जेलों में बैठे माफिया अब नहीं कर सकेंगे खेल, रहेगी आला अफसरों की नजर
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जेलों में हाई फ्रीक्वेंसी के जैमर और सीसीटीवी कैमरे लगाने के बावजूद जेलकर्मियों की साठगांठ से सलाखों के पीछे से गिरोह चलाने वाले माफिया पर नकेल कसी जाएगी। इसके लिए प्रदेश की सभी जेलों के तीन-तीन सीसीटीवी कैमरों को इंटरनेट के जरिये जेल मुख्यालय से जोड़ा जा रहा है। आला अफसर अपने कंप्यूटर स्क्रीन के जरिये जेलों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे।
अपर पुलिस महानिदेशक कारागार चंद्र प्रकाश ने बताया कि प्रदेश की सभी 71 जेलों के प्रमुख स्थानों पर लगे तीन सीसीटीवी कैमरों को जेल मुख्यालय से जोड़ने की तैयारी है। मुख्यालय पर एक टीम सभी जेलों पर नजर रखेगी।
माफिया से नियमित रूप से मुलाकात करने वालों और कुख्यात अपराधियों को सुविधाएं मुहैया कराने वाले जेलकर्मियों का भी ब्योरा जुटाया जाएगा। बंदियों के फरार होने की संभावना वाले स्थानों को चिह्नित करने के साथ ही सीसीटीवी कैमरे और जैमर की स्थिति की समीक्षा कर पुख्ता सुरक्षा के इंतजाम कराए जा रहे हैं।
क्षमता से अधिक बंदी, कम कर्मचारी
चंद्र प्रकाश ने बताया कि प्रदेश की जेलों में 58 हजार की क्षमता के मुकाबले 98 हजार बंदी हैं। वहीं मानक से आधी संख्या में जेल अधिकारी व कर्मचारी तैनात हैं। मानक के अनुरूप तैनाती को लेकर शासन को पत्र लिखा गया है।
जेलों के सिक्योरिटी ऑडिट के लिए टीमें गठित
अपर पुलिस महानिदेशक ने बताया कि जेलों की सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी ऑडिट कराया जा रहा है। इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट द्वारा चयनित अपर जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक, जेल अधीक्षक या जेलर व अन्य अधिकारियों की टीम गठित की गई है।