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सीतापुर में मौत का पर्याय बने ये जंगली जानवर हैं या कुत्ते, रिसर्च कर रही टीम उलझी

Thu, 10 May 2018 10:55 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीतापुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीतापुर Updated Thu, 10 May 2018 10:55 PM IST
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scientists doing research on dogs who killed children in   sitapur.
गिरफ्तार किया गया कुत्ता व पगचिन्ह देखते विशेषज्ञ। - फोटो : amar ujala

मासूमों पर झुंड में हमलावर होने वाले कुत्तों का जैसा हुलिया और बर्ताव बताया जा रहा है, वह कुत्ते की शक्ल में दिखते जरूर हैं, लेकिन सामान्य तौर पर पाए जाने वाले आम कुत्तों जैसे नहीं हैं। झुंड में अचानक हमला करने वाले यह जानवर न तो कुत्तों की तरह भौंकते हैं, न ही किसी को सामने देखकर गुर्राते हैं। बस, अचानक आकर हमला कर देते हैं और दांतों से मांस नोचने लगते हैं। आईवीआरआई वैज्ञानिकों की टीम खैराबाद से लौटने के बाद इस पर मंथन में जुटी हैं कि आखिर ग्रामीणों पर हमलावर होने वाले कुत्ते की शक्ल में ये कौन से जानवर हैं।

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सीतापुर के खैराबाद के गांव रहीमपुर, कुलिया, बद्रीखेड़ा, गुरपलिया समेत कई गांवों में कुत्ते जैसे दिखने वाले जानवर झुंड में आकर बच्चों पर हमला कर उनको मौत के घाट उतार रहे हैं। छह माह में इन गांवों में कई बच्चों की मौत हो चुकी है और कई दर्जन घायल हो चुके हैं। आईवीआरआई वैज्ञानिकों की टीम ने डॉ. दिनेश चंद्रा के नेतृत्व में अध्ययन करने के लिए खैराबाद के इन गांवों का भ्रमण किया। अब टीम खैराबाद से बरेली आ गई है और इन जानवरों के अचानक हमलावर होने के स्वभाव का मंथन कर रही है।
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भ्रमण के दौरान एक ग्रामीण ने वैज्ञानिकों को बताया कि जब वह खेत में काम कर रहा था, तभी अचानक कुत्तों का झुंड आ गया। न वह भौंके, न ही गुर्राए। बस जमीन सूंघकर सीधे हमलावर हो गए। ग्रामीण पेड़ पर चढ़ गया, तब जाकर उसकी जान बची। वैज्ञानिकों का मानना है कि कुत्ते हाथ या पैर में काटते हैं, लेकिन इन जानवरों ने ज्यादातर गले पर हमला किया है। यह जानवर झुंड में आते हैं, जबकि सामान्य तौर पर पाए जाने वाले कुत्तों की यह आदत नहीं होती। यहां 100 से ज्यादा कुत्तों को मौत के घाट उतारा गया लेकिन किसी का पोस्टमार्टम नहीं कराया।

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नित्यक्रिया करने गई बच्ची पर बोला हमला, बुरी तरह घायल

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कुत्तों के हमले में घायल बच्ची। - फोटो : amar ujala

वहीं, सीतापुर जिले के खैराबाद क्षेत्र में आदमखोर कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार की सुबह एक बार फिर से आदमखोर कुत्तों ने एक बालिका पर हमला बोल दिया। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत से लाठी-डंडों से कुत्तों को खदेड़ा, तब तक बालिका गंभीर रूप से घायल हो चुकी थी।

घायल बालिका को नाजुक हालत में ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर किया गया है। इसी इलाके में कुत्तों ने एक नीलगाय पर भी हमला कर जख्मी कर दिया। घटना के बाद से जिम्मेदार टीमें जांच में जुटी हुई हैं। इस घटना से क्षेत्र के बाशिंदों में दहशत और बढ़ गई है।

खैराबाद के ग्राम भगौतीपुर निवासी अशोक कुमार की पुत्री संगीता देवी (8) गुरुवार की सुबह नित्यक्रिया के लिए गांव के बाहर खेतों की तरफ गई थी। बताते हैं कि बालिका जैसे ही गांव के बाहर पहुंची आदमखोर कुत्तों के झुंड ने उसे घेर लिया। इससे पहले कि बालिका कुछ समझ पाती कुत्तों ने बालिका पर हमला बोल दिया। बालिका की चीख सुनकर करीब के खेत में काम कर रहा गया प्रसाद फावड़ा लेकर शोर मचाते हुए घटनास्थल की तरफ दौड़ पड़ा। गया प्रसाद की आवाज सुनकर गांव के लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे। जिन्होंने लाठी-डंडों की मदद से कुत्तों को खदेड़ा। लेकिन तब तक संगीता बुरी तरह से जख्मी हो चुकी थी।

