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यूपी चुनाव के लिए 23 मार्च से साइकिल यात्रा शुरू करेगी सपा, हर महीने 22 को होंगे धरना प्रदर्शन

Sun, 15 Mar 2020 08:01 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 15 Mar 2020 08:01 PM IST
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Samajwadi Party National Executive Meet in Lucknow.
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (मध्य में) - फोटो : amar ujala

समाजवादी पार्टी ने यूपी के विधानसभा चुनाव 2022 के लिए सड़कों पर उतरने का एलान कर दिया है। सपा 23 मार्च को डॉ. लोहिया की जयंती पर सभी जिलों में साइकिल यात्राएं निकालेगी और अगले महीने से हर 22 तारीख को तहसीलों पर धरना या साइकिल यात्राओं का आयोजन करेगी।

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सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि 2022 में 22 मुद्दों को लेकर हर माह की 22 तारीख को धरने में बड़े नेता शामिल होंगे। इस कार्ययोजना पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की अध्यक्षता में शनिवार को सपा कार्यालय में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मुहर लगा दी गई।
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समाजवादी पार्टी की शनिवार को हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भाजपा व केंद्र सरकार पर तीखे हमले करने के साथ ही यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटने का आह्वान किया गया। जनगणना में सभी जातियों की गणना कराकर जनसंख्या के अनुपात में भागीदारी देने की मांग की गई। राजनीतिक-आर्थिक प्रस्ताव में कहा गया है कि केंद्र सरकार विपक्षी नेताओं को डराने, धमकाने के लिए आयकर, ईडी और सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है। सरकार की सनक के आगे विधायिका और न्यायपालिका लाचार नजर आ रही हैं।
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सपा मुख्यालय में हुई बैठक की अध्यक्षता करते हुए पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 2022 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अभी से जुटने और सपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का आह्वान किया। कहा कि तीन साल में प्रदेश सरकार और 6 साल में केंद्र सरकार ने नफरत बढ़ाने के अलावा कोई काम नहीं किया। भाजपा सरकारें ध्यान भटकाने में माहिर हैं। उन्हें गांव, गरीब, किसान और युवाओं से कोई लेना-देना नहीं है। करीब साढ़े तीन घंटे चली बैठक में प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने राजनीतिक एवं आर्थिक प्रस्ताव पेश किया। इस पर करीब 15 नेताओं ने अपनी राय रखी।

देश के हालात 1992 में सपा के स्थापना काल से भी भयावह हैं

बैठक के बाद राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरमनय नंदा ने मीडिया को बताया कि देश के हालात 1992 में सपा के स्थापना काल से भी भयावह हैं। कार्यपालिका ने लगभग सारे अधिकार अपने हाथ में ले लिए हैं। न्यायपालिका को प्रभावशून्य करने और विधायिका को अपंग करने का काम पूरा कर लिया गया। केंद्र की भाजपा सरकार का लक्ष्य किसी न किसी तरीके से सत्ता में बने रहना और सत्ता हासिल करना रह गया है।

पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई सरकार देशवासियों को लाचार और मजबूर बनाकर अपनी ताकत बढ़ाने में लग गई है। वह सिर्फ पड़ोसी पाकिस्तान के प्रति युद्ध के उन्माद का माहौल बनाकर जनता के प्रति जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रही है। संविधान के धर्मनिरपेक्ष ढांचे को तहस-नहस करने में लगी हुई है। जो व्यक्ति सरकार की मुखालफत करे, उसे देशद्रोही घोषित कर दिया जाता है। वोट के लिए दंगे कराना, असांविधानिक कानून बनाना भारत की एकता और अखंडता के लिए खतरे की घंटी के समान है।

85 फीसदी आबादी से सामाजिक अन्याय
सपा कार्यकारिणी ने प्रस्ताव में कहा है कि देश में नौकरियों की आरक्षण नीति के आधार पर 85 प्रतिशत आबादी को 50 प्रतिशत और 15 फीसदी आबादी को 50 प्रतिशत भागीदारी पाने का अधिकार है। यह सरासर सामाजिक अन्याय है। जनगणना के आंकड़े एकत्र करने केलिए बनाए गए प्रारूप में सभी जातियों की जानकारी प्राप्त करने का कॉलम नहीं है। सपा ने जातियों की गणना कराने की मांग की है।

सीएए, एनपीआर, एनआरसी से देश में बेचैनी

सपा ने कहा है कि सीएए, एनआरसी और एनपीआर की वजह से पूरे देश में बेचैनी है। इनसे पूरी दुनिया में सरकार की बदनामी हो रही है। दिल्ली में जो कुछ हुआ, वह गुजरात दंगों की याद दिलाता है। दिल्ली में दंगे के लिए उकसाने वालों के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट के एक जज ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए तो आधी रात उनका तबादला कर दिया गया।

सीमाएं सिकुड़ रहीं, बेरोजगारी चरम पर
सपा ने कहा है कि देश की सीमाएं सिकुड़ रही हैं। आजादी के समय भारत का जितना क्षेत्रफल था, उसमें लाखों वर्गमीटर की कमी आई है। चीन और पाकिस्तान के कब्जे में भारत का बड़ा क्षेत्रफल है। सरकार इसे वापस लेने का प्रयास नहीं कर रही। देश में बेरोजगारी चरम पर पहुंच गई है। आउटसोर्सिंग से अस्थायी भर्तियां की जा रही हैं।
 

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