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Lucknow News: भारतीय ज्ञान परंपरा को खंडों में नहीं, समग्रता में देखने की जरूरत
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लखनऊ। विद्यांत हिंदू पीजी कॉलेज में भारतीय ज्ञान परंपरा पर सामाजिक विमर्श एवं समकालीन शिक्षा विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का गुरुवार को समापन हुआ। अंतिम दिन परिचर्चा में विशेषज्ञों ने भारतीय ज्ञान परंपरा को समग्रता में समझने और इसे आधुनिक शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की जरूरत बताई।
परिचर्चा में दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रो. सनत कुमार शर्मा, गोरखपुर विश्वविद्यालय की डॉ. मनीष पांडेय और बीबीएयू के प्रो. मनीष वर्मा ने विचार रखे। प्रो. बृजेंद्र पांडेय ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और पश्चिमी शिक्षा व्यवस्था की अवधारणाएं अलग हैं। औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलकर नई शिक्षा व्यवस्था में भारतीय ज्ञान परंपरा का समुचित उपयोग करना होगा।
प्रो. सनत कुमार शर्मा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन समेकित दृष्टि से ही संभव है। वहीं, डॉ. मनीष पांडेय ने समाजशास्त्र में धर्म, जाति, जनजाति और परंपराओं के अध्ययन के महत्व को रेखांकित किया। प्रो. मनीष वर्मा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्धि देश की सांस्कृतिक एकता के लिए महत्वपूर्ण है।
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कॉलेज की प्राचार्या प्रो. धर्म कौर ने कहा कि प्राचीन साहित्य में सामाजिक भेदभाव दूर करने के कई उदात्त विचार मौजूद हैं। इन्हें समाज में प्रसारित करने में उच्च शिक्षण संस्थानों की अहम भूमिका है। प्रो. नीतू सिंह ने कहा कि ज्ञान कोई ब्रांड नहीं, बल्कि निरंतर प्रवाह है। इस मौके पर प्रो. प्रमोद गुप्ता, प्रो. जया श्रीवास्तव और प्रबंधक पंकज भट्टाचार्य सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
परिचर्चा में दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रो. सनत कुमार शर्मा, गोरखपुर विश्वविद्यालय की डॉ. मनीष पांडेय और बीबीएयू के प्रो. मनीष वर्मा ने विचार रखे। प्रो. बृजेंद्र पांडेय ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और पश्चिमी शिक्षा व्यवस्था की अवधारणाएं अलग हैं। औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलकर नई शिक्षा व्यवस्था में भारतीय ज्ञान परंपरा का समुचित उपयोग करना होगा।
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प्रो. सनत कुमार शर्मा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन समेकित दृष्टि से ही संभव है। वहीं, डॉ. मनीष पांडेय ने समाजशास्त्र में धर्म, जाति, जनजाति और परंपराओं के अध्ययन के महत्व को रेखांकित किया। प्रो. मनीष वर्मा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्धि देश की सांस्कृतिक एकता के लिए महत्वपूर्ण है।
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कॉलेज की प्राचार्या प्रो. धर्म कौर ने कहा कि प्राचीन साहित्य में सामाजिक भेदभाव दूर करने के कई उदात्त विचार मौजूद हैं। इन्हें समाज में प्रसारित करने में उच्च शिक्षण संस्थानों की अहम भूमिका है। प्रो. नीतू सिंह ने कहा कि ज्ञान कोई ब्रांड नहीं, बल्कि निरंतर प्रवाह है। इस मौके पर प्रो. प्रमोद गुप्ता, प्रो. जया श्रीवास्तव और प्रबंधक पंकज भट्टाचार्य सहित अन्य लोग मौजूद रहे।