परिवार के सदस्यों ने आननफानन घायल बालिका को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। यहां पर डॉक्टरों ने घायल की हालत नाजुक देख उसे ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया। वहां पर बालिका की हालत चिंताजनक बताई जा रही है। घटना के बाद पुलिस, प्रशासन, पशु चिकित्सा विभाग की टीमें गांव पहुंची और जांच में जुट गईं। यहां पर बता दें कि आदमखोरों कुत्तों के हमले से घायल होने वालों में संगीता 26 वां शिकार है, जो घायल है। जबकि 12 बच्चों को ये आदमखोर कुत्ते अपना निवाला बना चुके हैं।

एक पल भी न टिक पाया पालतू कुत्ता

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बताते हैं कि जब आदमखोर कुत्तों ने संगीता पर हमला बोला, तब ग्रामीणों के शोर मचाते ही पालतू कुत्ता वहां पहुंच गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि गांव के पालतू कुत्ते ने जैसे ही मोर्चा संभाला आदमखोर कुत्तों ने उनके ऊपर हमला बोल दिया। हालत यह रही कि एक पल में ही गांव का पालतू कुत्ता चित हो गया। जो मौके से गांव भाग आया।

बेहद तेज हैं आदमखोर
खैराबाद के भगौतीपुर निवासी गया प्रसाद ने बताया कि संगीता पर जिस दौरान आदमखोर कुत्तों के झुंड ने हमला बोला। उस दौरान वह घटनास्थल से कुछ ही दूरी पर मौजूद था। गया ने बताया कि उसे घटनास्थल पर पहुंचने में थोड़ा ही वक्त लगा होगा, लेकिन तब तक कुत्ते बालिका को बुरी तरह से जख्मी कर चुके थे। हालत यह भी बच्ची के पेट से आंत भी बाहर आ गई थी। गांव के लोग जब तक आदमखोरों कुत्तों की घेराबंदी करते, तब तक वे वहां से निकल भागे।

पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने जांचे पंजों के निशान

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आदमखोर कुत्तों के पगचिह्न - फोटो : amar ujala

भगौतीपुर गांव में कुत्तों के हमले की सूचना मिलने के बाद पशु चिकित्सा विभाग की टीम भगौतीपुर पहुंची। टीम में शामिल डॉ. बीआर पाटिल व डॉ. शशि विक्रम ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और घटना के संबंध में जानकारी ली। जिसके बाद टीम के सदस्य प्रत्यक्षदर्शियों से मिले।

घटनास्थल पर पहुंचकर आदमखोर कुत्तों के फुट प्रिंट देखे। करीब के एक मेंथा के खेत में जमीन नम होने की वजह से कुत्तों के पंजों के निशान साफ नजर आ रहे थे। इन निशानों को टीम के सदस्यों ने जांचा परखा और उसके प्रिंट अपने कैमरे में कैद किए।

इस दौरान डॉ. शशि विक्रम ने बताया कि पंजों के निशान की जांच की जा रही है। देखने में ये निशान कुत्तों आम कुत्तों के पंजों से अलग लग रहे हैं, लेकिन अभी जांच के पहले कुछ कह पाना मुश्किल होगा। फुट प्रिंट को लैब भेजा जा रहा है। जांच के बाद ही कुछ स्पष्ट हो सकेगा।

डीएम ने अधिकारियों संग बैठक कर बनाई रणनीति

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पड़ताल करते लखनऊ व बरेली के एक्सपर्ट। - फोटो : amar ujala

आदमखोर कुत्तों को लेकर गुरुवार को डीएम ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान डीएम ने आपस में चर्चा करते हुए कहा कि पहले आदमखोर कुत्तों ने हमला किया तो उन्हें अधिकारियों व टीम के माध्यम से पकड़ा कर लखनऊ भेजा गया। उसके बाद भी कुत्ते लगातार हमला करते जा रहे हैं।

गुरुवार को हुए हमले को लेकर डीएम ने चिंता जताते हुए बताया कि अब इन कुत्तों के बारे में एक्सपर्ट से वार्ता की जाएगी और पूछा जाएगा कि आखिरकार कुत्तों के व्यवहार में ऐसा बर्ताव क्यों आ रहा है। जिसके चलते यह लगातार घटनाओं को अंजाम देते जा रहे हैं।

डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह सुबह-शाम क्षेत्र में जाकर कॉम्बिंग करें और ग्रामीणों की हरसंभव बात करें। इस बैठक में सिटी मजिस्ट्रेट हर्ष देव पांडेय, सीओ सिटी योगेंद्र सिंह सहित वन्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

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