प्रदेश को समय से नया डीजीपी मिलना मुश्किल, आज भेजा जाएगा वरिष्ठता के क्रम में 20 अफसरों को नया पैनल
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प्रदेश को नया डीजीपी समय से मिलना मुश्किल नजर आ रहा है। यूपीएससी को वरिष्ठता के क्रम में नए सिरे से सूची भेजी जा रही है। इसमें जिन आईपीएस अफसरों का 6 माह से अधिक का कार्यकाल बचा है और 30 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके हैं, वे सभी अफसर शामिल हैं। इनकी वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि लेकर ‘विशेष वाहक’ रविवार को दिल्ली रवाना होगा।
जानकारी के अनुसार नई सूची में यूपी में उपलब्ध अफसरों के साथ-साथ केंद्रीय प्रतिनियुक्ति वाले अफसरों के नाम भी शामिल किए गए हैं। पहले भेजी गई सूची वरिष्ठता के क्रम में नहीं थी, जिसके आधार पर 1986 बैच के आईपीएस जवाहर लाल त्रिपाठी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इस मामले में 27 जनवरी को सुनवाई होनी है।
जिन अफसरों की सूची भेजी जा रही है, उसमें 1984 बैच के आईपीएस एपी महेश्वरी का नाम पहले नंबर पर है जो केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर सीआरपीएफ में डीजी हैं। इसके बाद यूपी में विजिलेंस में तैनात 1985 बैच के हितेश चंद्र अवस्थी, केंद्र में आरपीएफ के डीजी अरुण कुमार, यूपी में नागरिक सुरक्षा के डीजी 1986 बैच के जेएल त्रिपाठी, सीआरपीएफ में एडीजी मो. जावेद अख्तर, बीएसएफ में स्पेशल डीजी नासिर कमाल, यूपी में डीजी सुजानवीर सिंह, केंद्र में बीएसएफ में एडीजी 1987 बैच के मुकुल गोयल, ईओडब्ल्यू में डीजी आरपी सिंह, डीजी रूल्स एंड मैनुअल विश्वजीत महापात्रा, मानवाधिकार आयोग में डीजी जीएल मीणा, भर्ती बोर्ड के डीजी 1988 बैच के आईपीएस राजकुमार विश्वकर्मा, हाल ही में प्रतिनियुक्ति से वापस आने वाले देवेंद्र सिंह चौहान, केंद्र में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में एडीजी अनिल अग्रवाल, यूपी में जेल विभाग के डीजी आनंद कुमार, डीजी कोऑपरेटिव सेल अशित कुमार पांडा, एडीजी पावर कॉर्पोरेशन कमल सक्सेना, एडीजी ट्रैफिक विजय कुमार, एडीजी पीटीसी बृज राज और 1989 बैच के आईपीएस और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर नेशनल इंटेलीजेंस ग्रिड में एडीजी के पद पर तैनात आशीष गुप्ता के नाम हैं।
... तो पहली फरवरी को मिलेगा कार्यवाहक डीजीपी
सूत्रों का कहना है कि नई सूची मिलने के बाद यूपीएससी बैठक करेगा, जिसमें एक सप्ताह तक का समय लग सकता है। मौजूदा डीजीपी ओमप्रकाश सिंह 31 जनवरी को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में पहली फरवरी को नया डीजीपी मिलना मुश्किल लग रहा है। अगर एक फरवरी को नए डीजीपी पर फैसला नहीं हुआ तो डीजी रैंक के किसी अफसर को कार्यवाहक डीजीपी की जिम्मेदारी दी जा सकती है।