यूपी: बागी हुए अखिलेश, दो खेमों में बंटी पार्टी, अब होगी वर्चस्व की जंग
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अपने रजत जयंती वर्ष में समाजवादी पार्टी आखिर विभाजन की ओर बढ़ ही गई है। टिकट वितरण और पार्टी के फैसलों में अनदेखी से आहत अखिलेश यादव ने बृहस्पतिवार को आखिरकार बगावत का झंडा उठा लिया।
उन्होंने विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की आधिकारिक लिस्ट से अलग अपने 235 प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी। इनमें से 171 मौजूदा विधायकों को टिकट दिया गया है जबकि 64 हारी हुई सीटों पर भी उम्मीदवार घोषित किए गए हैं।
वहीं, प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने रात 11:40 पर बची हुई 78 सीटों में से 68 पर उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया। हालांकि, ज्यादातर नाम दोनों लिस्टों में हैं। लेकिन अब पार्टी में वर्चस्व की जंग छिड़ना तय है। पार्टी पर किसका हक होगा, यह जल्द ही साफ हो जाएगा।
इससे पहले दिन में अखिलेश ने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से मिलकर अपने नजदीकी मंत्रियों, विधायकों व अन्य नेताओं के लिए टिकट की मांग की थी। सकारात्मक जवाब न मिलने पर वे अपने सरकार आवास लौटे और विधायकों की बैठक में उन्हें टिकट की चिंता किए बिना चुनाव की तैयारी में जुट जाने को कह दिया।
मुलायम ने जिनके नाम काटे वो अखिलेश की लिस्ट में
अखिलेश की सूची में उन मंत्रियों और विधायकों के नाम शामिल हैं, जिनके टिकट मुलायम ने काट दिए थे। इनमें मंत्री रामगोविंद चौधरी, अरविंद सिंह गोप और पवन पांडेय शामिल हैं। जिन मंत्रियों के टिकटों की घोषणा रोक ली गई थी, सीएम ने उन्हें भी प्रत्याशी बनाया है।
ऐसे मंत्रियों में कमाल अख्तर नरेंद्र सिंह वर्मा, मूल चंद चौहान, यासर शाह, अभिषेक मिश्र, शैलेंद्र यादव ललई, वसीम अहमद, सुधीर रावत और हेमराज वर्मा मुख्य हैं।
इनमें से दो को छोड़कर बाकी नाम देर रात शिवपाल की भी लिस्ट में भी आ गए। यासर शाह की मां रुआब सईद को बहराइच की मटेरी सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। पहले उनके पिता वकार अहमद शाह इस सीट से जीते थे।
सीएम की सूची में लखनऊ की मलिहाबाद सीट से विधायक इंदल सिंह रावत और मोहनलालगंज से चन्द्रा रावत का नाम है। बरेली की नवाबगंज सीट से भगवत शरण गंगवार को टिकट दिया गया है। मुलायम ने उनका टिकट काट दिया था। मेरठ की सरधना सीट से अतुल प्रधान को उतारा गया है।
विधायकों व नेताओं ने निर्णायक फैसला लेने को कहा
दरअसल, मुलायम के 325 प्रत्याशियों की सूची जारी करने के बाद सपा की राजनीति गरमाई हुई थी। अखिलेश के नजदीकी तीन मंत्रियों व दो दर्जन विधायकों के टिकट कटने से उनके समर्थकों में आक्रोश था।
बृहस्पतिवार सुबह ही सीएम के कालीदास मार्ग स्थित सरकारी आवास पर समर्थकों का पहुंचना शुरू हो गया था। 11 विधायकों, प्रमुख नेताओं की अखिलेश के साथ बैठक होनी थी। सीएम ने मंत्रियों और कुछ विधायकों से पहले अलग-अलग बात की, इसके बाद सपा सुप्रीमो मुलायम से मिलने चले गए।
वहां से लौटने के बाद विधायकों व नेताओं ने उनसे निर्णायक फैसला लेने का आग्रह किया। कहा, उनके चेहरे पर चुनाव लड़ा जाएगा। आज ही कोई निर्णय होना चाहिए। अखिलेश ने कहा, सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ आगे आना होगा। पीछे हटे तो जनता माफ नहीं करेगी।
मुलायम से बोले अखिलेश, टिकट देने का कोई तो पैमाना हो
अखिलेश ने समर्थक विधायकों की बैठक में बताया कि मैंने नेताजी को पूरी बात समझाई। कहा, टिकट वितरण का पैमाना होना चाहिए। जिन लोगों ने पांच साल काम किया है, उन्हें ईनाम मिलना चाहिए। जो जीत सकता है, चुनाव उसी को लड़ाया जाए। हमने जिताऊ उम्मीदवारों का सर्वे कराया है। लेकिन मुलायम-शिवपाल के साथ अखिलेश की बैठक बेनतीजा रही।
