राजस्थान में सपा ने छोड़ा कांग्रेस का 'हाथ', बसपा की तर्ज पर अकेले लड़ेगी चुनाव
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प्रदेश की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले सपा व बसपा की कांग्रेस के साथ तल्खी बढ़ती जा रही है। इसी के चलते राजस्थान में आखिरी वक्त में सपा व कांग्रेस का गठबंधन टूट गया है। कांग्रेस ने राजस्थान में अन्य विपक्षी दलों के लिए पांच सीट छोड़ी है। सपा को भी तीन सीट दी जा रही थीं लेकिन सपा ने गठबंधन से खुद को अलग कर लिया। अब सपा आदा दर्जन से ज्यादा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी।
सपा-बसपा शुरुआती दौर में छत्तीसगढ़ व मध्य प्रदेश में कांग्रेस के साथ गठबंधन चाहते थे। वजह ज्यादा सीटों की डिमांड रही हो या कोई और, गठबंधन परवान नहीं चढ़ा सका। बसपा छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी की जनता कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है तो मध्य प्रदेश में अपने बूते पर चुनाव मैदान में है।
इसी तरह सपा दोनों राज्यों में गोडवाणा गणतंत्र पार्टी के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ रही है। राजस्थान में सपा के प्रदेश प्रभारी और कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूढ़ी के बीच कई दौर की बातचीत के बात गठबंधन पर सहमति बन गई थी। इसके बाद कांग्रेस व सपा के शीर्ष नेताओं के बीच बातचीत हुई। इसमें तीन सीट सपा के लिए छोड़ने पर सहमति बनी।
इसके अलावा राष्ट्रीय लोकदल व शरद यादव के लोकतांत्रिक जनता दल के लिए दो-दो तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को एक सीट देने पर आम राय बनी। सपा को अलवर जिले की यादव व मुस्लिम बहुल सीट दी जानी थी। कांग्रेस प्रत्याशियों की तीसरी सूची आने से पहले सपा ने झटका देते हुए खुद को गछबंधन से अलग कर लिया।
.... तो महागठबंधन का हिस्सा नहीं रहेगी कांग्रेस
राजस्थान में गठबंधन टूटने से पहले छत्तीसगढ़ व मध्य प्रदेश में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा के साथ ही कांग्रेस नेताओं को निशाने रखा। दरअसल, मायावती ने तल्ख तेवर दिखाते हुए कांग्रेस व भाजपा को सांपनाथ-नागनाथ की संज्ञा दी तो अगले ही दिन अखिलेश ने साइकिल से हाथ हटाने की चेतावनी देकर इशारों ही इशारों मे कांग्रेस से अलग रास्ता अख्तियार करने का संकेत दे दिया। माना जा रहा है कि कांग्रेस के प्रति अखिलेश यादव के रुख में बदलाव बसपा के कारण हुआ है। राजस्थान में कांग्रेस से गठबंधन तोड़ने के पीछे भी मुख्य वजह बसपा ही है। दरअसल, यूपी में बसपा से गठबंधन के लिए त्यागा करने की घोषणा करने वाले अखिलेश नहीं चाहते कि कांग्रेस को लेकर सपा-बसपा का रुख अलग-अलग रहे। यदि सपा राजस्थान में कांग्रेस से गठबंधन कर लेती तो कांग्रेस को लेकर उनकी राय जुदा हो जाती। अखिलेश यादव ने कांग्रेस से दूरी बनाकर एक तरह से मायावती के एजेंडे को ही आगे बढ़ाया है।
यूपी की सियासत पर पड़ सकता है असर
तीन हिंदी भाषी राज्यों में कांग्रेस, सपा और बसपा के अलग-अलग चुनाव लड़ने का असर प्रदेश की सियासत पर पड़ने की संभावना है। अभी तक प्रदेश में भाजपा के खिलाफ महागठबंधन की तैयारी चल रही है। इसमें सपा-बसपा-रालोद के साथ ही कांग्रेस के भी शामिल रहने की अटकलें लगाई जा रही थी। अब, हो सकता है कि प्रस्तावित गठबंधन में कांग्रेस की हिस्सेदारी न रहे। ऐसे में कांग्रेस को अकेले चुनाव लड़ना पड़ सकता है।