संभल न्यायिक जांच रिपोर्ट: दंगों-सुनियोजित राजनीति की वजह से बदला आबादी अनुपात, इसलिये घटी हिंदू आबादी
Sambhal population dispute: इस रिपोर्ट में संभल में कई आतंकी संगठनों के सक्रिय होने का जिक्र भी किया गया है। खासकर लाना आसिम उर्फ सना-उल-हक का उल्लेख किया गया है
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देश की आजादी के बाद संभल की डेमोग्राफी सुनियोजित दंगों और तुष्टीकरण की राजनीति की वजह से बदलती गई। आजादी के दौरान संभल नगर पालिका में 45 प्रतिशत हिंदू आबादी थी, जो वर्तमान में घटकर महज 15 फीसद रह गई है। यह बदलाव लगातार हिंसा की वजह से पलायन और हिंदुओं के कत्लेआम की वजह से हुआ, जिसका न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में विस्तार से उल्लेख किया गया है।
संभल हिंसा की जांच करने वाले न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जब तक संभल में हिंदुओं की आबादी 40 फीसद के ऊपर रही, तब तक दंगा, लव जिहाद और धर्मांतरण के जरिए उसको कम किया जाता रहा। तब तक संभल में हिंदू-मुस्लिम के बीच संघर्ष होता रहा। जैसे ही हिंदुओं की आबादी 20 फीसद से कम हुई, यह संघर्ष विदेशी बनाम देसी मुसलमान का हो गया। संभल में तुर्क और कंवर्टेड हिंदू पठान आपस में लड़ने लगे।
बीती 24 नवंबर को भड़की हिंसा की पृष्ठभूमि कई वर्षों से पनपते इसी तनाव में छिपी थी। रिपोर्ट में संभल में बीते सात दशक के दौरान हुए 15 दंगों, उनमें हुए नुकसान और टकराव की वजहों का जिक्र भी किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक संभल में 1936 से 2019 तक 15 दंगे हुए, जिनमें 213 मौतें हुईं। इनमें 209 हिंदुओं की हत्या हुई थी। 1978 में होली के बाद 184 हिंदुओं का नरसंहार हुआ था, जबकि किसी भी मुस्लिम की मृत्यु नहीं हुई थी। सभी दंगों और उपद्रव में कुल मिलाकर सिर्फ चार मुस्लिमों की मौत की जानकारी दस्तावेजों की पड़ताल में आयोग को मिली, जिनमें दो मौतें 1992 के अयोध्या में विवादित ढ़ांचे के विध्वंस के बाद भड़के दंगे और दो लोगों की मौत वर्ष 2019 में सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में हुई थी।
धार्मिक स्थल भी निशाने परसंभल में हिंदुओं को निशाना बनाने के साथ धार्मिक स्थलों का अस्तित्व भी खत्म किया जाता रहा। संभल में 68 तीर्थ स्थल और 19 पावन कूप थे, जिन पर कालांतर में तुष्टीकरण की राजनीति की वजह से कब्जा कर लिया गया। प्रदेश सरकार ने 30 मई 2025 को इन कूपों का पुनरुद्धार किया है। इसके अलावा हरिहर मंदिर का उल्लेख भी किया गया है, जहां बाबर काल के साक्ष्य मिलने का जिक्र है।
आतंकी संगठनों का भी जिक्र
सीएम ने दिया कार्रवाई का निर्देश
रिपोर्ट में शासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं, साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक सीएम योगी ने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
सदन में पेश होगी रिपोर्ट
प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद ने बताया कि न्यायिक जांच आयोग ने अपनी गोपनीय रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी है, जिसका अध्ययन किया जाएगा। रिपोर्ट को सदन में पेश करने के लिए कैबिनेट से मंजूरी भी ली जाएगी।