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Lucknow News: वैदिक, पुराण व ज्योतिष कोर्स की संस्कृत विश्वविद्यालय देगा मान्यता
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लखनऊ। उन संस्कृत कॉलेजों को अब बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें वैदिक, पुराण व ज्योतिष से जुड़े कोर्स शुरू करने के लिए किसी विश्वविद्यालय से मान्यता नहीं मिल रही है। अब केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने मान्यता देने की व्यवस्था शुरू की है।
राजधानी सहित देशभर के किसी भी संस्कृत महाविद्यालय को मान्यता मिल सकती है, लेकिन इसके लिए विश्वविद्यालय के मानकों पर खरा उतरना होगा। इस संबंध में विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जानकारी अपडेट की गई है।
राजधानी में अभी तक राज्य विश्वविद्यालयों से ही मान्यता मिलती थी, लेकिन अब पहली बार संस्कृत महाविद्यालयों को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय से भी मान्यता मिल सकेगी। विवि के अनुसार, संस्थान को विश्वविद्यालय के मानक के आधार पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसमें कोर्स, भवन निर्माण, शिक्षकों की संख्या व अन्य जानकारियां अपडेट करना जरूरी होगा। आवेदन की पहले केंद्रीय और फिर डीन स्तर पर जांच होगी। मानक पर सही पाए जाने पर दो महीने में मान्यता मिल जाएगा।
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केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. सर्व नारायण झा ने बताया कि विवि से न केवल राजधानी व प्रदेश, बल्कि देशभर के किसी भी संस्कृत महाविद्यालय को मान्यता दी जा सकेगी। हालांकि, इसके लिए आवेदनों का मानक पर होना जरूरी है। महाविद्यालय में संचालित होने वाले कोर्सों में व्याकरण, संस्कृत साहित्य, वेद पौरोहित्य कर्मकांड, फलित ज्योतिष सिद्धांत व ज्योतिष शामिल है।
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राजधानी सहित देशभर के किसी भी संस्कृत महाविद्यालय को मान्यता मिल सकती है, लेकिन इसके लिए विश्वविद्यालय के मानकों पर खरा उतरना होगा। इस संबंध में विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जानकारी अपडेट की गई है।
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राजधानी में अभी तक राज्य विश्वविद्यालयों से ही मान्यता मिलती थी, लेकिन अब पहली बार संस्कृत महाविद्यालयों को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय से भी मान्यता मिल सकेगी। विवि के अनुसार, संस्थान को विश्वविद्यालय के मानक के आधार पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसमें कोर्स, भवन निर्माण, शिक्षकों की संख्या व अन्य जानकारियां अपडेट करना जरूरी होगा। आवेदन की पहले केंद्रीय और फिर डीन स्तर पर जांच होगी। मानक पर सही पाए जाने पर दो महीने में मान्यता मिल जाएगा।
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केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. सर्व नारायण झा ने बताया कि विवि से न केवल राजधानी व प्रदेश, बल्कि देशभर के किसी भी संस्कृत महाविद्यालय को मान्यता दी जा सकेगी। हालांकि, इसके लिए आवेदनों का मानक पर होना जरूरी है। महाविद्यालय में संचालित होने वाले कोर्सों में व्याकरण, संस्कृत साहित्य, वेद पौरोहित्य कर्मकांड, फलित ज्योतिष सिद्धांत व ज्योतिष शामिल है।