वरिष्ट आईएएस देवेंद्र कार्यमुक्त, यूपी में मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
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केंद्र सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी देवेंद्र कुमार चौधरी को रिटायरमेंट के पांच महीने पहले अचानक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से यूपी के लिए कार्यमुक्त कर दिया। इससे सूबे की शीर्ष अफसरशाही में सरगर्मियां बढ़ गईं।
यूपी काडर के 1981 बैच के आईएएस अधिकारी देवेंद्र चौधरी केंद्र के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय में सचिव पशुपालन, डेयरी व मत्स्य के पद पर कार्यरत थे।
शनिवार को केंद्र सरकार ने उन्हें प्रतिनियुक्ति की समय सीमा पूरी होने से पहले ही प्रदेश की सेवा के लिए कार्यमुक्त कर दिया। चौधरी, मुख्य सचिव राजीव कुमार के ही बैच के हैं और वरिष्ठता में उनके बाद ही नंबर आता है।
ऐसे में यह सूचना फैलते ही अफसरशाही में चौधरी की भूमिका को लेकर अटकलबाजी शुरू हो गई। नए समीकरण बनने-बिगड़ने की आशंका में अफसरों के फोन घनघनाने लगे। हालांकि चौधरी के आने से अफसरशाही में किसी बड़े बदलाव की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है।
सूत्रों का कहना है कि वरिष्ठता की वजह से चौधरी को कृषि उत्पादन आयुक्त या अन्य कोई समकक्ष पद दिया जा सकता है। कृषि उत्पादन आयुक्त राजप्रताप सिंह 1983 बैच के आईएएस हैं और कृषि उत्पादन आयुक्त के अलावा बेसिक शिक्षा व भूतत्व खनिकर्म जैसे अहम महकमे उनके पास हैं।
इसके अलावा रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डवलपमेंट एक्ट केअंतर्गत गठित हो रहे प्राधिकरण (रेरा) के लिए भी उनका नाम चल रहा है। इतने महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए भी सिंह ने रेरा के लिए आवेदन किया है।
वर्तमान में रेरा के गठन की कार्यवाही भी अंतिम चरण में बताई जा रही है। ऐसे में यदि आने वाले दिनों में सिंह का चयन रेरा के लिए हो जाता है तो एपीसी की जिम्मेदारी चौधरी को मिल सकती है। अन्यथा अन्य किसी पद पर समायोजन होने की संभावना है।
चीफ सेक्रेटरी की दौड़ में होने की संभावना न के बराबर
पिछले काफी समय से मुख्य सचिव राजीव कुमार का नाम केंद्र सरकार में जून में रिक्त हो रहे कैबिनेट सचिव पद के लिए भी चल रहा है। इस पद के लिए गुजरात काडर के आईएएस अधिकारी व केंद्रीय वित्त सचिव हसमुख अढ़िया, यूपी काडर के आईएएस और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत अनिल स्वरूप तथा प्रदेश के मुख्य सचिव राजीव का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। ये तीनों ही अधिकारी 1981 बैच के हैं।
अनिल व राजीव का रिटायरमेंट जून में है, जबकि अढ़िया का रिटायरमेंट सितंबर में है। ऐसे में अढ़िया का नाम इस पद के लिए ज्यादा मजबूत माना जा रहा है। हालांकि तमाम समीकरणों की वजह से यूपी के इन दोनों अधिकारियों का नाम भी दावेदारों में बना हुआ है।
जानकार बताते हैं कि चूंकि कैबिनेट सचिव का पद जून में खाली हो रहा है, ऐसे में समीकरण पक्ष में बनने की दशा में भी मौजूदा मुख्य सचिव राजीव की इसके पहले लखनऊ से दिल्ली जाने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। ऐसे में मई में ही रिटायर हो रहे चौधरी के अचानक यूपी आने से मुख्य सचिव के पद को लेकर लगाई जा रही अटकलें बेमतलब हैं।