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Lucknow News: 16 साल बाद दोबारा अपने पैरों पर खड़ी हुई साक्षी
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साक्षी।
लखनऊ। 19 साल की साक्षी 16 साल बाद दोबारा अपने पैरों पर खड़ी हो पाई है। साक्षी के जज्बे और किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (पीएमआर) विभाग की मदद से यह संभव हो पाया है।
केजीएमयू में प्रोस्थेटिक ऑर्थोटिक यूनिट की प्रभारी शगुन सिंह ने बताया कि गोरखपुर निवासी अनिल पासवान की बेटी साक्षी को तीन साल की उम्र में पैरों में छाले (अल्सर) पड़ने लगे थे। उपचार से राहत नहीं मिली और तीन साल की उम्र में ही उसे चलने में समस्या होने लगी। उम्र के साथ समस्या बढ़ती रही और उसका चलना बंद हो गया। इलाज के लिए घरवाले एम्स दिल्ली तक गए। इसके बाद उसे पैर में संक्रमण होने लगा। स्थिति तब और खराब हो गई, जब संक्रमण की वजह से केजीएमयू के ही प्लास्टिक सर्जरी विभाग में उसका एक पैर काटना पड़ा। घाव सही न होने पर उसे पीएमआर विभाग रेफर कर दिया गया।
घाव में चुभते थे सामान्य उपकरण
पीएमआर विभाग के प्रमुख डॉ. अनिल गुप्ता के मुताबिक पैरों में जख्म होने के कारण उपकरण तैयार करने में दिक्कत आ रही थी। सामान्य उपकरण उसके घाव में चुभ रहे थे। इसको देखते हुए इलाज के माध्यम से पहले उसे अल्सर से राहत दिलाई गई। इसके बाद सेंसर मशीन के जरिये सहायक उपकरण (करेक्टिव) तैयार किए गए। इनकी विशेषता यह है कि जिस हिस्से में घाव हैं, वहां पर दबाव नहीं पड़ता है। ये उपकरण साक्षी के दोनों पैरों में लगाने के बाद अब वह चलने लगी है।
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डॉक्टर बनना है साक्षी का सपना
वर्तमान में साक्षी 11वीं की छात्रा है। उसका सपना नीट की तैयारी करके डाॅक्टर बनना है। साक्षी के मुताबिक डॉक्टर बनकर जरूरतमंद लोगों की सेवा करना चाहती हैं। उनके पिता अनिल के अनुसार अब साक्षी खुद सभी को चलकर दिखाती है। इससे पूरे घर में खुशी का माहाैल है।
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केजीएमयू में प्रोस्थेटिक ऑर्थोटिक यूनिट की प्रभारी शगुन सिंह ने बताया कि गोरखपुर निवासी अनिल पासवान की बेटी साक्षी को तीन साल की उम्र में पैरों में छाले (अल्सर) पड़ने लगे थे। उपचार से राहत नहीं मिली और तीन साल की उम्र में ही उसे चलने में समस्या होने लगी। उम्र के साथ समस्या बढ़ती रही और उसका चलना बंद हो गया। इलाज के लिए घरवाले एम्स दिल्ली तक गए। इसके बाद उसे पैर में संक्रमण होने लगा। स्थिति तब और खराब हो गई, जब संक्रमण की वजह से केजीएमयू के ही प्लास्टिक सर्जरी विभाग में उसका एक पैर काटना पड़ा। घाव सही न होने पर उसे पीएमआर विभाग रेफर कर दिया गया।
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घाव में चुभते थे सामान्य उपकरण
पीएमआर विभाग के प्रमुख डॉ. अनिल गुप्ता के मुताबिक पैरों में जख्म होने के कारण उपकरण तैयार करने में दिक्कत आ रही थी। सामान्य उपकरण उसके घाव में चुभ रहे थे। इसको देखते हुए इलाज के माध्यम से पहले उसे अल्सर से राहत दिलाई गई। इसके बाद सेंसर मशीन के जरिये सहायक उपकरण (करेक्टिव) तैयार किए गए। इनकी विशेषता यह है कि जिस हिस्से में घाव हैं, वहां पर दबाव नहीं पड़ता है। ये उपकरण साक्षी के दोनों पैरों में लगाने के बाद अब वह चलने लगी है।
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डॉक्टर बनना है साक्षी का सपना
वर्तमान में साक्षी 11वीं की छात्रा है। उसका सपना नीट की तैयारी करके डाॅक्टर बनना है। साक्षी के मुताबिक डॉक्टर बनकर जरूरतमंद लोगों की सेवा करना चाहती हैं। उनके पिता अनिल के अनुसार अब साक्षी खुद सभी को चलकर दिखाती है। इससे पूरे घर में खुशी का माहाैल है।