दोनों की लिस्ट सोशल मीडिया पर जारी हुई
अखिलेश और शिवपाल ने अपनी-अपनी लिस्ट सोशल मीडिया पर जारी की। हालांकि शिवपाल ने तो मीडिया को देर रात विज्ञप्ति भेज दी।
अखिलेश की लिस्ट में अतीक अहमद व अमनमणि के नाम नहीं
अखिलेश की लिस्ट में कत्ल के आरोपी माफिया अतीक अहमद और अमनमणि त्रिपाठी के नाम नहीं हैं। अमनमणि की नौतनवा सीट से नया उम्मीदवार उतारा गया है।
अखिलेश की लिस्ट में अपर्णा यादव का नाम नहीं
सीएम अखिलेश की सूची में मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव का नाम नहीं है। जबकि अपर्णा का नाम लखनऊ कैंट से साल भर पहले ही घोषित हो चुका था।
शिवपाल ने दो और मंत्रियों व 16 विधायकों के टिकट काटे
सपा प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने बृहस्पतिवार रात जारी 68 और प्रत्याशियों की सूची में 52 सीटें ऐसी हैं, जहां पर सपा के विधायक हैं। जबकि 16 सीटें हैं जहां पार्टी चुनाव हारी थी। शिवपाल कुल मिलाकर 393 प्रत्याशी घोषित हो चुके हैं। केवल 10 प्रत्याशी ही बचे हैं।
शिवपाल की लिस्ट में लखनऊ उत्तर सीट से अखिलेश के करीबी मंत्री अभिषेक मिश्र को टिकट दिया गया है। खाद्य एवं रसद मंत्री कमाल अख्तर को फिर से अमरोहा के हसनपुर सीट से प्रत्याशी बनाया गया है।
प्रतापगढ़ की रानीपुर सीट से शिवाकान्त ओझा को टिकट मिल गया है। अंबेडकर नगर की कटेहरी सीट से शंखलाल मांझी व बहराइच की सीट मटेरा से यासर शाह को प्रत्याशी बनाया गया है। इसी प्रकार आजमगढ़ की गोपालपुर सीट से वसीम अहमद को टिकट मिला है।
मंत्री बंशीधर बौद्ध को बहराइच की बलहा सीट से प्रत्याशी बनाया गया है। लेकिन अखिलेश के समर्थक मंत्री शैलेंद यादव ललई ओर हेमराज वर्मा का नाम शिवपाल की सूची में नहीं है। इसके अलावा 16 और विधायकों के टिकट काटे गए हैं।
अब होगी वर्चस्व के लिए होगी जंग
अखिलेश और शिवपाल की अलग-अलग सूचियां आ जाने के बाद अब पार्टी में वर्चस्व की जंग होगी। पहले पार्टी के नाम और सिंबल पर कब्जे की लड़ाई होगी और फिर क्षत्रपों को अपनी ओर मिलाने की।
दोनों खेमों की सूची में अधिकतर नाम कॉमन हैं। ऐसे में प्रत्याशियों को तय करना होगा कि वे अखिलेश के साथ हैं या मुलायम-शिवपाल के। दोनों खेमों की चुनावी रणनीति अलग होगी। अब उनके पास सीमित विकल्प बचे हैं।
परिवार: समझौते की संभावना खत्म
अधिकतर लोग मानते हैं कि पानी अब सिर से गुजर चुका है। तलवार म्यान से निकल चुकी है। अखिलेश-शिवपाल में इतनी दूरियां बढ़ गई हैं कि सुलह की संभावनाएं न के बराबर हैं। मुलायम जिस तरह शिवपाल पर भरोसा कर रहे हैं, उससे लगता नहीं कि रार खत्म होगी।
कांग्रेस से दोस्ती कर सकते हैं अखिलेश
सपा से अलग होकर चुनाव लड़ने की स्थिति में अखिलेश कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल के साथ गठबंधन कर सकते हैं। वे पिछले कुछ दिनों से लगातार कह रहे हैं कि गठबंधन करके लड़ेंगे तो 300 से ज्यादा सीटें मिलेंगी।
पिछले दिल्ली दौरे में अखिलेश व प्रियंका के बीच बातचीत की चर्चाओं के बीच कांग्रेस के साथ उनकी दोस्ती परवान चढ़ सकती है। अखिलेश ने कांग्रेस की 22 सीटों में से महज 5 पर उम्मीदवार उतारे हैं।
सिंबल : सीज हो सकती है साइकिल
पार्टी के दो फाड़ होने की स्थिति में सपा के दोनों धड़े साइकिल सिंबल पर क्लेम करेंगे। इसके लिए कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। विवाद का हल न निकलने पर निर्वाचन आयोग सिंबल को सीज कर सकता है। सपा का विभाजन होने की स्थिति में दोनों धड़ों को राज्य स्तर पर मान्यता प्राप्त दल के लिए निर्धारित सिंबल मिल सकता है।
रामगोपाल बोले, कुछ नहीं चाहते कि अखिलेश सीएम बनें
बहुत सारी शक्तियां हैं। कुछ दल के बाहर और कुछ दल के अंदर, जो नहीं चाहते कि अखिलेश फिर से सीएम बनें। लेकिन पार्टी में सीएम की भूमिका सीएम की ही रहेगी। अखिलेश में ऐसी काबिलियत है कि 2019 में वो देश के सबसे बड़े लीडर बनें।