यूपी के मुस्लिमों को लुभाने के लिए सपा सरकार खेलेगी ये दांव
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सपा सरकार 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम कार्ड खेलने की तैयारी में है। वह सूबे में मुसलमानों की दशा सुधारने के लिए विधानसभा में संकल्प पेश करने जा रही है। यह संकल्प सच्चर कमेटी की सिफारिशों को लागू करने के लिए लाया जाएगा। इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं।
संकल्प को अंतिम रूप देने के लिए संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग मिलकर जुटे हैं।दरअसल,सच्चर कमेटी ने अल्पसंख्यकों की सामाजिक व आर्थिक दशा को दयनीय बताते हुए कहा था कि देश में कई इलाके ऐसे हैं जहां अल्पसंख्यकों के हालात अनुसूचित जाति व जनजाति से भी बदतर हैं।
कमेटी ने इनकी स्थिति में सुधार के लिए कई अहम सुझाव दिए थे। लेकिन इन सिफारिशों को लागू करने को लेकर राजनीति होती रही है।समिति की रिपोर्ट के अनुसार 6 से 14 वर्ष की आयु के एक चौथाई मुस्लिम बच्चे या तो कभी स्कूल नहीं गए या उन्होंने बीच में ही स्कूल छोड़ दिया।
केवल 50 प्रतिशत मुस्लिम बच्चे ही मिडिल स्कूल की पढ़ाई पूरी करते हैं। मुस्लिम लड़कियों में शिक्षा की दशा और भी खराब है। इन सबको देखते हुए प्रदेश सरकार अब विधानसभा में अल्पसंख्यकों की स्थिति में सुधार के लिए एक संकल्प लाने जा रही है।
संसदीय कार्य विभाग के साथ ही अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारी भी इस काम में लगे हुए हैं। ये दोनों विभाग कैबिनेट मंत्री आजम खां के पास हैं। विभागीय अधिकारी इस मसले पर कई चरणों की बैठक कर चुके हैं।
शीघ्र ही संकल्प को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। इसमें कई ऐसे भी मसले हैं जिन्हें केंद्र सरकार को पूरा करना है। लेकिन प्रदेश सरकार चुनाव से पहले इसे विधानसभा में पेश कर यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि वह अल्पसंख्यकों की सबसे हितैषी पार्टी है।
संकल्प में होंगे ये खास मुद्दे
मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में विद्यालयी शिक्षा पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। मुस्लिम लड़कियों खासकर कक्षा नौ से 12 तक के लिए अलग स्कूल खोले जाएं। इन स्कूलों में अधिक से अधिक महिला शिक्षिकाओं की नियुक्ति की जाए। जहां उर्दू बोलने वाली आबादी रहती है वहां प्रारंभिक शिक्षा भी उर्दू में दी जाए।
आईटीआई में दाखिले के लिए शैक्षिक योग्यता 10वीं से घटाकर 7वीं की जाए क्योंकि अधिकतर मुस्लिम लड़के व लड़कियां या तो 10वीं में फेल हो जाते हैं या पहले ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। मुस्लिम आबादी वाले स्थानों में अधिक से अधिक आईटीआई संस्थान खोले जाएं। मदरसा में पढ़ने वाले बच्चों को भी आईटीआई में दाखिला दिया जाए
अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को छात्रावास की सुविधा दी जाए। सहायक शिक्षक के रूप में मुस्लिम शिक्षकों की भागीदारी बढ़ाई जाए। मदरसों के प्रमाण पत्रों को बराबरी का दर्जा देने के लिए नियम बनाए जाएं।
बैंक प्राथमिकता के आधार पर मुस्लिमों को कर्ज उपलब्ध कराएंगे। सरकारी नौकरियों में मुसलमानों की भागीदारी बढ़ाने के लिए बोर्ड या पैनल के साक्षात्कार में मुस्लिम विशेषज्ञ जरूर रखे जाएं।मुस्लिम आबादी वाले जनपदों,तहसीलों व विकास खंडों के लिए एक विशेष सहायता पैकेज तत्काल दिया जाए।
मुस्लिम बहुल इलाकों के थानों,स्वास्थ्य केंद्रों और शैक्षणिक संस्थाओं में मुसलमान अधिकारियों व कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए।केंद्र सरकार एससी-एसटी की तरह अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए योजनाएं शुरू करे।अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों की संसदीय व विधानसभा सीटों को भी आरक्षित किया जाए। इनकी सीटें एससी-एसटी में आरक्षित न की जाएं।