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Lucknow News: अंगदाता को किया नमन, सम्मान के साथ दी शव को विदाई
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लखनऊ। केजीएमयू की मॉर्च्यूरी पर बुधवार को कुछ अलग नजारा दिखा। पोस्टमार्टम के बाद बाहर निकाले गए अंगदाता के शव को कर्मचारियों से लेकर डॉक्टरों तक ने श्रद्धांजलि और सलामी दी। यह सम्मान ब्रेनडेड होने के बाद अपना लिवर दान करने वाले अजीत कुमार श्रीवास्तव का था। अंगदान करने से उनके पार्थिव शव को सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
सड़क हदासे में घायल राजाजीपुरम निवासी अजीत (58) को केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने पर वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन बाद में उन्हें ब्रेनडेड घोषित कर दिया गया। केजीएमयू की ओर से अंगदान के लिए काउंसिलिंग करने पर घरवाले तैयार हो गए। इसके बाद केजीएमयू में ही भर्ती बाराबंकी के 35 वर्षीय श्रवण कुमार को उनका लिवर प्रत्यारोपित कर दिया गया।
अंगदान बचा सकता है कई लोगों का जीवन
केजीएमयू के गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अभिजीत चन्द्रा ने कहा कि ब्रेनडेड मरीजों के अंगदान की प्रक्रिया में तेजी आए तो काफी लोगों की जान बचाई जा सकती है। अंगदान करना परिवारीजन के लिए साहस का काम है। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी हैं कि हम उनका सम्मान करें। प्रत्यारोपण समन्वयक पीयूष श्रीवास्तव ने पार्थिव शरीर परिजन के सुपुर्द किया।
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सड़क हदासे में घायल राजाजीपुरम निवासी अजीत (58) को केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने पर वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन बाद में उन्हें ब्रेनडेड घोषित कर दिया गया। केजीएमयू की ओर से अंगदान के लिए काउंसिलिंग करने पर घरवाले तैयार हो गए। इसके बाद केजीएमयू में ही भर्ती बाराबंकी के 35 वर्षीय श्रवण कुमार को उनका लिवर प्रत्यारोपित कर दिया गया।
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अंगदान बचा सकता है कई लोगों का जीवन
केजीएमयू के गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अभिजीत चन्द्रा ने कहा कि ब्रेनडेड मरीजों के अंगदान की प्रक्रिया में तेजी आए तो काफी लोगों की जान बचाई जा सकती है। अंगदान करना परिवारीजन के लिए साहस का काम है। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी हैं कि हम उनका सम्मान करें। प्रत्यारोपण समन्वयक पीयूष श्रीवास्तव ने पार्थिव शरीर परिजन के सुपुर्द किया।
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