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घोसी उपचुनाव: मतदाताओं को साधने को लगाए गए नजदीकी क्षेत्रों के सजातीय नेता, सपा की भाजपा के असंतुष्टों पर नजर
Sun, 20 Aug 2023 10:01 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 20 Aug 2023 10:01 AM IST
सार
विधानसभा के घोसी उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी दारा सिंह चौहान और सपा प्रत्याशी सुधाकर सिंह ही मुख्य लड़ाई में माने जा रहे हैं। सपा इस चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करके लोकसभा चुनाव से पहले अपनी मजबूती का संदेश देना चाहती है।
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समाजवादी पार्टी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
विधानसभा के घोसी उपचुनाव में सपा ने मतदाताओं को साधने के लिए खास रणनीति बनाई है। इसके तहत आसपास के जिलों के सजातीय नेताओं को भी अपने-अपने वर्ग को साधने की जिम्मेदारी दी जा रही है। साथ ही भाजपा के असंतुष्टों पर भी सपा नेतृत्व की खास नजर है, ताकि मुकाम हासिल करने में उनकी भी मदद ली जा सके।
पूर्व मंत्री दारा सिंह चौहान के सपा छोड़ भाजपा में जाने से इस सीट पर उप चुनाव हो रहा है। भाजपा प्रत्याशी दारा सिंह चौहान और सपा प्रत्याशी सुधाकर सिंह ही मुख्य लड़ाई में माने जा रहे हैं। सपा इस चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करके लोकसभा चुनाव से पहले अपनी मजबूती का संदेश देना चाहती है।
इसके लिए प्रदेश सपा मुख्यालय से उन सभी नेताओं व कार्यकर्ताओं को फोन करके पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से जुटने के लिए कहा जा रहा है, जो जनता के बीच सक्रिय हैं। आजमगढ़, गाजीपुर, बलिया, देवरिया और गोरखपुर जिलों के सपा नेताओं से कहा गया है कि वे घोसी क्षेत्र में जाएं और अपने सजातीय जनों से उनके घरों पर जाकर मिलें।
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जहां संभव हो, वहां छोटी-छोटी मोहल्ला बैठकें करके लोगों के समझाएं कि दलितों और पिछड़ों के हित सपा में ही सुरक्षित हैं। इस लिहाज से सपा ने मुस्लिमों के अलावा राजभर, कश्यप, नोनिया चौहान और निषाद समाज के अपने नेताओं को मैदान में उतारा है।
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पूर्व मंत्री दारा सिंह चौहान के सपा छोड़ भाजपा में जाने से इस सीट पर उप चुनाव हो रहा है। भाजपा प्रत्याशी दारा सिंह चौहान और सपा प्रत्याशी सुधाकर सिंह ही मुख्य लड़ाई में माने जा रहे हैं। सपा इस चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करके लोकसभा चुनाव से पहले अपनी मजबूती का संदेश देना चाहती है।
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इसके लिए प्रदेश सपा मुख्यालय से उन सभी नेताओं व कार्यकर्ताओं को फोन करके पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से जुटने के लिए कहा जा रहा है, जो जनता के बीच सक्रिय हैं। आजमगढ़, गाजीपुर, बलिया, देवरिया और गोरखपुर जिलों के सपा नेताओं से कहा गया है कि वे घोसी क्षेत्र में जाएं और अपने सजातीय जनों से उनके घरों पर जाकर मिलें।
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जहां संभव हो, वहां छोटी-छोटी मोहल्ला बैठकें करके लोगों के समझाएं कि दलितों और पिछड़ों के हित सपा में ही सुरक्षित हैं। इस लिहाज से सपा ने मुस्लिमों के अलावा राजभर, कश्यप, नोनिया चौहान और निषाद समाज के अपने नेताओं को मैदान में उतारा है।
सपा सूत्रों का कहना है कि सामान्य जातियों में उन नेताओं की मदद भी ली जा रही है, जो कुछ समय पहले तक भाजपा के लिए काम कर रहे थे, लेकिन अब किन्हीं कारणों से उनका सत्ताधारी दल से मोह भंग हो चुका है।
सपा के रणनीतिकारों का मानना है कि अल्पसंख्यकों व पिछड़ों के साथ-साथ दलितों के भी एक तबके का उसे इस चुनाव में समर्थन मिलेगा। पार्टी के आधार वोट में जितने अधिक सामान्य वर्ग के मतदाता प्लस होंगे, उतना ही अधिक फायदा मिलेगा। चुनाव प्रचार के आखिरी सप्ताह में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी घोसी जा सकते हैं। उससे पहले पार्टी के सभी प्रमुख नेता वहां का दौरा कर चुके होंगे।