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तड़पता रहा मरीज, ड्राइवर बोला दूसरी एम्बुलेंस से जाओ केजीएमयू
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Thu, 06 Apr 2017 03:50 PM IST
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तेलीबाग चौराहे पर खड़ी एंबुलेंस
- फोटो : amar ujala
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लखनऊ में वृंदावन के स्कोप अस्पताल की एंबुलेंस में केजीएमयू के लिए रेफर मरीज डेढ़ घंटे तक तड़पता रहा और ड्राइवर एंबुलेंस ले जाने को राजी नहीं हुआ। परिवारीजों के बार-बार मिन्नतें करने पर ड्राइवर ने दूसरी एंबुलेंस की व्यवस्था करने को कहा।
इसके बाद 108 से मरीज को केजीएमयू ले जाया गया। बताया जाता है कि मरीज का स्कोप हॉस्पिटल में इलाज नहीं हुआ था इसलिए उसके ड्राइवर को एंबुलेंस खाली करने को कहा गया। हालांकि अस्पताल संचालक ने इसके पीछे एंबुलेंस में तकनीक खराबी बताई।
वृंदावन सेक्टर निवासी राजेश तिवारी की मां कलावती (70) की तबीयत बुधवार सुबह छह बजे खराब हो गई। राजेश ने सेक्टर नौ स्थित स्कोप अस्पताल से एंबुलेंस मंगाई। उन्होंने बताया कि अटेंडेंट की मदद से कलावती को एंबुलेंस में शिफ्ट किया गया।
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इसके बाद 108 से मरीज को केजीएमयू ले जाया गया। बताया जाता है कि मरीज का स्कोप हॉस्पिटल में इलाज नहीं हुआ था इसलिए उसके ड्राइवर को एंबुलेंस खाली करने को कहा गया। हालांकि अस्पताल संचालक ने इसके पीछे एंबुलेंस में तकनीक खराबी बताई।
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वृंदावन सेक्टर निवासी राजेश तिवारी की मां कलावती (70) की तबीयत बुधवार सुबह छह बजे खराब हो गई। राजेश ने सेक्टर नौ स्थित स्कोप अस्पताल से एंबुलेंस मंगाई। उन्होंने बताया कि अटेंडेंट की मदद से कलावती को एंबुलेंस में शिफ्ट किया गया।
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दूसरी एंबुलेंस से पहुंचे अस्पताल
डेमो
- फोटो : अमर उजाला
रास्ते में कलावती की तबीयत गंभीर हो गई तो ड्राइवर को स्कोप की जगह केजीएमयू चलने के लिए कहा। सात बजे तेलीबाग चौराहे स्थित शनि मंदिर के पास ड्राइवर ने एंबुलेंस रोक दी।
उसने कहा कि अब दूसरी एंबुलेंस से जाओ। ड्राइवर ने कहा कि ‘हम मालिक के गुलाम हैं’ अपनी मनमर्जी से नहीं जा सकते। बेबस और लाचार परिवारीजनों ने 108 सेवा पर फोन किया तो 40 मिनट बाद एंबुलेंस पहुंची।
परिवारीजनों का आरोप था कि मरीज का अस्पताल में इलाज नहीं होने के कारण ड्राइवर को एंबुलेंस रोकने के लिए कहा गया था। इस मामले में स्कोप अस्पताल के संचालक अनुराग मिश्रा का कहना है कि एंबुलेंस में कुछ तकनीकी खराबी आ गई थी जिससे मरीज को बीच में छोड़ना पड़ा।
उसने कहा कि अब दूसरी एंबुलेंस से जाओ। ड्राइवर ने कहा कि ‘हम मालिक के गुलाम हैं’ अपनी मनमर्जी से नहीं जा सकते। बेबस और लाचार परिवारीजनों ने 108 सेवा पर फोन किया तो 40 मिनट बाद एंबुलेंस पहुंची।
परिवारीजनों का आरोप था कि मरीज का अस्पताल में इलाज नहीं होने के कारण ड्राइवर को एंबुलेंस रोकने के लिए कहा गया था। इस मामले में स्कोप अस्पताल के संचालक अनुराग मिश्रा का कहना है कि एंबुलेंस में कुछ तकनीकी खराबी आ गई थी जिससे मरीज को बीच में छोड़ना पड़ा।