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UP News : पेट्रोल पंपों पर फिर शुरू हो गई घपलेबाजी, अतिरिक्त मदरबोर्ड लगाकर जालसाज कर रहे हैं गोलमाल

Mon, 07 Nov 2022 02:47 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव सैयद यासिर रजा, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
सैयद यासिर रजा, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Mon, 07 Nov 2022 02:47 AM IST
सार

मई 2017 में एसटीएफ ने पेट्रोल चोरी के बड़े मामले का पर्दाफाश किया था। एसटीएफ ने लखनऊ में छापा मारकर 33 पेट्रोल पंप पर तेल की चोरी पकड़ी थी। हैकरों ने अपना दिमाग लगाया और कबाड़ियों से मशीन का मदर बोर्ड खरीदा और फिर उसी मदर बोर्ड को नई मशीन के साथ जोड़ कर घपलेबाजी करने लगे।

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Scam started again at petrol pumps, fraudsters are committing scams by installing extra motherboards
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

पेट्रोल पंपों पर जालसाजों ने फिर से घपलेबाजी शुरू कर दी है। मशीन में चिप के जरिए रिमोट से चोरी रोकी गई तो अब अतिरिक्त मदर बोर्ड लगाकर नए सिरे से चोरी शुरू कर दी गई है। पश्चिमी यूपी के शामली व बागपत जिले के कई पेट्रोल पंपों पर मदर बोर्ड लगाकर घपलेबाजी का मामला सामने आने के बाद जांच एजेंसियां चौकन्नी हो गई हैं। वहीं, पेट्रोल पंपों पर मशीन बनाने वाली कंपनियों पर सवाल उठ रहे हैं। एसटीएफ के इस खुलासे के बाद प्रदेश भर के पेट्रोल पंप फिर शक के दायरे में आ गए हैं।

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मई 2017 में एसटीएफ ने पेट्रोल चोरी के बड़े मामले का पर्दाफाश किया था। एसटीएफ ने लखनऊ में छापा मारकर 33 पेट्रोल पंप पर तेल की चोरी पकड़ी थी। तेल कंपनियों के अधिकारियों और प्रशासनिक अफसरों के साथ हुई बैठक में तय किया गया था कि मशीन के जिस पल्सर में टेंपरिंग कर तेल चोरी की जा रही थी उन तमाम मशीनों के मदर बोर्ड को बदलकर पॉकेट पल्सर लगाए जाएंगे। पल्सर खराब होने पर उन्हें बदला जाएगा, रिपेयर नहीं किया जा सकेगा। प्रदेश के लगभग साढ़े सात हजार पेट्रोल पंपों की जांच की जिम्मेदारी जिलों के अफसरों को सौंप दी गई। मशीन बनाने वाली कंपनियों ने अभियान चलाकर सभी मशीनों को या तो अपग्रेड कर दिया या फिर बदल दिया और पुरानी मशीनों को कबाड़ में दे दिया। यहीं से हैकरों ने अपना दिमाग लगाया और कबाड़ियों से मशीन का मदर बोर्ड खरीदा और फिर उसी मदर बोर्ड को नई मशीन के साथ जोड़ कर घपलेबाजी करने लगे।
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एक लीटर पेट्रोल में मिला रहे 30 प्रतिशत केमिकल
पश्चिमी यूपी में इस ऑपरेशन को अंजाम देने वाले एसटीएफ के एसपी कुलदीप नारायण बताते हैं कि मशीन में अतिरिक्त मदरबोर्ड लगाकर स्टॉक की फर्जी मॉनिटरिंग दिखाई की जा रही थी ताकि जांच करने आने वाले अधिकारियों को गुमराह किया जा सके। इन पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल में केमिकल (साल्वेंट) मिलाने का भी मामला सामने आया है। पेट्रोल पंप मालिक एक लीटर पेट्रोल में 300 मिलीलीटर तक साल्वेंट मिलाते थे। बाजार में साल्वेंट 30 रुपये प्रति लीटर उपलब्ध है। ऐसे में पेट्रोल पंप संचालक इस घपलेबाजी से प्रति लीटर 20 रुपये तक की चोरी कर रहे थे।
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एसटीएफ की मुस्तैदी से सतर्क हुए तेल के चोर
कुलदीप नारायण बताते हैं कि यह खेल कितनी मशीनों पर चल रहा था यह कहना मुश्किल है। लेकिन इस ऑपरेशन की जानकारी जैसे ही फैली बाकी पेट्रोल पंप संचालकों ने मशीनों से अतिरिक्त मदर बोर्ड हटा लिया। सूत्रों का कहना है कि पश्चिमी यूपी में बड़े पैमाने पर पेट्रोल की चोरी की जा रही है। पंप संचालकों के इस खेल में अधिकारी भी लाभ उठा रहे थे। हर किसी का हर पेट्रोल पंप से उनका हिस्सा मिल रहा था, इस लिए वे चुप थे।


फिर सामने आया गिलबारको कंपनी का नाम
गिलबारको पेट्रोल पंप मशीन बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। इस कंपनी की मशीनों में सबसे आसानी से हेराफेरी की जा सकती है। इसका खुलासा 2017 में भी हुआ था। इसके बाद गिलबारको ने पुरानी मशीनों के स्थान पर नई मशीनें लगा दी थीं और दावा किया था कि इन मशीनों से छेड़छाड़ नहीं हो सकती है। लेकिन पश्चिमी यूपी में मामला सामने आने के बाद गिल बारको कंपनी पर फिर से सवाल उठने लगे हैं।

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