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‘सरकार’ चाचा और बुआ से परेशान
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 13 Jan 2014 11:44 AM IST
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आखिरकार ‘सरकार’ के सब्र का बांध टूट ही गया। पराये तो पराये हैं, अपने भी आंखें तरेरें, यह कहां तक ठीक है।
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सैफई महोत्सव को लेकर चौतरफा फजीहत के बाद ‘सरकार’ जब सफाई देने मीडिया के सामने आए तो उनके निशाने पर एक अपने भी थे जिन्हें उनकी पार्टी राज्यसभा भेज चुकी है।
‘सरकार’ भरे बैठे थे इसलिए उनके साथ जो भी उपकार किए थे सब खोलकर रख दिया। मीडिया के लोगों ने चुटकी ली कि आप तो उन्हें ‘चाचा’ कहते हैं। ‘सरकार’ ने तपाक से कहा कि ‘चाचा’ तो बहुतों को कहते हैं।
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साथ ही वे जोड़ना नहीं भूले कि और ‘बुआ’ भी कहते थे। ‘सरकार’ के चाचाओं को तो सभी जानते हैं लेकिन ये ‘बुआ’ कहां से आ गईं, इसे लेकर कानाफूसी होने लगी।
एक पुराने पत्रकार ने याद दिलाया कि बुआ तो एक ही थीं वह भी तब जब सपा-बसपा गठबंधन की सरकार थी।
अब चाचा के साथ उन्हें बुआ की याद कैसे आ गई यह तो वही बता सकते हैं, लेकिन यह तो साफ हो गया कि वक्त-बेवक्त परेशान करने वाले चाचाओं को ‘सरकार’ अब बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं।
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