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सरकार दुर्बल हो सकती है, समाज नहीं: संघ

Wed, 21 Aug 2013 02:02 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो/इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/ब्यूरो/इंटरनेट डेस्क Updated Wed, 21 Aug 2013 02:02 AM IST
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sangh spok on government

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा है कि देश में परिवर्तन और स्थितियों के कायाकल्प का यही सही वक्त है। इसके लिए सभी को आगे आना होगा।

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उन्होंने राजनीतिक दलों का नाम लिए बगैर उन पर प्रहार भी किया। केंद्र सरकार को भी निशाना बनाया। कहा, जो सरकार चीन-पाकिस्तान से डरती हो वह देश व समाज की सुरक्षा कर ही नहीं सकती।
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देश की विविधता को जातिवाद का नाम देकर राजनीतिक स्वार्थ की रोटियां सेंकने वालों से भी यह काम नहीं हो सकता। इन्हें कमजोर न किया गया तो समाज में व सीमाओं में खतरा बढ़ेगा।
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होसबोले मंगलवार शाम यहां निरालानगर सरस्वती शिशु मंदिर में रक्षाबंधन की पूर्वसंध्या पर लोगों को संबोधित कर रहे थे।

सह सरकार्यवाह ने कहा कि समाज ऐसी स्थितियां पैदा करने वालों को सबक सिखाने के लिए गंभीरता से सोच रहा है। विशेष तौर से युवा बहुत गंभीर है। उसके अंदर बदलाव की छटपटाहट है।

इस छटपटाहट को और बढ़ाना होगा। समाज में जन्म ले रही बदलाव की इस चेतना को और जगाना होगा।

गांव-गांव जाकर लोगों को देश को दांव पर लगाने व समाज को बांटने वालों की असलियत बतानी होगी। दिल्ली में बैठे कमजोर लोगों ने देश को तमाम तरह के खतरे खड़े कर दिए हैं। समाज को यह समझाना होगा।

सरकार दुर्बल हो सकती है, समाज नहीं
होसबोले ने कहा कि समाज को भी दिल्ली में बैठे लोगों, राजनीतिक दलों व सरकार चलाने वालों को बताना होगा कि सरकार दुर्बल हो सकती है, समाज नहीं।

इस रक्षाबंधन पर देश के लोगों को समाज व देश की रक्षा के लिए सक्रिय होने का संकल्प लेना होगा। समझना होगा कि भाषा व जाति के नाम पर राजनीति करने वाले हमें कमजोर कर रहे हैं।

कोई महाराष्ट्र में खड़ा होकर कहता है कि बिहार को नहीं रहने देना है, तो कोई कहता है कि अमुक-अमुक जाति की अनेदखी हुई है। ऐसा करने व बोलने वाले देश के हितैषी नहीं हैं। जो देश की बात करते हों, उन्हें मजबूत बनाना होगा।

यह हाल है हमारी सरकार का
पाकिस्तान की सेना ने हमारे पांच सैनिकों की हत्या नहीं की है बल्कि हमारे देश की हत्या की है। फिर भी हमारी सरकार के लोग ही सफाई देने लगे कि सैनिकों ने नहीं बल्कि आतंकवादियों ने हत्या की है।

सही बात स्वीकारने में चार दिन लग गए। चीन हमारी सीमाओं में घुसता चला आया। लद्दाख में नियंत्रण रेखा से काफी आगे आकर उसने सिंधु नदी तक अपना हक जता दिया। निर्माण चल रहे हैं।


पर सरकार मौन साधे बैठी है। लद्दाख में सीमा के पास रहने वाले गरीब नागरिक पीछे नहीं हटना चाहते लेकिन सरकार और उसके अधिकारी उनका मनोबल तोड़ रहे हैं।

अरुणाचल में चीन ने काफी अंदर तक सड़क बना ली है। जिस बांग्लादेश को हमने (भारत) दाई बनकर जन्म दिया। उनके खाने-पीने का इंतजाम किया। वह हमें ही आंख दिखाने का दुस्साहस कर रहा है।

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