में पहुंचेंगे तो उतने करेंसी नोटों की व्यवस्था बैंकों को करनी होगी। बाधा यहीं है। बैंकों को नोट करेंसी चेस्ट से मिलते हैं और करेंसी चेस्ट में आरबीआई को सप्लाई करनी होती है।
नोटबंदी के बाद से आरबीआई कम कैश सप्लाई कर रहा था, उम्मीद थी कि 28 नवंबर तक हालात सुधरेंगे। लेकिन कई बैंकों के करेंसी चेस्ट में पैसा भेजना ही आरबीआई ने बंद कर दिया है।
हालात ऐसे बन गए
पिछले सप्ताह शुक्रवार से पहले बैंकों की ग्रामीण शाखाओं में पैसा भेजना बंद हो गया मंगलवार से राजधानी के अधिकतर बैंकों को पैसा नहीं भेजा गया। बुधवार को भी यही स्थिति रही।
एसबीआई और कुछ प्राइवेट बैंकों के अलावा बाकी के करेंसी चेस्ट ने कोई पैसा ही नहीं भेजा गया। वेतनभोगियों के लिए यह अभूतपूर्व स्थिति है, क्योंकि अपनी महीने भर की कमाई पाने के लिए उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है।
ये देखें, कितने राज्य व कितने केंद्र के कर्मचारी
- 21 लाख राज्य सरकार के कर्मचारी।
- 2.87 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारी
प्रदेश में 2011 की जनगणना के अनुसार
- 9.31 प्रतिशत है यह कुल केंद्र कर्मचारियों का, जो देश में सर्वाधिक।
- 85 लाख प्राइवेट संगठित क्षेत्र में कर्मचारी श्रम विभाग के अनुसार।
- 5.39 करोड़ हैं संगठित व असंगठित क्षेत्र की लेबर फोर्स, जिनमें 1.3 करोड़ महिलाएं।